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किसानों को बगैर जागरूक किये कृषि को लाभकारी पेशा बनाना है असंभव

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मधेपुरा / गुरुवार को संयुक्त कृषि भवन मधेपुरा में किसान संसद मधेपुरा की बैठक किसान संसद के अध्यक्ष प्रगतिशील ओषधीय किसान शंकर कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।बैठक में कई प्रखंड से आये नेतृत्वकारी किसान सांसदों ने मौजूदा कृषि की ‘दशा-दिशा’ पर गहन विचार विमर्श किया, कृषि को कैसे लाभकारी व्यवसाय का रूप दिया जाय ताकि समाज में जो आर्थिक विषमता की खाई अत्यधिक गहरी होती जा रही है उस खाई को कैसे कम किया जाय ताकि समरस समाज का निर्माण किया जा सके -और आज इसकी भारी कमी महसूस हो रही है .

सभी किसान सांसदों की एक ही चिंता थी कि अन्नयदाता कहलाने वाले कृषक को समाज में सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए ताकि कृषि के प्रति आकर्षण बढ़ सकें ।तभी कृषि प्रधान देश कहलाने की सार्थकता साबित होगी .चर्चा की शुरुआत किसान संसद मधेपुरा के सचिव शंभु शरण भारतीय ने की ।उन्होंने कहा देश कहा कि ‘हिंदुस्तानी’ कृषि को जब तक ‘ भारतीय खेती’ का महत्व नही मिलेगा ,तब तक कृषि के लिए किए जाने वाले कोई भी कार्य अधूरा साबित होगा ।आज कोई भी पढ़ा -लिखा आदमी अपने बाल -बच्चों को कृषि कार्य करने के लिए प्रेरित नही करता -इतना तक चलेगा ।लेकिन कोई किसान नही चाहता -उसका बेटा पढ़ने लिखने के बाद कृषि कार्य करें। यह एक सोचनीय सवाल है जिसका हल किसान संसद मधेपुरा को खोजना है।

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चर्चा को आगे बढ़ाते हुए बिहारीगंज से आये किसान संसद रामदेव रमण ने जोड़ देकर कहा कि जब तक किसानों के उत्पादक उचित मूल्य निर्धारण नही होगा ,तब तक कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा नही मिलेगा और तब तक कृषि को बनाना भाषणबाजी होगी।कृषक को जागरूक कर हम अपनी समस्याओं का वैचारिक समाधान कर सकते हैं ।

पूर्व मुखिया एवं किसान संसद बालकिशोर यादव ने कहा कि जब तक सभी प्रखंडों में सक्रिय पदाधिकारियो का चयन कर कार्य को आगे नही बढ़ाया जाएगा तब तक कृषक को जागरूक कर पाना कठिन है और बगैर जागरूक किये कृषि को लाभकारी पेशा बनाना असंभव है। कुमारखंड प्रखंड से किसान श्री से सम्मानित भोला यादव ने कहा कि किसानों की फसल की कीमत एवं फसल अवशेष की कीमत भी उचित मिले ।कुमारखंड के ही किसान संसद पूर्व मुखिया राजेन्द्र यादव ने कहा कि कृषक जागरूकता के साथ -साथ कृषि को लाभकारी कैसे बनाया जाय क्योंकि यह घाटे का सौदा साबित हो चुका है यह एक गंभीर समस्या है ।कृषि है तो जीवन है -जीवन है तो सपना है।

किसान सांसदों की राय को अहमियत देते हुए किसान संसद के अध्यक्ष शंकर कुमार ने निचोड़ दिया कि जब तक हम सभी किसान संसद अपने पवित्र उद्देश्य को लेकर किसानों के बीच नही जाएंगे -कृषि को लाभकारी बनाने की विधियों की चर्चा नही करेंगे तब तक न कृषक जागरूक होंगे और कृषि को लाभकारी एवं सम्मानजनक दर्जा देना सिर्फ विचार साबित होगा। अंत मे महान शायर राहत इंदौरी को शृद्धाजंलि देते हुए बैठक को समाप्त किया गया ।

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