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बीएनएमयू ने बीएड व पीएचडी प्रकरण पर पहल नहीं कर किया निराश : राठौर

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मधेपुरा/ बीएनएमयू के हर कदम बढ़ाने के लिए आंदोलन नियति ही बन गई है बिना आंदोलन के विश्वविद्यालय एक कदम भी आगे नहीं बढ़ता ।छात्र हित में विश्वविद्यालय की यह असंवेदनशीलता दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है उक्त बातें वाम छात्र संगठन एआईएसएफ के राष्ट्रीय परिषद् सदस्य सह बीएनएमयू प्रभारी हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने संगठन के विश्वविद्यालय इकाई की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि कुलपति द्वारा गर्ल्स हॉस्टल शुरू करने का आदेश एक बार फिर छलावा साबित हो रहा है।संगठन के लगातार आवेदन सौंपने त्राहिमाम पत्र देने के बाद भी बीएड ऑन स्पॉट एडमिशन में हुई धांधली और रोस्टर की अनदेखी को ले अभी तक कोई कदम नहीं उठाए गए जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन के औचित्य पर सवाल खड़े होने लगे हैं।वहीं छात्र नेता राठौर ने कहा कि कुलपति के आदेशानुसार पीजीआरसी के लिए सीनेट बैठक में अनुमोदन प्राप्त करने के लिए बैठक से पहले दस जनवरी तक डीआरसी की रिपोर्ट जमा करना था जो कि सीनेट बैठक के एक माह से ज्यादा गुजर जाने के बाद अभी तक पचास प्रतिशत विभाग का डीआरसी रिपोर्ट जमा नहीं हो पाया जिससे पता चलता है कि विश्वविद्यालय में कुलपति के आदेश व निर्देश को तरजीह नहीं दी जा रही है ऐसे में विश्वविद्यालय के विकास को गति नहीं दी जा सकती ।

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एआईएसएफ विश्वविद्यालय हित में हर लोकतांत्रिक तरीके से कदम उठाने को प्रतिबद्ध है।एआईवाईएफ के राष्ट्रीय परिषद् सदस्य शंभू क्रांति ने बैठक में अपनी बात रखते हुए कहा कि बीएनएमयू में अब कथनी और करनी में बहुत फासला हो चला है वरीय पदाधिकारियों के फैसले कागज पर ही सिमट कर रह जाते हैं।जिसके कारण आंदोलन विवशता बन जाती है।उन्होंने कहा बीएनएमयू प्रशासनिक उदासीनता के कारण सिर्फ नाम का ही विश्वविद्यालय रह गया है।बैठक का संचालन कर रहे संगठन के राज्य परिषद सदस्य सह संयुक्त जिला सचिव सौरभ कुमार ने कहा कि बीएड ऑन स्पॉट एडमिशन प्रकरण में दोषियों पर कारवाई के बजाय उन्हें बचाने की मुहिम चल रही है।संगठन के लगातार मांग व दबाव के बाद निर्णय के एक महीने बाद जांच टीम को अधिसूचना जारी हुई वहीं दूसरी ओर अधिसूचना जारी होने के दस दिन बाद भी जांच को ले पहली बैठक तक नहीं हो पाना यह दर्शाता है कि जांच टीम को भी प्रभावित करने की कोशिश चल रही है जिसे एआईएसएफ किसी कीमत पर सफल नहीं होने देगा ।

उन्होंने कहा कि संगठन बीएनएमयू द्वारा स्थापना काल से गंभीर मुद्दे पर जांच टीम बना लिपापोती करने की परम्परा और बर्दास्त नहीं कर सकता। एआईएसएफ की छात्रा नेत्री मौसम प्रिया ने कहा कि वर्षों पहले सरकार के आदेश के बाद भी छात्रा व एससी एसटी के निशुल्क शिक्षा के आदेश को लागू नहीं जाना दुखद है जबकि अन्य विश्वविद्यालयों में शुल्क वापसी का काम चल रहा है। छात्र नेता मन्नू कुमार ने कहा कि कल से एक बार फिर एआईएसएफ अपने मांगों के समर्थन में आंदोलन का शंखनाद करेगा जिसके लिए विश्वविद्यालय पूरी तरह से जिम्मेदार है।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आगामी माह में होने वाले राज्य सम्मेलन से पहले पन्द्रह मार्च को एआईएसएफ का विश्वविद्यालय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा और इससे पहले विभिन्न स्तरों पर संगठन कि कमिटी गठन कर संगठन को और मजबूत किया जाएगा ।बैठक में शास्वत कुमार, संतोष, अंकित कुमार,प्रिंस कुमार आदि मौजूद थे.

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