Kosi Times
तेज खबर ... तेज असर

- sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

फारबिसगंज के रवीश रमन रचित कविता- “मज़हबी रंग”

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

“मज़हबी रंग”

कभी-कभी अजीब लगता है
देख कर हो जाता हूं दंग
मजहब बताने लगा है
हमारा और तुम्हारा रंग

विज्ञापन

विज्ञापन

देखो कहते है कितनी
अकड़ और शान से हम
भगवा हो गए हो तुम
हरा रंग है हम

भूल गए बचपन के दिन
खेला करते थे संग
न था कोई हमारा मज़हब
न था कोई हमारा रंग

सोचो अपने देश की
देखो प्रकृति के रंग
कुछ नही होता दोस्त
हमारा और तुम्हारा “मज़हबी रंग”

- Sponsored -

- Sponsored -

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

- Sponsored -

आर्थिक सहयोग करे

आर्थिक सहयोग करे

ADVERTISMENT

ADVERTISMENT

Comments
Loading...