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अंगिका भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज,मुख्यमंत्री,विधि मंत्री को लिखा गया पत्र

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संजय कुमार सुमन  sk.suman379@gmail.com

अंगिका भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज हो गयी है। अंगिका भाषा के साहित्यकार कैलाश ठाकुर ने मुख्यमंत्री,विधि मंत्री को पत्र लिखकर अंगिका भाषा को आठवीं अनुसूची में मान्यता प्रदान करने की मांग की है ।पत्र में उन्होंने कहा है कि हमारी भाषा सबसे पुरानी है । इसको सम्मान मिलना ही चाहिए। अंग प्रदेश की भाषा साहित्य-सभ्यता, संस्कृति, लोक कला, लोक गाथा और विरासत की अस्मिता और अस्तित्व के लिए हम किसी भी स्तर तक की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। ‘अंगिका हमारी सबसे प्राचीन भाषा है।  अब, अंगिका को आठवीं सूची में स्थान देना ही होगा। ’ ‘अंगिका की लड़ाई जनांदोलन बन चुकी है ।

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अंगिका भाषा के लिए इमेज नतीजे

साहित्यकार कैलाश ठाकुर ने कहा कि ‘अंगिका को विश्वविद्यालय में छात्र पढ़ रहे हैं अब, इस भाषा को स्कूली स्तर से लेकर सरकारी कार्यालय तक लाना होगा। जब तक यह कार्य नहीं हो जाता है, तब तक हमारा लड़ाई जारी रहेगा।  बिहार-झारखंड के कई जगहों पर अंगिका बोली जाती है। अंगिका भाषा पश्चिम बंगाल और नेपाल तक सुनाई देती है। पांच करोड़ से अधिक अंगिका भाषाई लोग हैं। यह संविधान की आठवीं अनुसूची में आने की सभी शर्तों को पूरा करती है फिर भी इसकी उपेक्षा की जा रही है।अंगिका भाषा अंगप्रदेश की पहचान है। संविधान की आठवीं अनुसूची में अंगिका को आने से न केवल यह भाषा संरक्षित होगी बल्कि साहित्यकारों को भी राष्ट्रीय सुरक्षा मिलेगा। अंगिका में साहित्य रचना का विशाल भंडार उपलब्ध है। झारखंड  नया राज्य होकर भी अंगिका को द्वितीय भाषा स्वीकार कर लिया गया है।परीक्षा का माध्यम भी हो गया है,बिहार विकास पुरुष नीतीश ने बिहार अकेडमी अंगिका का गठा न 2015 में ही कर दिए है परन्तु कागज पर ही सिमट कर रह गया है।उन्होंने कहा कि भाषा की राजनीतिक पहचान का मतलब है उच्च प्रशासकीय पदों पर अपनी भाषा के माध्यम से पहुंचना, जो कि अभी अंग्रेजी-हिन्दी के माध्यम से संभव है। कैलाश ठाकुर ने कहा कि यहां के राजनेता अंगिका को पहचान दिलाने में मदद करें। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि संविधान की आठवीं अनुसूची के मापदंड पर खरा उतरने वाली अंगिका भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में जल्द शामिल करे।

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