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मधेपुरा : सड़क पर पड़ी रही शव ,आठ घंटे तक होता रहा सेटिंग का खेल

मजदुर के मौत के बाद घटना को छिपाने में लगा रहा सड़क निर्माण कंपनी

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शुशांत कुमार /सिंहेश्वर,मधेपुरा/ थाना क्षेत्र में निर्माणाधीन एनएच 106 में बुधवार को कार्य कर एक कर्मी की मौत ग्रेडर मशीन के चपेट में आने से हो गई. जिसके दुसरें दिन उग्र लोगां ने सुबह लगभग सात बजे सुबह से बुढ़ावे स्थित आईएलएफएस प्लांट के आगे शव को एनएच 106 पर रखकर पुरी तरह से जाम कर दिया. इस बीच उग्र लोग निर्माण कंपनी के खिलाफ विरोध प्रर्दशन करने लगे. और कंपनी के पदाधिकारी को बुलाने की मांग करने लगे. लगभग आठ घंटे तक सड़क पर आवागमन पृरी तरह से बाधित रहा. हालांकि इस आठ घंटे में मेनेज का खेल लगातार चलता रहा.

जानकारी के अनुसार सड़क पर बुधवार को दोपहर लगभग 1 बजे कार्य कर रहे कर्मी ललन कुमार यादव को बिना देखे ग्रेडर मशीन को चला दिया. जिस वजह से वह मशीन के नीचे आकर दब गया. आस पास के मजदुरों ने जब शोर मचाया तब दुबारा मशीन को आगे करने के वजह से वह फिर से मशीन उस पर चढ़ गई. जख्मी अवस्था में उसे सदर अस्पताल मधेपुरा ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. कर्मी के मौत के बाद कंपनी ने पुरी तरह से चुप्पी साध ली. किसी को इस घटना के बारें में बताने से परहेज करने लगे. हालांकि इसकी खबर लोगों को लग गई. बताया गया कि वर्ष 2018 से आईएलएफएस के ठेकेदार मुन्ना यादव के अंदर कार्य कर रहा था.

24 घंटे तक होता रहा मैनेज का खेल- बुधवार की दोपहर लगभग एक बजे घटी घटना के बाद कंपनी के द्वारा गुपचुप तरिके से घटना स्थल से मृतक को सदर अस्पताल ले कर चली गई. जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. जिसके बाद भी कंपनी के द्वारा घटना की जानकारी किसी को नही दी. घटनास्थल पर कार्य कर रहे अन्य मजदुरों ने जब उक्त व्यक्ति का खबर लेना चाहा तो कंपनी के द्वारा किसी भी प्रकार की जानकारी नही दी गई. तब मजदुरों ने अन्य लोगों को घटना की सुचना दी. जिसके बाद जब मामला धिरे- धिरे फैलने लगी. तब किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा घायल कर्मी के मौत हो जाने की खबर मृतक के परिजनों को दी.

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देर शाम शव को मृतक के गांव रुपौली पंचायत के वार्ड नं 01 लाया गया. मृतक के मौत के बाद से लगभग पूरे रात सेटिंग का काम चलता रहा लेकिन परिजन मानने को तैयार नहीं थे. धीरे- धीरे घटना की जानकारी लोगों को मिलने लगी और खबर आग की तरह फैलने लगी. जिसके कारण मैनेज का खेल रात में बन्द हो गया. स्थानीय लोगों द्वारा घटना की जानकारी पुलिस को दी गई. पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर लोगों से व कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ करने की कोशिश की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी. जिसके बाद भी लगातार मेनेज का खेल चलता रहा.
आठ घंटे तक मूकदर्शक बनी रही पुलिस – बुधवार को दोपहर बाद से ही धीरे – धीरे  लोगों को घटना की जानकारी मिलती रही और गेम बर्बाद होता रहा. गुरूवार को सुबह में जैसे जैसे लोगों को घटना की जानकारी मिलती गई लोगों का भीड़ बुढ़ावे आईएलएफएस के पास इकट्ठा होता चला गया. जिसके बाद करीब 7 बजे लोग सड़क पर पहुंचकर जाम कर दिया. जाम की सूचना पर थानाध्यक्ष राजकिशोर मंडल घटना स्थल पर पहुंच गए. जब तक जाम का सिलसिला चला पुलिस निःसहाय की भूमिका निभाती रही. उग्र लोग पुलिस की एक भी बात सुनने को तैयार नही थी. उनलोगों की एक मात्र मांग मुआवजा ही थी. हालांकि लगभग आठ घंटे तक हुई घटनाक्रम में पुलिस सिर्फ हाथ पर हाथ धरें बैठी रही.

कंपनी की लापरवाही नहीं था सेफ्टी टीम –
यदि घटना स्थल पर सेफ्टी टीम होती तो शायद ललन की जान बच सकती थी. लेकिन कंपनी के द्वारा सेफ्टी टीम का नहीं होना कई सवाल खड़े करता है. वही परिजन का कहना है कि ठेकेदार के द्वारा 2 साल में कुछ ही महीने का वेतन दिया गया था.

मुआवजे का बाद खत्म हुआ जाम-
जाम करीब 3 बजे आईएलएफएस कंपनी के अधिकारियों के द्वारा अपने कर्मी व स्थानीय लोगों के पहल के बाद 5 लाख मुआवजा मिलने पर समाप्त किया जा सका. हालांकि इस पांच लाख के लिये लोगों को काफी मेहनत करना पड़ा. कई बार कंपनी के विरोध में उतड़ना पड़ा.

कंपनी के द्वारा घटना को छिपाने की हुई नाकाम कोशिश-
लोगों ने बताया कि घटना में हुई मौत के बाद देर रात तक लगातार नाटक चलता रहा. कंपनी के द्वारा घटना को छिपाने के लिये कई बार नाकाम कोशिश की गई.अगर कंपनी इसमें सफल हो जाता तो एक घटना छिप जाती.

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