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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा

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संजय कुमार सुमन 

sk.suman379@gmail.com

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद मध्य प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है। शाम होते-होते सिंधिया के समर्थक 22 विधायकों ने भी कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इतने सारे इस्तीफों के बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता जाती हुई दिख रही है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ जल्द ही राज्यपाल लालजी टंडन को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। सिंधिया परिवार की वजह से मध्य प्रदेश में दूसरी बार कांग्रेस सत्ता से बाहर होती दिख रही है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. माधवराव सिंधिया की आज 10 मार्च को 75वीं जयंती है। महज यह संयोग है या कुछ और कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 10 मार्च को ही कांग्रेस से अपना इस्तीफा दिया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश की राजनीति में जाना-पहचाना नाम है। ज्योतिरादित्य, सिंधिया राजघराने के तीसरी पीढ़ी के नेता हैं और अपने गढ़ में गहरी पकड़ रखते हैं।

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ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्म 1 जनवरी 1971 को मुंबई में हुआ था और उन्होंने 1993 में हावर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र की डिग्री ली। इसके बाद 2001 में उन्होंने स्टैनफोर्ड ग्रुजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया। ज्योतिरादित्य की 1984 बड़ौदा के गायकवाड़ घराने की प्रियदर्शिनी से शादी हुई है और उनके एक बेटा महा आर्यमान और बेटी अनन्याराजे हैं।राजनीतिक सफर की बात करें तो ज्योतिरादित्य सिंधिया को राजनीति विरासत अपने पिता स्व. माधवराव सिंधिया से मिली। माधवराव सिंधिया अपने समय के दिग्गज कांग्रेस नेता थे। शुरुआत में जनसंघ के टिकट से चुनाव लड़ने के बाद वो कांग्रेस में शामिल हुए। पहले दादी विजयाराजे सिंधिया, फिर पिता माधवराव सिंधिया और अब ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना की बागडोर संभाले हुए हैं। दादी विजय राजे बीजेपी की कद्दावर नेताओं में से एक थीं।

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पहली बार गुना सीट से लड़ा चुनाव

30 सितंबर 2001 को विमान हादसे में स्व. माधवराव सिंधिया मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद विदेश से लौटे ज्योतिरादित्य ने राजनीति में उतरने का फैसला किया। ज्योतिरादित्य ने 2002 में पहली बार पिता के देहांत के बाद उनकी पारंपरिक गुना सीट से चुनाव लड़े और लोकसभा पहुंचे। 2004 में भी उन्होंने इसी सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। यूपीए सरकार में पहली बार 2007 में सिंधिया ने केंद्रीय राज्य मंत्री का पदभार संभाला और यूपीए की मनमोहन सरकार 2012 में भी उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री का स्वतंत्र प्रभार संभाला। 2014 के लोकसभा चुनाव मोदी लहर के बावजूद गुना में जीत दर्ज कराई।

बुआ यशोधरा बोलीं, राजमाता के रक्त ने लिया राष्ट्रहित में फैसला
ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफे के बाद अब सिंधिया खानदान में खुशी की लहर है। बीजेपी नेता और ज्योतिरादित्य की बुआ और शिवराज सरकार में मंत्री रह चुकीं यशोधरा राजे ने इसे साहसिक कदम बताया है। शिवपुरी से बीजेपी विधायक यशोधरा राजे ने सिंधिया के इस्तीफे पर ट्वीट किया, ‘राजमाता के रक्त ने लिया राष्ट्रहित में फैसला। साथ चलेंगे, नया देश गढ़ेंगे, अब मिट गया हर फासला। (ज्योतिरादित्य) सिंधिया द्वारा कांग्रेस छोड़ने के साहसिक कदम का मैं आत्मीय स्वागत करती हूं।’

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