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अररिया : लाखों की लागत से बना शवदाह गृह उद्घाटन से पूर्व बना खंडहर

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मेराज खान /अररिया/ अररिया में लाखों की लागत से बना मुक्तिधाम शवदाह गृह अब खंडहर में तब्दील हो गया है, लेकिन अभी तक यह शुरु नहीं हो पाया है। जिस वजह से शवों का अंतिम संस्कार करने वाले खुले में शव जलाने को मजबुर है। मगर इसकी सुध लेने की फुर्सत ना तो जिला प्रशासन को है और ना ही नगर परिषद के पास है।

परमान नदी के किनारे तिरछुल्या घाट पर बने इस मुक्तिधाम का निर्माण 2010 में करवाया गया था ताकि लोगों को स्वच्छ पर्यावरण मिले और शव का अंतिम संस्कार आसानी से हो सके। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने इसका निर्माण लगभग पचास लाख रुपये की लागत से किया गया था। यहां पर एक साथ छह शवों का अंतिम संस्कार किया जाने की व्यवस्था की गई थी और लोगो के बैठने के लिए शेड के साथ शौचालय का भी निर्माण कराया गया था, लेकिन उद्घाटन से पहले ही देखरेख के अभाव में खंडहर बन गया है।

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अररिया परमान नदी किनारे प्रतिदिन दो से तीन शव जलाये जाते हैं। बरसात के दिनों में शव जलाने में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। चारो ओर फैले सैलाब के पानी के कारण शव जलाने के लिये एक मात्र तटबंध का सहारा होता है। चारो ओर पानी फैलने के कारण शव अक्सर घनी आबादी के निकट जलाना पड़ता है और प्रदूषण आबादी वाले क्षेत्र तक पहुंच जाती है जिस वजह से बस्ती के लोग शव जलाने का विरोध भी करते हैं। जिला प्रशासन की लापरवाही की वजह से अब तक जिले के एकमात्र शवदाह ग्रह का उद्घाटन भी नहीं हो सका और लाखों की लागत से बना शवदाह ग्रह अब खंडहर में तब्दील हो गया है।

अररिया के वर्तमान सांसद प्रदीप कुमार सिंह के कार्यकाल 2010 में इस शव दाह ग्रह का निर्माण कराया गया था लेकिन जिला प्रशासन की उदासीनता की वजह से अब यह खंडहर में तब्दील हो गया है जहां चारों ओर बड़े-बड़े जंगल उग आए हैं और शवदाह ग्रह का छत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है. इस बारे में जब प्रदीप कुमार सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा जल्द ही इसका जीर्णोद्धार किया जाएगा साथ ही साथ शवदाह गृह जाने के लिए पक्की सड़क का भी निर्माण कराया जाएगा।

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