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मधेपुरा में प्रदूषण चरम पर,आंख और सांस की बीमारी से पीड़ित हो रहे है लोग

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प्रशांत कुमार
मधेपुरा

पूरे देश में आज राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जा रहा है लेकिन इसका असर मधेपुरा में कुछ भी नही है।यहां के लोग खासकर वायु प्रदूषण से पीड़ित है जिसके चलते आज हजारो लोग डॉक्टर के चक्कर लगा रहे है और बीमारी से जूझ रहे है। सरकार और जिला प्रशासन यहां प्रदूषण रोकथाम में असफल है ।

जिले से गुजरने वाले एन एच 106 और 107 अपने बदहाली पर आंसू बहाने को विवश है।इस जर्जर सड़क के चलते लोग धूल से खासे परेशान है ।चिकित्सक के यहां आंख ,कान,त्वचा और सांस समन्धित बीमारियों से ग्रसित लोगों का भीड़ बढ़ता ही जा रहा है।खासकर स्कूली छात्र छात्राओं की परेशानी बहुत बढ़ गयी है जो प्रतिदिन पूरे दिन स्कूल कोचिंग करते है और इस परेशानी को झेलते है।

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वायु प्रदूषण को जन्म दे रहे एन एच 106 और 107 के जर्जरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिन पूर्व जब उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस मधेपुरा आये थे तो उन्होंने इस सड़क पर यात्रा कर नाराजगी जताई थी और कहा था इस सड़क पर यात्रा कर खुद को वैतरणी पार करने जैसा महसूस कर रहा हूँ।हालांकि बाद में उच्च न्यायालय ने इस संबंध में सरकार को फटकार लगाई थी और जबाब तलब भी किया था।

संदीप शांडिल्य(समिधा ग्रुप सचिव)

इस संबंध में एन एच 106 के समीप चलने वाले बिहार सरकार के केवाईपी सेंटर संचालक संदीप शांडिल्य ने बताया कि पूरे संस्थान सहित आवास परिसर का सभी खिड़की 24 घंटे बन्द रहता है।चूंकि धूल से कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर का हाल बेहाल हो जाता है।सरकार और जिला प्रशासन को उन्होंने धूल कण रोकने में असफल बताते हुए कहा कि इस जर्जर सड़क पर जिला प्रशासन पानी छिड़काव तक करवाने में असफल है ।अगर यहां तत्काल पानी का भी छिड़काव प्रतिदिन हो तो धूल कण से तत्काल राहत मिल सकता है।आज के राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर उन्होंने बोलते हुए कहा कि सरकार आज भोपाल गैस त्रासदी के करीब 35 वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए कुछ नही कर पा रही है।

छात्रा अनामिका कुमारी

छात्रा अनामिका कुमारी बताती है कि इस धूल भरी सड़क के चलते उनके आंख में इन्फेक्शन हो गया है जिसका इलाज वो डॉक्टर से करवा रही है।ऐसे ही मधेपुरा गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ने वाली दर्जनों बच्ची ने धूल भरी सड़के पर यात्रा करने में काफी परेशानी का सबब बताया।

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