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लॉक डाउन : लोग घरों में रहे कैद, जरूरी काम से निकल रहे है बाहर

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विकास वर्मा
कोसी टाइम्स @ पूर्णिया.

कोरोना से लड़ने के लिए पूर्णिया वासियों ने अपने घरों की दहलीज पर अब लक्ष्मण रेखा खींच दी है. अब न कोई अंदर से बाहर जा सकता है और न ही किसी को बाहर से अंदर आने के इजाजत है. अगर कोई बाहर से मिलने भी आ गया तो उसे दरवाजे से ही बैरंग लौटा दिया जा रहा है. मंगलवार की शाम कोरोना को लेकर दूसरी बार प्रधानमंत्री की अपील को पूर्णियावासियों ने गंभीरता से लिया है और उस पर अमल करना शुरू कर दिया है. यही वजह है कि बुधवार को सभी सड़कें सूनी रहीं और पूरे शहर में सन्नाटा पसरा रहा. इस सन्नाटे को तोड़ने की कोशिश पुलिस के सायरन करते रहे.

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बुधवार की सुबह शहर में सिर्फ वैसे लोग निकले जिन्हें दूध और राशन की जरुरत थी. इस वजह से दस बजे तक हल्की चहल-पहल बनी रही पर एेसे तमाम लोग दस बजे के अंदर घरों में लौट आए. एक तबका एेसा भी था जो जरुरत की दवा खरीदने के लिए दस बजे के बाद निकला पर इसकी संख्या कम थी. हालांकि एेसे लोगों को लाइन बाजार पहुंचते ही पुलिस से सामना हो गया पर पुलिस ने दवा की पर्ची देख उन्हें जाने दिया जो दवा लेकर लौट भी गये. इसके बाद पूरे शहर में सन्नाटा पसर गया.

बाहर निकलने वालों को रोकने और बेवजह सड़कों पर चक्कर लगाने वालों की धर-पकड़ के लिए पुलिस लगातार चौक-चौराहों पर तैनात रही और इस दौरान गश्ती भी की गई पर शहर के सन्नाटे में बहुत कुछ करने की जरुरत नहीं पड़ी क्योंकि बिना जरुरी जरुरत के अधिकांश लोग घरों से बाहर नहीं आए. वैसे, देखा जाए तो कुछ देर के लिए सुबह और शाम हल्की ढील रही पर पूरा दिन सन्नाटे के बीच गुजरा. इस दौरान शहर के जीरो माइल चौक, सुनौली चौक, कटिहार मोड़, लाइन बाजार चौक, पंचमुखी चौक, आरएनसाव चौक पर अलग-अलग पुलिस के जवान तैनात दिखे. उधर, बायपास रोड से शहर में घुसने वाली सभी सड़कों पर बने ड्रॉप गेट पर भी पुलिस के जवान मुस्तैद रहे.

लॉक डाउन की घोषणा के बाद बुधवार को पहली दफे शहर के मुहल्लों में खामोशी का मंजर दिखा. पिछले दो दिनों से मुख्य सड़क पर भले ही आवाजाही लगभग बंद थी पर मुहल्लों में इसका कोई असर नहीं था. प्रधानमंत्री की अपील के बाद बुधवार को अचानक मुहल्लों में दिखने वाली चहल-पहल गुम हो गई. शहर के हाउसिंग कालोनी, जयप्रकाश कालोनी, बैंक कालोनी, शिवपुरी, शिवाजी कालोनी, बाड़ीहाट, रामबाग, शांतिनगर, राजेन्द्र नगर, सिपाही टोला, न्यू सिपाही टोला आदि समेत अमूमन सभी मुहल्लों के लोग घरों में कैद हो गये. घरों से बाहर वही निकले जिनका निकलना जरुरी था और वे भी काम पूरा होने के बाद अंदर बंद हो गये.

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