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टिड्डी भारत में बन गया है फसलों के लिए ख़तरा

एक दिन में टिड्डीयों का झुंड 200 किलोमीटर का सफ़र कर सकता है

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नैनिका/कोसी टाइम्स स्पेशल डेस्क/ कोविड -19 महामारी के बीच भारत में एक नई समस्या उभर कर आई है वो है टिड्डीयों का फ़सलों पर हमले की समस्या। टिड्डी कीट प्रजाति से है। दुनिया भर में टिड्डीयों के कई प्रकार है लेकिन उनमें से रेगिस्तानी अनुकूलित टिड्डा बहुत ही ख़तरनाक होता है। रेगिस्तानी टिड्डा कठोरतम जलवायु को सहने में अभ्यसत होता है इसलिए यह जब हरे भरे मैदान में आता है तो ख़तरनाक रूप ले लेता है। विश्व मौसम संगठन (डबल्यू॰ एम॰ ओ॰) का कहना है की पूर्वी अफ़्रीका के शुष्क क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के कारण भारी बारिश हुई है साथ ही साथ अरब सागर में चक्रवात के कारण ईरान एवं पाकिस्तान के शुष्क क्षेत्र में भी उम्मीद से अधिक बारिश हुई है जिसके परिणामस्वरूप इन शुष्क क्षेत्रों में वनस्पतियों का विकास हुआ है जिसके कारण टिड्डीयों के प्रजनन एवं विकास के लिए अनुकूल परिस्तिथियाँ उत्पन्न हुई है।

वर्तमान में पूर्वी अफ़्रीका, ईरान और पाकिस्तान होते हुए टिड्डीयों का भारत में हमला हो रहा है। चूँकि पाकिस्तान के भारत से लगे सीमा वाले क्षेत्र में फ़सल अभी नहीं है और साथ ही पछुआ हवा बह रही है इसलिए टिड्डीयों का सीधा हमला राजस्थान और गुजरात में हुआ है उसके बाद टिड्डीयों का झुंड मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश एवं दक्षिण के कई राज्यों में पहुँच गया है। टिड्डी लाखों की संख्या में झुंड में चलता है और सामने आने वाली सभी हरियाली या फ़सल को पलक झपकते ही समाप्त कर देता है। विश्व मौसम संगठन के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण ही टिड्डीयों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो रही है।

टिड्डीयों के हमले से भारत में खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव : पूर्वी अफ़्रीका, ईरान एवं पाकिस्तान में सक्रिय टिड्डीयों का भारत में अप्रैल महीने से खड़ी फ़सलों पर हमला हो रहा है। पाकिस्तान में फ़सलों और वनस्पतीयों पर टिड्डीयों का हमला हर वर्ष होता है लेकिन वर्ष 2020 में टिड्डीयों का हमला इतना ख़तरनाक है की टिड्डीयों के इस प्रकोप को पाकिस्तान में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करना पड़ा है। एक दिन में टिड्डीयों का झुंड 200 किलोमीटर का सफ़र कर सकता है और अपने सामने आने वाली सभी फ़सलों को बर्बाद कर देता है। भारत में बेमौसम बारिश एवं चक्रवाती गतिविधि के कारण टिड्डी के विकास एवं प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो गए है। यही कारण है की जितनी संख्या में टिड्डी का झुंड अफ़्रीका एवं पाकिस्तान से आ रहा है उसकी संख्या भारत में दोगुनी हो जा रही है।

टिड्डीयों के संख्या में बेतहाशा वृद्धि की वजह से इस बार के टिड्डी हमले का भारत में व्यापक असर देखने को मिल रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य और कृषि संगठन के रिपोर्ट के अनुसार एक टिड्डी का झुंड हज़ारों लोगों के लिए पर्याप्त खाद्य सामग्री लायक फ़सलों को नष्ट या खा सकता है। खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार भारत को इस टिड्डी के हमले से तक़रीबन १ बिलीयन कृषि मूल्य का नुक़सान उठाना पड़ सकता है। भारत में ख़रीफ़ फ़सल चावल, मक्का, बाजरा, रागी, दलहन, सोयाबीन, तीलहन की बुआई हो चुकी है इन कृषि फ़सलों पर टिड्डीयों के हमले का मतलब है भारत के खाद्य सुरक्षा पर ख़तरा। तक़रीबन 27 साल के बाद भारत में टिड्डीयों का आगमन हुआ है। पहले टिड्डी का हमला राजस्थान और गुजरात तक ही सीमित रहता था लेकिन इस बार टिड्डी का हमला भारत के अन्य क्षेत्रों में फ़सलों पर हो रहा है। पश्चिम भारत के राज्यों में फ़सलों को बर्बाद करने के बाद टिड्डीयों का झुंड पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में फ़सलों को अपना निशाना बनाया है।

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टिड्डीयों के हमले से राजस्थान, पंजाब और गुजरात में लगभग 2.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लगी तेल बीज, जीरे, बाजरा, दलहन की फ़सलें को भारी नुक़सान पहुँच चुका है। दूसरी ओर यह लेख लिखे जाने तक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं दक्षिणी राज्यों में टिड्डी के हमले कारण फ़सलों को हुई नुक़सान का सरकारी अनुमान नहीं आया है। लेकिन सूचना के अन्य स्रोतों से यह स्पष्ट हो रहा है की टिड्डीयों के इस हमले से भारत के इन क्षेत्रों में ख़रीफ़ फ़सलों को भारी नुक़सान हो रहा है। याद रहे भारत के कुल खाद्य भंडारण में ख़रीफ़ फ़सलों का तक़रीबन 60% योगदान है। जिसका मतलब है की 2020 के खाद्य भंडारण में भारी कमी होना और ऐसा होने से भारत के समक्ष खाद्य सुरक्षा के लिए गम्भीर संकट उत्पन्न हो सकता है। संयुक्त राष्ट संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन के मुताबिक़ भारत में प्रतिएक पाँच व्यक्ति में से एक व्यक्ति को खाद्य सामग्री से टिड्डी का हमला वंचित करेगा। भारत में टिड्डी के हमला ने एक तरह का आपातकालीन परिस्तिथि उत्पन्न किया है। ऐसे समय में जब कोविद-१९ महामारी के कारण लॉकडाउन से किसानों को आर्थिक बदहाली का सामना करना पड़ रहा है, टिड्डी के हमले ने पश्चिमी भारत, मध्य भारत, एवं दक्षिणी भारत के खाद्य उत्पादन को प्रभावित कर के खाद्य सुरक्षा के लिए गम्भीर चुनौती पेश किया है। कोविद-19 और टिड्डी संकट संयुक्त रूप से खाद्य असुरक्षा को विकराल बना सकता है।इसलिए टिड्डी के हमले से जो कृषि फ़सलों को नुक़सान हो रहा है उसे देखते हुए इसे तुरंत राष्ट्रीय आपदा घोषित करना चाहिए और ऐसे परिस्तिथि में केंद्र और राज्य सरकारों को समुचित उपाय करना चाहिए।

टिड्डीयों के हमले को नियंत्रित करने की आवश्यकता और तरीक़ा : टिड्डी का हमला हरे-भरे वनस्पति और कृषि फ़सल पर होता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफ़॰ ए॰ ओ॰) के मुताबिक़ टिड्डीयों का भारत के कई राज्यों में खड़ी फ़सलों पर हमला 2020 में एक गम्भीर खाद्य असुरक्षा की तरफ़ ले जा रह है और एफ़॰ ए॰ ओ॰ने अपने ऐडवयजरी गाइडलायंस में भारत सरकार को इस संकट से निपटने के लिए हर सम्भव उपाय करने को कहा है। भारत में कृषि मंत्रालय के अधीन टिड्डी चेतावनी संगठन कार्यरत है जिसका प्रमुख कार्य पाकिस्तान और भारत के बीच टिड्डी से सम्बंधित सूचना का आदान-प्रदान करना और किसानों को इनसे निपटने के लिए तरीक़ा बताना। टिड्डी चेतावनी संगठन के मुताबिक़ रासायनिक और जैविक कीटनाशक के छिड़काव के द्वारा टिड्डी से निपटा जा सकता है लेकिन इसके अलावा पुरानी पद्धतीयों का उपयोग कारगर साबित होगा .उदाहरस्वरूप खेतों में ढोल या टीन के डब्बे बजाना, खेतों में पटवन करना, सामूहिक निगरानी करना इत्यादि।

आधुनिक समय में सरकार को ड्रोन के माध्यम से बहुत बड़े कृषि क्षेत्रों में निगरानी करना चाहिए और साथ-साथ इसका उपयोग कीटनाशक के छिड़काव में किया जा सकता है। इसके अलावा किसानों ने टिड्डी के हमले से बचाव के लिए कई अनोखे उपाय भी निकाल लिए है जैसे हरियाणा में किसानों ने खेतों में ही डी॰ जे॰ चला दिया जिसकी ऊँच तीव्रता वाले गाने से टिड्डी के झुंड को अपना रास्ता बदलना पड़ा। टिड्डीयों के हमले को रोकने के लिए अग्निशमन दल का भी उपयोग करना ज़रूरी है। इस तरह से विभिन्न माध्यमों से अन्य कृषि क्षेत्रों में टिड्डी संकट से बचा जा सकता है।

 

(नैनिका, राजनीति विज्ञान विभाग, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में शोध छात्रा है)

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