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प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने नहीं सुनी गुहार, ग्रामीणों ने खुद कराया चचरी पुल निर्माण और तामझाम के साथ किया उद्घाटन

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त्रिवेणीगंज, सुपौल/ एक ओर सरकार जहां गांव से लेकर शहर तक सड़क निर्माण की बात कह विकास का दंभ भर रही है. वहीं मुख्यालय लतौना दक्षिण पंचायत के शिवनगर स्थित नेपाली टोला मे आज भी लोगों के लिए आवागमन की सुविधा मयस्सर नहीं है. यहां पर लोगों की जिंदगी आजादी के 74 वर्षों के बाद भी चचरी पुल और बिना सड़क के कट रही है।

दरअसल मुख्यालय के लतौना दक्षिण पंचायत के शिवनगर नेपाली टोला के ग्रामीणों ने बरसात में गांव को टापू बनने से बचाने के लिए एकजुट होकर आपसी सहयोग से बुधवार को एक चचरी पुल का श्री गणेश किया है, जिससे अब सैकड़ो ग्रामीणों का आवागमन बहाल हो गया है। शिवनगर पहाड़ी टोला के लोग इस नदी के उपर पुल बनाये जाने के चिर प्रतिक्षित मांग को जनप्रतिनिधि समेत कई सरकारी नुमाइंदे के बीच रखी गई थी,लेकिन आश्वासन तो मिला पर धरातल पर काम नही हुआ। इस तरह समय पर समय बीत रहें थे। किंतु जब ग्रामीणों को लगा कि उनकी मांग का कोई सार्थक परिणाम नही निकलेगा तो ग्रामीण ललन सिंह ,बीरेंद्र सिंह,ज्ञानदेव साह, उमेश साह आदि ने फैसला कर श्रमदान से एक चचरी पुल का निर्माण कराया, जिसका उद्धघाटन ग्रामीणों के मौजूदगी में बड़े तामझाम से जाने माने लेखक व सेवानिवृत्त शिक्षक ध्रुब नारायण सिंह राई के द्वारा फीता काट कर किया गया।

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शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी : जन सहयोग ओैर श्रमदान से चचरी पुल बनकर तैयार तो हो गया, लेकिन ग्रामीणों के चेहरे पर शासन-प्रशासन की उपेक्षा को लेकर नाराजगी साफ देखा जा रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि सड़क और पुल निर्माण के लिये उनलोगों ने कई बार माननीय सहित अधिकारी से गुहार लगाया था, लेकिन मांग को पूरा करने के लिये कहीं से पहल नहीं किया गया. नाराज ग्रामीणों से क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए, आगामी महीने होने वाले विधान सभा चुनाव के दौरान मतदान का बहिष्कार करने की बात भी कही जा रही है।

सड़क व पुल नहीं रहने से नहीं सुनाई देती है शहनाई : शिवनगर नेपाली टोला के लोगों का दर्द भी अलग तरह का है। मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर दूर नेपाली टोला में शादी व्याह का मौसम शुरू होते ही लोगों का दर्द छलक कर बाहर आ जाता है। कुशहा त्राशदी के बाद शायद ही इस गांव में शहनाई बजी हो, बारात आयी या गयी हो। इसकी मुख्य वजह बाढ़ के बाद आवागमन सुलभ नहीं रहने से यहां लड़के-लड़कियों के रिश्ते आने काफी कम हो गए हैं। अगर आते भी हैं तो लोगो को शादी बाहर जा कर करनी पड़ती है। इस गांव में चार पहिया वाहनों की बात तो दूर दो पहिया वाहनों को भी आने जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है । गौरतलब हो कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार-बार यह दोहराते नहीं थकते कि पिछले दस साल के दौरान उनकी सरकार ने बारह हजार से ज्यादा पुल व पुलियों का निर्माण कराया है।

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