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“आज इंसानियत शर्मसार है”

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आज इंसानियत शर्मसार है

आज इंसानियत शर्मसार है, क्योंकि
“नारी सर्वत्र पूज्यते” कहने वाले देश की बहू बेटियां हीं बेबस और लाचार है।
जो नारी शिव की पार्वती की रूप में शक्ति है आज उसी शक्ति का मान मर्दन हो रहा है।
अरे ओ भारत मां के वीर सपूतों सुनो चहुँ दिशा तुम्हारी बहू बेटियों की बेबसी का गर्जन हो रहा है।
अरे ओ दरिंदों कल तुम्हारे घर भी बहू बेटी होंगी
मगर क्या बीतेगी तुझ पर जब वह भी जलकर किसी चौराहे पर लेटी होंगी।
उसी के साथ तू भी जलकर खाक हो जाएगा और तेरा झूठा सम्मान भी राख हो जाएगा।
जिसके जिस्मों के चिथड़े किए हैं तूने कल वह भी तेरी माँ या बहन होगी।
जब रोंदी जाएगी किसी के हवस तले तेरी भी इज्जत तब तुझसे भी ना यह बेज्जती सहन होगी।
इसलिए सभी की बहन बेटियों का सम्मान करो
अपनी बहन बेटियों के लिए गोविंद बनकर अपना भी तुम मान करो।
हम नारी है शांति स्वरूपा ऐसे ही रहने दो
ना भड़काओ मेरे क्रोध की ज्वाला और ना ही काली बनने दो।
क्योंकि भरकेगी क्रोधाग्नि हमारी जब हमारा भक्षण करोगे और खरग, खप्पर अब होंगे हमारे हाथों में तो एक भी राक्षस नहीं बचोगे।
सुन जो रो लिया सो रो लिया अब ना तो हम रोएंगे और ना ही गिरगिराएंगे।
अपने आत्म रक्षा के लिए खुद ही तलवार उठाएंगे।
जब हमने उठा लिया अपनी शक्ति का बाण,
तभी हो जाएगा तुम दरिंदों की दरिंदगी म्रियम्रान।

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मधुबाला भारती रघुनाथपुर, बेलाही मुरलीगंज,मधेपुरा

परिचय 
मधुबाला ने जेईई मेन की परीक्षा में 86 प्रतिशत अंक प्राप्त कर आँचल इंडिया में 5842 वां स्थान प्राप्त किया है।
मधुबाला भागलपुर के गुरुकुल संस्थान में रहकर तैयारी कर रही है। सफलता का श्रेय गुरुकुल के निदेशक मनीष कुमार सिंह को दिया है। मधुबाला की अभिरुचि हिंदी कविता लिखने में काफी दक्ष है। कविताओं लेखनी पर उन्हें कई अवार्ड भी मिल चुके हैं।

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