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महिला दिवस स्पेशल-जानिए, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से जुड़ी कुछ खास बातें

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संजय कुमार सुमन(साहित्यकार) sk.suman379@gmail.com

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर दुनिया भर में महिलाओं और उनके जज्बे को सलाम किया जा रहा है। हर साल 8 मार्च को महिला सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदमों को इस दिन उत्सव की तरह मनाते हैं। ये दिन विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल कर चुकी महिलाओं के अलावा संघर्ष कर रही महिलाओं के नाम भी है।कहते हैं महिला दिवस को 8 मार्च को मनाने के पीछे एक रोचक घटना है।जी दरअसल हुआ यूँ था कि जब क्लारा ने वुमेन्स डे मनाने की बात कही थी, तब उन्होंने कोई दिन या तारीख नहीं दी थी।

8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए इमेज नतीजे

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सर्वप्रथम अमेरिका में 28 फरवरी 1909 में महिला दिवस मनाया गया।वर्ष 1910 में जर्मनी की एक महिला नेता क्लारा जेटकिन ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा।तत्पश्चात 17 देशो की 100 महिला लीडर्स ने इस सुझाव पर सहमति जताई,लेकिन इस समय इनका उद्देश्य केवल महिलाओ को मताधिकार दिलाना था ।सर्वप्रथम अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मानाने वावाले देशो मे ऑस्ट्रिया,स्विट्जरलेंड,डेनमार्क व जर्मनी अग्रणी रहे है।वर्ष 1913 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की तिथि को बदल कर 8 मार्च कर दिया गया।तब से लेकर अभी तक महिला दिवस इसी दिन मनाया जा रहा है।लेकिन इस बिच इसे फरवरी माह के अंतिम रविवार को मानाने का प्रावधान भी किया गया था।
लेकिन 1917 में रूस की कुछ महिलाओ ने इसका विरोध किया,क्योंकि उनके यहाँ जूलियन केलेंडर मान्य था जबकि पुरे विश्व में ग्रेगोरीयन केलेंडर जिसके हिसाब से अंतिम रविवार 8 मार्च को पड़ा क्योंकि फरवरी तो 28 दिन की होती थी।इसलिए चौथा रविवार मार्च में गिना गया जो की 8 मार्च को था।तब से इसे 8 मार्च में ही मनाया जाता है जिसे रूस ने भी स्वीकृति दे दी।वर्ष 1975 को पहली बार यूनाइटेड नेशन ने अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया।वर्ष 1990 में शोशलिस्ट इंटरनेशनल कोपेनहेगन के सम्मलेन में महिला दिवस को इंटरनेशनल मानक दिया गया।

वर्तमान हालात

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गौरतलब है कि आजाद भारत में महिलाएं दिन-प्रतिदिन अपनी लगन, मेहनत एवं सराहनीय कार्यों द्वारा राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुई हैं। लंबे अरसे के अथक परिश्रम के बाद आज भारतीय महिलाएं समूचे विश्व में अपने पदचिन्ह छोड़ रही हैं। मुझे कहने में कोई गुरेज नहीं है कि पुरुष प्रधान रूढ़िवादी समाज में महिलाएं निश्चित रूप से आगामी स्वर्णिम भारत की नींव और मजबूत करने का हर संभव प्रयास कर रहीं हैं, जो सचमुच काबिले तारीफ है। भारतीय महिलाये विश्व में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब हुई है फिर चाहे वो अंतर्राष्ट्रीय न्यायलय हो या नासा जैसी वैज्ञानिक संस्था हो।हां, यह जरूर है कि कुछ जगह अब भी महिलाएं घर की चारदीवारी में कैद होकर रूढ़िवादी परंपराओं का बोझ ढो रही हैं। वजह भी साफ है, पुरूष प्रधान समाज का महज संकुचित मानसिकता में बंधे होना।इन सबके बावजूद आज की महिलाये अपने अधिकारो के लिए जागृत है व अपने हक़ के लिए आवाज उठाना जानती है।जिसमे पर्दा प्रथा,सती प्रथा,तीन तलाक बिल,हलाला इनकी बानगी है।आज की महिलाये डरती नही आगे बढ़ती है।हां यह बात जरूर है की उन्हें कुछ विषम परिस्थितियों का भी शिकार होना पड़ता है जिनमे कुछ भेड़िया प्रवृति के लोगो का दोष है जो इस मातृशक्ति को भोग और विलासिता का साधन समझते है।ऐसे तुच्छ विचारधारा के लोगो को जवाब देने का महिलाओ ने बीड़ा उठा रखा है जिसमे गुलाबी गैंग जैसे महिला समूह सक्रीय है।लेकिन इन सबसे ज्यादा जरुरी पुरुषप्रधान उस समाज क्व दृष्टिकोण में बदलाव लाना पड़ेगा,उनके नजरिये को बदलना पड़ेगा,हमारे देश को विकाशशील से विकसित होने के लिए हमारी बहन बेटिया महफूज रहना नितांत आवश्यक है।

8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए इमेज नतीजे

महिलाओ के लिए समानता के अवसर
भारतीय संविधान महिलाओ को सामान अधिकार देने की बात करता है।
जिसमे अनुच्छेद 14 महिलाओ को सामान अधिकार,अनुछेद 15(क)राज्यो द्वारा कोई भेद नही करने,अनुछेद 16 अवसर की समानता,अनुछेद 39(घ) समान कार्य के लिए समान वेतन,अनुछेद 42 काम की उचित व मानवीय परिस्थितियों व प्रसूति अवकाश के लिए अधिकार देता है।
इन सभी अनुछेदो ने महिलाओ के विकास के लिए मील के पत्थर का काम किया है।

भारतीय महिलाओ की प्रेरणात्मक भूमिका

भारतीय इतिहास को गौरवान्वित करने वाली कुछ महिलाओ की बात करते है।वैदिक काल से गार्गी,सिकता,घोषा,अपाला,कक्षावरि,लोपामुद्रा मैत्रेयी जैसी विदुषियों ने भारत को अपने आप पर गर्व करने के अवसर प्रदान किये है रान पद्मिनी को भी भुला नही सकते जिसने अपने सतीत्व की रक्षा के लिए 1600 रानियों के साथ में जौहर कर दिया था।मदर टेरेसा ने निःस्वार्थ सेवा के क्षेत्र में अपने जीवन को समर्पित कर दिया।जीजा बाई ने विषम परिस्थियों में शिवाजी जैसा हीरा भारत को दिया।लक्ष्मी बाई की शहादत को कौन भूल सकता है।सावित्री बाई फुले ने पहली महिला शिक्षिका के रूप में नए आयाम स्थापित किये।पन्नाधाय व मारवाड़ की पन्ना गौर धाय ने बलिदान की परिभाषा सिखला दी।

8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए इमेज नतीजेवर्तमान परिप्रेक्ष्य में सानिया मिर्जा,मिताली राज,शैफाली वर्मा,सायना नेहवाल,कर्णम मल्लेश्वरी,मेरीकॉम,हिमा दास जैसी विभूतियो ने खेल के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किये है।भारतीय राजनीति भी महिलाओ के स्वर्णिम कार्यो से अछूती नही है।इंदिरा गांधी,सुचेता कृपलानी,सरोजिनी नायडू(जिनके जन्मदिवस पर राष्ट्रिय महिला दिवस मनाया जाता है),मीरा कुमार,प्रतिभा पाटिल जैसी महान महिलाओ ने भारतीय राजनीती को नए आयाम दिए।पुरे ब्रह्माण्ड में भारत को पहचान दिलाने में कल्पना चावला,सुनीता विलियम्स जैसी महिलाओ ने खूब सार्थक प्रयास किये।इन सबके आलावा भी ऐसे अनेको नाम जहन में है जिनको याद करने बैठे तो शब्द व कलम की स्याही कम पड़ जाए।

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