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बाढ़ में नहीं हो पाया पशु चारा का भंडारण, पशुपालक परेशान

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उदाकिशुनगंज/मधेपुरा/ उदाकिशुनगंज अनुमंडल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ का पानी आने के साथ ही पशुपालकों की परेशानी बढ़ जाती है। बाढ़ की त्रासदी में हजारों एकड़ में लगी फसल बर्बाद होने के साथ ही पशुओं का चारा भी नष्ट हो चुका है। अब पशुपालको के समक्ष पशुओं को खिलाने के लिए चारे का अभाव देखा जा रहा है। वहीँ निचले इलाके के लोग अपने अपने पशुओं को ऊंचे स्थानों पर लेकर रह रहे है। लेकिन पशुपालक अहले- सुबह पशुओं के चारे के इंतजाम में घर से निकलते हैं और दूर दूर सुखाड़ इलाकों में जाकर हरे चारा को काफी मशक्कत के साथ लाने को विवश हैं।

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पशुपालक बेचन ठाकुर,मोहम्मद होसैन,नरेश मंडल,नारद पासवान,मोहम्मद सनीफ आदि ने बताया कि ऊँचे इलाकों से घास लाने के लिए प्रतिदिन एक व्यक्ति को जाना पड़ता है। अगर पशुओं की संख्या एक से अधिक हो तो घर में एक व्यक्ति के भरोसे बच्चों को छोड़कर पशुओं के चारे के लिए दूर दूर जाना पड़ता है। घर से खाना लेकर पशुओं के चारे के लिए अहले सुबह निकलते हैं और देर शाम तक घर वापस आते हैं। ऐसा करने में इन दिनों पशुपालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पशुओं के लिए प्रशासनिक एवं विभागीय स्तर से चारा की व्यवस्था अब तक नहीं किए जाने से पशुपालक परेशान हैं।

बाढ़ पीड़ितों को अपने परिवार के साथ मवेशी की चिंता भी करनी पड़ रही है। पशुपालक जान जोखिम में डाल दियारा इलाकों में चारा के लिए खाक छान रहे हैं। बताते चलें कि आलमनगर,चौसा एवं उदाकिशुनगंज प्रखंडों के निचले इलाकों के दर्जनों गावों के लोगों के लिए मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अपने परिवार की सुरक्षा के साथ ही मवेशी के चारे की व्यस्था करना भी परेशानी का सबब साबित हो रहा है।

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