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बिहार सरकार सभी एईएस पीड़ित बच्चों का इलाज करायेगी-मुख्य सचिव दीपक कुमार

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**अब तक इस बीमारी से 132 बच्चों की मौत

**एईएस को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ,मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व अन्य के विरुद्ध कोर्ट में परिवाद 

**बिहार भवन के बाहर प्रदर्शन, मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांगा 

**होमियोपैथ और आयुर्वेद में है इलाज- चिकित्सक मुरलीधर घोष

संजय कुमार सुमन @मुजफ्फरपुर

मुजफ्फरपुर स्थित एसकेएमसीएच में पटना स्थित पीएमसीएच और दरभंगा स्थित डीएमसीएच से चिकित्सकों की टीम मुजफ्फरपुर भेजी गयी है.बिहार सरकार सभी एईएस पीड़ित बच्चों का इलाज करायेगी. मौतों का कारण मरीजों का देर से अस्पताल में पहुंचना सामने आया है.उक्त बातें मुजफ्फरपुर से लौटने के बाद बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कही.

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार के साथ प्रेस वार्ता कर रहे बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा कि अभिभावक ध्यान रखें की बच्चों को खाली पेट रात में ना सुलाएं. साथ ही सभी घरों तक ओआरएस का घोल पहुंचाने का निर्देश दिया गया है. पीड़ित बच्चों के अभिभावकों ने बीमारी के कंडीशंड भी अलग-अलग बताये हैं. किसी ने लीची खाने के बाद बीमार पड़ने की बात कही है, तो किसी ने खाली पेट होने पर फैली बीमारी की बात कही. खाली पेट होने पर बीमारी फैलने की जांच के लिए टीम कल से काम शुरू करेगी. इसके अलावा लोगों में जागरूकता के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं को लगाया गया है.उन्होंने कहा कि बिहार सरकार सभी एईएस पीड़ित बच्चों का इलाज करायेगी. मौतों का कारण मरीजों का देर से अस्पताल में पहुंचना सामने आया है. इसके बाद निर्देश दिया गया है कि मरीजों को अस्पतालों में आने के लिए कोई खर्च नहीं उठाना पड़ेगा. उनके किराये का खर्च भी सरकार वहन करेगी. मरीजों के परिजनों से आग्रह है कि अस्पताल आने के लिए एंबुलेन्स का इंतजार ना करें. मरीजों को लेकर निजी वाहनों से भी तुरंत अस्पताल पहुंचे. अस्पताल लाने के लिए आर्थिक मदद के रूप में मरीज के परिजनों को 400 रुपये दिये जायेंगे.

एईएस को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ,मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व अन्य के विरुद्ध कोर्ट में परिवाद 

एईएस से मर रहे बच्चों को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व अन्य के विरुद्ध मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) सूर्यकांत तिवारी के कोर्ट में परिवाद दाखिल किया गया है.यह परिवाद अधिवक्ता पंकज कुमार ने दाखिल किया है. इसमें राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार, बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआइसीएल) के प्रबंध निदेशक संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष, सिविल सर्जन डॉ.शैलेश प्रसाद सिंह व एसकेएमसीएच अधीक्षक डॉ.सुनील कुमार शाही को आरोपित बनाया है.

परिवाद में आरोप लगाया गया है कि सरकारी अस्पतालों में आपूर्ति की जाने वाली दवाएं केंद्रीय व राज्य प्रयोगशालाओं से जांच रिपोर्ट मिले बिना ही मरीजों को दी जाती हैं. सरकारी अस्पतालों में जेनरिक दवाओं की आपूर्ति की जाती है. इसकी पोटेंसी सामान्यत: छह माह होती है. जबकि, इसका उपयोग एक से दो साल तक किया जाता है.सूचना के अधिकार के तहत मांगी जानकारी में बीएमएसआइसीएल के लोक सूचना पदाधिकारी ने बताया है कि प्रबंध निदेशक की ओर से दवा की गुणवत्ता की जांच निजी जांच प्रयोगशाला में कराई जाती है. आरोप लगाया गया है कि यह आम लोगों के जीवन के लिए घातक है.

मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा कि मुजफ्फरपुर स्थित एसकेएमसीएच में पटना स्थित पीएमसीएच और दरभंगा स्थित डीएमसीएच से चिकित्सकों की टीम मुजफ्फरपुर भेजी गयी है. साथ ही एसकेएमसीएच के पीडियाट्रिक विभाग में अभी 50 बिस्तर उपलब्ध हैं. इसे बढ़ा कर 100 बेड की व्यवस्था की जायेगी. साथ ही एसके एमसीएच को 2500 बेड वाला अस्पताल बनाया जायेगा. इसके अलावा एसकेएमसीएच में धर्मशाला भी बनाया जायेगा.

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बिहार भवन के बाहर प्रदर्शन, मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांगा 
 बिहार में ‘एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम’ (एईएस) से 100 से ज्यादा बच्चों की मौत होने के मद्देनजर विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में स्थित बिहार भवन के बाहर प्रदर्शन किया और राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस्तीफा मांगा. प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और बिहार सरकारों पर बीमारी के प्रकोप को रोकने में गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया और कहा कि राज्य में स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था बिगड़ गयी है. 

कई प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां पकड़ी हुई थी जिन पर प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की गयी है. अन्य तख्तियों पर लिखा था कि नीतीश कुमार और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे इस्तीफा दें. कई महिला कार्यकर्ताओं ने चाणक्यपुरी में स्थित बिहार भवन के बाहर कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की. नीतीश कुमार को कभी ‘सुशासन बाबू’ कहा जाता था. बहरहाल, प्रदर्शनकारियों ने बाद में नयी दिल्ली में बिहार के रेजिडेंट आयुक्त को एक ज्ञापन सौंपा. यह ज्ञापन कुमार के नाम पर था. 

मालूम हो कि अब तक इस बीमारी से 132 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि जिले के अस्पतालों में 440 बच्चे भर्ती कराए गए हैं, जिनका इलाज चल रहा है.इस बीमारी से वर्ष 2014 में 342 बच्चे बीमार हुए थे.इनमें से 86 बच्चों की मौत हो गई थी.वर्ष 2012 में इस बीमारी से 120 बच्चों ने दम तोड़ दिया था। हालांकि, तब 336 बच्चे बीमार पड़े थे.

होमियोपैथ और आयुर्वेद में है इलाज 
राजकीय आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ दिनेश्वर प्रसाद ने बताया कि आयुर्वेद व होमियापैथ में भी चमकी बुखार का इलाज है. धृतकुमारी, गुरुची, प्याज के रस और सुदर्शन चूर्ण आदि जड़ी-बूटी है.
वहीं आयुर्वेदिक चिकित्सक के सलाह पर भी दवाएं ली जा सकती हैं. चिकित्सक मुरलीधर घोष ने कहा कि चमकी खुबार जैसी बीमारी पर बचाव व उपचार दोनों तरह से काम करने की जरूरत होती है. होमियोपैथ के नवीनतम शोध के अनुसार बेलाडोना (30) को पहले सप्ताह तीन टाइम, दूसरे सप्ताह में दो टाइम व तीसरे सप्ताह में एक टाइम, या बैप्टिसिया-30 तथा हायोसाईमश-30 प्रतिघंटे एकांतर क्रम से दो-तीन बूंद हर बार दें ।चार-पॉच घंटे में ज्वर उतर जायेगा।यदि ईलाज में कुछ देर हो गया हो और बच्चे के प्राण संकट में हो तो जेल्सिमियम-30 को 15-15 मिनट पर देने से 4-5 खुराक से ही बच्चे को जीवन दान मिल जायेगा।
कोसी-पूर्व बिहार में भी चमकी बुखार के लक्षण 
भागलपुर. कोसी-पूर्व बिहार के जिलों में भी चमकी बुखार के लक्षण कुछ बच्चों में  मिलने लगे हैं. सोमवार को अररिया, खगड़िया, पूर्णिया आदि कुछ जिलों में सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में एक दर्जन से अधिक बच्चे भर्ती हुए.
जिनमें तेज बुखार, सूगर लेवल कम, ऐठन आदि लक्षण देखे गये, चमकी बुखार से मिलते-जुलते हैं. वैसे विभाग का कहना है कि इस क्षेत्र में मुजफ्फरपुर की तरह क्रिटिकल पोजिशन नहीं है, लेकिन बच्चे बीमार हो रहे हैं.

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