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हर दिन लोग मनाये पर्यावरण दिवस :सुरेश शर्मा

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जोगबनी /अररिया /5 जून यानी पर्यावरण दिवस जो हर वर्ष लोग मानते म है. इसे मनाने का सबसे अहम उद्देश्य लोगों को पर्यावरण और उसके संरक्षण के प्रति जागरूक करना है. वैसे समय के साथ साथ पर्यावरण दिवस मनाने का थीम भी बदलता रहा है, पर्यवारणविद सुरेश कहते है की पर्यावरण बहुत ही बड़ा शब्द है जिसमें पानी, हरियाली, वन में रहनेवाले जीव , प्रदूषण और इससे जु़ड़े अन्य चीजें भी हैं जिसे बढ़ती आधुनिकता ने इसे समाप्त होने की कगार पर खड़ा कर दिया है. जिसने हमें जीवन दिया, जीवन जीने के लिए जरुरत के सामान दिए हम अपनी सुविधा के लिए ये भी नहीं देख पाए की हम उसे ही धरती को नस्ट कर रहे है जो हमारे जीवन का आधार है. यानी हमारी स्थिति उस बन्दर की तरह हो गई है जो जिस डाल पर बैठा है उसे है ही काटने का प्रयास कर रहा है. लेकिन हम सिर्फ वर्ष में एक दिन उसे बचाने के लिए आगे आते हैं. लेकिन बाकी दिन न तो इसे लेकर कभी सामाजिक जागरूकता दिखाई गई और न राजनीतिक स्तर पर कभी कोई ठोस पहल की गई।

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अब हम साल में एक दिन इसे बचने का प्रयास करते है लेकिन क्या सिर्फ एक दिन काफी है ? नहीं ! हमें हर दिन को पर्यवारण दिवस मानकर उसके बचाव के लिए कुछ न कुछ उपाय करते रहना चाहिए। लेकिन, अपनी व्यस्तता में व्यस्त इंसान यदि पर्यवारण दिवस के दिन ही थोड़ा बहुत योगदान दे तो धरती के कर्ज को उतारा जा सकता है व हर वर्ष पर्यवारण दिवस पर एक नया वातवरण मिलेगा फिर नया कोई थीम भी नही खोजना होगा।

वैसे इस वर्ष नियति का खेल भी देखिये अब जब लॉकडाउन में लोग घरो में बंद रहे है, या यूं कहे कि मानव घरों में कैद है सड़कों की रफ्तार कम है तब पर्यवारण अपने सुख को अनुभव कर रही है. वातावरण शुद्ध होता दिख रहा है. नदियाँ साफ़ हो रही है पक्षियों की चहचहाट जो गाड़ियों के शोर के आगे दब गई थी वो फिर से सुनाई देने लगी है. अब हमें इस पर्यवारण दिवस ये संकल्प करना चाहिए कि हम अपनी सुविधाओं के साथ उस डाल का भी ख्याल रखें जिस पर हम बैठे है यानी पेर पौधों का भी ख्याल रखे।

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