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चौसा अस्पताल में अंतर्राष्ट्रीय नर्सिंग दिवस पर समारोह का आयोजन

👉🏾प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ ज्ञानरंजन कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया समारोह का उद्घाटन 👉🏾पुरैनी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ बिनय कृष्ण प्रसाद के द्वारा केक काटकर समारोह का किया गया शुभारंभ

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चौसा, मधेपुरा प्रतिनिधि
अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस पर आज गुरुवार को समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौसा परिसर में एक समारोह का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम फेलोरिंस नाइटिंगेल के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ ज्ञानरंजन कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का उद्घाटन किया।इसके बाद मुख्य अतिथि पुरैनी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ बिनय कृष्ण प्रसाद के द्वारा केक काटकर समारोह का शुभारंभ किया गया।


कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ ज्ञानरंजन ने कहा कि कोरोनाकाल में पिछले एक वर्ष से अधिक समय से हम देख रहे हैं कि नर्स मरीजों को ठीक करने में अपना दिन-रात एक कर रही हैं। यदि दुनिया में नर्सिंग का पेशा न होता तो आज इस महामारी में हम सभी का जीवन और भी संकट में होता। आज नर्से कई सारी जानों को बचा रही हैं, कई सारे लोगों के लिए उम्मीद की किरण हैं। नर्सों का भी अपना परिवार होता है लेकिन वे काम को लेकर इतनी कर्तव्यनिष्ठ होती हैं कि वे अन्य किसी चीज की परवाह नहीं करती हैं। भारत में नर्सों को सिस्टर का भी संबोधन दिया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ बिनय कृष्ण प्रसाद ने कहा कि 12 मई को फेलोरिंस नाइटिंगेल का जन्म हुआ था, जो कि आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक थीं। यह एक वजह है कि इनके जन्मदिवस के अवसर पर इस दिन को मनाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने जिंदगी भर बीमार और रोगियों की सेवा की। फ्लोरेंस का खुद का बचपन बीमारी और शारीरिक कमजोरी में बीता। उन दिनों स्वास्थ्य संबंधी कई सुविधाओं की कमी थी। बिजली उपकरण नहीं थे। हाथों में लालटेन लेकर अस्पताल में स्वास्थ्य गतिविधियां की जाती थीं।

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एएनम आरती कुमारी ने कहा कि फ्लोरेंस को अपने मरीजों की हमेशा फिक्र रहती थी। उनकी देखभाल के लिए फ्लोरेंस रात में भी अस्पताल में घूम कर चेक करती कि किसी रोगी को कोई जरूरत तो नहीं है। गरीब, बीमार और दुखियों के लिए वह कार्य करती थीं। उनकी नर्सिंग सेवा ने समाज में नर्सों को सम्मानजनक स्थान दिलाया। 1960 में फ्लोरेंस के प्रयासों से आर्मी मेडिकल स्कूल की स्थापना हुई। उन्होने कहा कि नर्स अपने पूरे ज्ञान, अनुभव और मेहनत से एक मरीज की देखभाल करती हैं। नर्सों के बिना स्वास्थ्य सेवाएं अधूरी है। रोगियों की देखभाल करना इतना आसान नहीं होता है इसलिए नर्सों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। अक्सर डॉक्टरों के आगे नर्सों को इतना महत्व नहीं दिया जाता है लेकिन किसी भी मरीज के स्वस्थ होने में नर्सों का जो योगदान है, उसे हम भूल नहीं सकते हैं। नर्सों के काम को समझना, समाज में अधिक लोगों को इस पेशे के लिए प्रोत्साहित करना और सम्मान देना इस दिन का मुख्या उद्देश्य है। समारोह का संचालन जीएनएम लोकेंद्र कुमार शर्मा ने की।

मौके पर चौसा अस्पताल प्रबन्धक मोहम्मद शाहनवाज अहमद अंसारी,चौसा के तत्कालीन प्रभारी स्वास्थ्य प्रबन्धक अरुण कुमार राम, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ नरेन्द्र कुमार, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अबधेश साफी,केयर इंडिया प्रबन्धक हिमांशु कुमार सिंह, जीएनएम बनवारीलाल,जीएनएम राजू कुमार,एक्सरे टेक्नीशियन नवनीत कुमार लेखापाल राजीव कुमार,मयंक प्रणव कश्यप, लेब टेक्नीशियन आशीष कुमार,स्थापना लेखपाल सुमित कुमार,जीएनएम किरण कुमारी, जीएनएम सविता कुमारी, एएनम रूपम कुमारी,रेखा कुमारी पिंकी कुमारी, आरती कुमारी,रूपम ओम, अंजू कुमारी, सुशीला कुमारी, तरन्नुम प्रवीण,कंचन माला सिन्हा, कल्पना कुमारी, डाटा ऑपरेटर बालकृष्ण कुमार,मनीष कुमार, नरेंद्र कुमार अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे।

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