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शराब कारोबारियों को छोड़, उल्टे पत्रकारों पर हीं मामला दर्ज किए जाने से पत्रकारों के स्वतंत्र लेखनी पर हुआ कठोर प्रहार

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पटना/ बिहार सहित देश जहां आज कोरोना वारियर्स स्वास्थ्यकर्मी, सफाईकर्मी, पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मी आदि अपना बहुमूल्य जीवन इस समय समाज सेवा/मानव सेवा करने में लगा दिया है वहीं मधेपुरा जिला के उदाकिशुनगंज थाना क्षेत्र में तो थाना पुलिस हाथ-धोकर मिडीयाकर्मी के पीछे ही पड़ गई है। मामला की बात करें तो उदाकिशुनगंज प्रखंड में हो रहे शराब बिक्री को लेकर लगातर खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों पर उल्टे आरोपियों द्वारा दिए आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज कर दिए जाने का है।  नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऐसे प्रशासनिक कार्य-कलापों से हतप्रभ है और इसे पत्रकार के स्वतंत्र लेखनी पर प्रशासन द्वारा कठोर प्रहार करार दिया है।

इस संदर्भ में नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के बिहार प्रदेश के वरीय उपाध्यक्ष सी.के.झा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि उदाकिशुनगंज थाना के स्थानीय प्रशासन के द्वारा मधेपुरा जिला के उदाकिशुनगंज के बैनर दैनिक भास्कर ,सन्मार्ग आदि के पत्रकारों के साथ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के कृत के लिए जितनी निंदा की जाए कम है। उन्होंने संगठन को प्राप्त हुए प्राथमिकी के प्रति के संदर्भ में कहा कि उदाकिशुनगंज में थानाध्यक्ष द्वारा बिना जांच पड़ताल किए ही पत्रकारों पर जहां के बारे में पत्रकारों ने शराब कारोबार किए जाने का भंडाफोड़ कर बिस्फोटक समाचार प्रकाशित किया था, उसी जगह पर पत्रकारों द्वारा इसे रखकर आरोपियों को फंसाने की साज़िश बताकर प्राथमिकी दर्ज करना स्थानीय प्रशासन के क्रिया- कलापों पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर दिया गया बताया है। उन्होंने ये भी कहा है कि पत्रकारों के स्वतंत्र लेखनी के उपर इस प्रकार का उल्टा एफआईआर बिना सघन जांच-पड़ताल किए प्रशासन द्वारा शराब माफियाओं को तबज्जो देने और पियक्कड़ों का मनोबल बढ़ाते हुए समाज को अस्थिर करने वाला कृत्य बताया है।

सी.के.झा ने इस तरह के स्थानीय प्रशासन के कार्रवाई के लिए बिहार सरकार के सुशासन में नशा उन्मूलन अभियान के गति में अवरोध पैदा करने में सहायक करार देने वाला करतूत भी बताया है। श्री झा ने कहा कि पत्रकारों द्वारा दिए आवेदन, समाचार का अखबार के कटिंग और आरोपियों द्वारा दिए आवेदन से स्पष्ट बदले की भावना के साथ-साथ पत्रकारों को फंसाने की मंशा जाहिर होती प्रतित दिख रही है। उन्होंने कहा कि संगठन इस प्रकरण पर क्षुब्ध हैं क्योंकि जहां स्थानीय प्रशासन को शराब कारोबारियों और इसके कृत्य पर पैनी नजर रखकर इसपर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं उल्टे पत्रकार पर प्राथमिकी दर्ज कर इस ओर से ध्यान भटकाने का प्रयास किया गया बताया है जिसे बेहद संवेदनहीन करार दिया है। पत्रकारों पर स्थानीय प्रशासन द्वारा इस आपत्तिजनक दर्ज हुए प्राथमिकी पर नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के रास्ट्रीय अध्यक्ष राकेश गुप्ता, राष्ट्रीय महासचिव संजय कुमार सुमन, राष्ट्रीय महासचिव कुमुद रंजन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष अबोध ठाकुर, मधेपुरा जिलाध्यक्ष सिकंदर सुमन सहित संगठन के दर्जनों पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से इस प्राथमिकी पर क्षोभ व्यक्त कर इसे प्रशासन की नाकामयाबियों को छिपाने हेतु गलत कार्रवाई करार दिया है और वरीय पदाधिकारियों से इस प्रकरण की गहरी,स्पष्ट और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

श्री झा ने कहा कि उदाकिशुनगंज थाना पुलिस का शराब कारोबारियों,शराब तस्करी करने वाले, चोर उचक्के और बदमाशों को पकड़ने में तो हाथ-पैर फुल जा रहें हैं। इसके बदले पत्रकारों को ही हवालात में डालने का कुत्सित मानसिकता के साथ पीछे पड़ी हुई है। नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा अनेक माध्यमों से इस प्रकरण के निष्पक्ष कार्रवाई के लिए मधेपुरा डीएम, एसपी,डीआईजी, कमिश्नर, डीजीपी बिहार, मुख्य सचिव बिहार, मंत्री सूचना एवं जनसंपर्क विभाग,मुख्य मंत्री बिहार एवं प्रेस ऑफ कौंसिल दिल्ली सहित अन्य कई पदाधिकारी को पत्र भेज कर उचित जांच-पड़ताल के साथ इसकी निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए शराब कारोबारियों और दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की है।

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श्री  झा ने कहा कि बिहार पुलिस महानिदेशक के द्वारा जारी पत्र/ज्ञापांक संख्या- 65 ,दिनांक- 30/03/19 द्वारा सभी पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि मीडियाकर्मियों, छायाकारों और पत्रकारों के कार्य के साथ अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करने और इनके कार्यों में सहयोग किया जाए। पर इस घटना ने तो पुलिस-प्रशासन के द्वारा मीडियाकर्मियों के साथ गलत व्यवहार करने के लिए प्रख्यात कर दिया।

नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश गुप्ता और राष्ट्रीय महासचिव ने संयुक्त रूप से कहा कि स्थानीय प्रशासन शराब कारोबारियों को छोड़ उल्टे पत्रकारों पर हीं मामला दर्ज कर दिए जाने से पत्रकारों के स्वतंत्र लेखनी पर कुठाराघात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एनजेए इस प्रकार के पुलिस के मीडियाकर्मियों के साथ गलत व्यवहार और कार्रवाई से चिंतित है और वरीय पदाधिकारियों से निष्पक्ष जांचकर दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई की मांग की है।

प्रदेश अध्यक्ष अबोध ठाकुर ने इस प्रकरण पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि उदाकिशुनगंज प्रशासन की स्थानीय पत्रकारों द्वारा विभिन्न बैनरों में लगातार प्रशासन के दोषपूर्ण रवैया, शराब कारोबारियों की खबर और इनके अन्य दोषपूर्ण कृत्य के खबर छापने से बौखलाए थाना पुलिस और पदाधिकारी द्वारा मामले के उलट पत्रकारों पर ही केस दर्ज किया जाना प्रशासनिक विफलता को दर्शा रहा है और पत्रकारों को सबक सिखा देने की यह गहरी साज़िश सा प्रतित हो रहा है। इस तरह की स्थानीय प्रशासन का पत्रकारों के उपर एफआइआर दर्ज करना और गलत प्रशासनिक कार्रवाई से नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऐसे पदाधिकारियों के कार्यकलापों से मर्माहत और चिंतित है।

उन्होंने कहा कि खबर पर संज्ञान लेने के बजाय पत्रकारों पर एफआईआर दर्ज करने की कार्यवाही इनके दोषपूर्ण रवैया को दर्शा रहा है। इसपर संगठन चुप बैठने वाली नहीं है। उन्होंने अंत में कहा कि वरीय पदाधिकारी इस पर संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करें और जबतक जांच में पत्रकार दोषी ना पाए जाएं तब तक इनको परेशान और गिरफ्तार करने की कोशिश ना की जाए। तत्पश्चात दोषियों पर कठोरतम कार्यवाही भी की जाए चाहे वो दोषी कोई भी हो।

इस प्रकरण पर प्रदेश मीडिया प्रभारी कुंजबिहारी शास्त्री, प्रदेश कोषाध्यक्ष संजय राजा, मुंगेर जिला के कार्यकारी अध्यक्ष गंगा रजक, संजय विजित्वर, सुखेन्द्र कुमार,निर्मल कुमार झा, कन्हैया महाराज, अभिषेक आचार्य,सोनू कुमार भगत,विनोद कुमार विनीत, संजीव कुमार कश्यप,निलेश कुमार,रमण कुमार,गौरव ठाकुर, रूद्रनारायण, सुबोध कुमार, कुमार साजन, राहुल यादव सहित सैकड़ों सदस्यों ने क्षोभ व्यक्त किया है।

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