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मधेपुरा : विधानसभा चुनाव 2020 में चुनावी खर्च के नाम पर करोड़ो का बंदर बाँट, जांच में सामने आया 10 से 15 करोड़ का फर्जीवाड़ा

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मधेपुरा/ चुनाव भले लोकतंत्र का महापर्व कहलाता हो लेकिन मधेपुरा में यह लूटतंत्र के रूप में सामने आया है।विधानसभा चुनाव 2020 में करोड़ो के गोल माल की बात सामने आ रही है।हालांकि मधेपुरा डीएम के द्वारा जांच के आदेश के बाद गेम पलट गया है।

मधेपुरा के वर्त्तमान डीएम श्याम बिहारी मीणा के आदेश पर जब चुनावी खर्च के विपत्रों की जाँच करायी गयी तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं ।उपलब्ध कागजातों को देखें तो पता चलेगा कि किस तरह से वेंडर ने अधिकारीयों की मिलीभगत से करोड़ों के बंदर बाँट का प्लान बनाया | खाना-पीना, टेंट और लाईट की व्यवस्था के अलावे जो अन्य चुनावी जरुरत के सामान थे उसे स्पलाय करने का टेंडर सहरसा के एक वेंडर विजय श्री प्रेस को दिया गया | लेकिन इस वेंडर ने अधिकारीयों की मिलीभगत से मधेपुरा जिला प्रशासन और सरकार को 10 से 15 करोड़ रुपये का चुना लगाने का प्रयास किया |

हमारे हाथ जिला निर्वाचन कार्यालय के वरीय प्रभारी पदाधिकारी शिव कुमार शैव का वह पत्र लगा है जिसका ज्ञापांक 288 दिनांक -13-4-21 है | यह पत्र मेसर्स विजय श्री प्रेस पंचवटी चौक, गंगजला को भेजा गया है | पत्र उन्हें बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में किये गए कार्य के बकाया राशि भुगतान के सम्बन्ध में है | यही पत्र मधेपुरा में विधानसभा चुनाव 2020 के चुनावी खर्च के बड़े घोटाले को उजागर कर दिया | इस पत्र में इस वेंडर के 9 विपत्र को फर्जी करार दिया गया है जो करोड़ों में बतायी जा रही है | इन 9 विपत्रों के अलावे इस वेंडर के द्वारा 10 करोड़ 32 लाख 34 हजार 100 रुपये का बिल जो समर्पित किया गया उसकी जब डीएम ने जांच करवाई तो पता चला कि इसमें भी 3 करोड़ 68 लाख 10 हजार 592 रुपये का बिल सही है।

तत्कालीन डीएम नवदीप शुक्ला के द्वारा इस वेंडर को 2 करोड़ 95 लाख एडवांस कर दिया था | ऐसे में जीएसटी आदि कटौती के बाद भुगतान की राशि मात्र 2 करोड़ 79 लाख 62 हजार 974 रूपया होता था ऐसे में इस एजेंसी को ही 15 लाख 37 हजार 26 रूपया वापस जमा करने का आदेश दिया है जो अब तक नही हुआ है |

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सूत्र बताते हैं कि सभी फर्जी बिल की निकासी का रास्ता साफ हो चूका था लेकिन ऐन मौके पर डीएम का ट्रांसफर हो गया | जब नए डीएम आए तो उन्होंने सारे बिल की जाँच करा दी | फिर क्या था सारा घोटाला परत दर परत सामने आने लगा | लोग दबे जुवान से बताते हैं कि मधेपुरा जिला के चार विधान सभा क्षेत्रों का पूरा चुनावी खर्च पहले 29 करोड़ का था फिर घट कर 16 करोड़ का हुआ और अब 13 करोड़ का रह गया है | सिर्फ एक सहरसा जिले के विजय श्री प्रेस का 9 विपत्र पुरे तरीके से फर्जी पाया गया जिसकी राशि 5 से 10 करोड़ की बताई जाती है | शेष विपत्र की भी जब जाँच हुई तो उसमें भी स्पलाय किये गए सामान की मात्रा अथवा संख्या और गुणवत्ता में काफी अंतर पाया गया जो 7 करोड़ से अधिक का था जिसे काट लिया गया|

बाजार मूल्य से अधिक पर स्पलाय किया गया सामान : बड़े टेंडर के लिए मार्केट सर्वे भी किया जाता है लेकिन इसमें ऐसा कुछ नहीं हुआ। कई समान तो ऐसे हैं जिनका मूल्य बाजार मूल्य से भी अधिक दिया गया। जैसे माचिस 1 रुपिया 10 पैसा, एक सुई 4 रुपिया, बैट्री AA साइज 20 रुपिया, ऑल आउट लिक्विड 105 रुपिया, फुलझाडू 98 रुपिया, नारियल झाड़ू 400 ग्राम 98 रुपिया ये सूचि सैकड़ों में है | वहीँ विधानसभा चुनाव 2020 के कंडिका 3 जो चुनाव में भाड़े पर लिए जाने वाले सामानों को लेकर है। इसका अवलोकन करने पर एक ही सामान का भाड़ा अलग अलग जगहों पर अलग-अलग लिया गया जिसमें दो गुने से अधिक का अंतर है। क्रम संख्या 2 में वीडियो ग्राफी-प्रति अदद (8 घंटे के लिए सीडी के साथ )ऑपरेटर सहित-690 रुपिया | क्रम संख्या 6 में वीडियो ग्राफी-प्रति अदद (मतदान के दिन मतदान केंद्रों के लिए सीडी के साथ )ऑपरेटर सहित-2280 रुपिया| क्रम संख्या 10 में रंगीन टीवी(डीटीएच सहित) बड़ा – प्रति अदद- (24 घंटे के लिए)भाड़ा ऑपरेटर सहित-710 रुपिया | क्रम संख्या 12 में रंगीन टीवी(डीटीएच सहित) भाड़ा ऑपरेटर सहित-1600 रुपया।

इस संबंध में मधेपुरा यूथ एसोसियेशन के अध्यक्ष राहुल यादव की माने तो वो कहते है जिले के टेंडर प्रक्रिया में ही बड़ी गड़बड़ी है .इसे लेकर उनके द्वारा आरटीआई भी लगाया गया लेकिन उसका कोई सही जवाब नहीं आया.वही सीपीआई के राष्ट्रीय परिषद् सदस्य प्रमोद प्रभाकर ने भी इस बड़े घोटाले की उच्च स्तरीय जाँच की मांग की है जिससे भविष्य में होने वाले चुनावी खर्च के नाम पर घोटाले को रोका जा सके.

पूरे मामले को देखने से साफ पता चल रहा है किस तरह अधिकारियों के मेल से इतनी बड़ी लूट की प्लान थी।चुनाव के महापर्व को किस तरह लूट का जरिया बनाया जा रहा था।

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