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गीत / गजल

शिक्षक दिवस विशेष-नृपेन सिंह की कविता : ये शिक्षक हमे सिखाते हैं

जब यहां आया तो एसा लगा, परिंदों को परवाज मिली। मिला रास्ता मंजिल को, अन्धियारो में मशाल मिली। चलकर सीखा ...

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ना जाने मेरा दिल

ना जाने मेरा दिल ना जाने मेरा दिल तेरी गलियों में आने को क्यों बेताब रहता है राहों से गुजरते ...

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फणीश्वरनाथ रेणु की पुरानी कहानी-नया पाठ

पुरानी कहानी-नया पाठ बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन – तूफान – उठा! हिमालय की किसी चोटी का बर्फ पिघला और ...

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बोलोॅ भैया रामे राम हो माय,कोशी सन बेदरदी

बोलोॅ भैया रामे राम हो माय रचनाकार-अज्ञात बोलोॅ भैया रामे राम हो माय कोशी सन बेदरदी जग में कोय नय ...

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रश्मों-रिवाज़ की दीवार गिराएँ तो अच्छा

रश्मों-रिवाज़ की दीवार गिराएँ तो अच्छा ये धूप मेरे घर तक भी आए तो अच्छा है रिश्तों की सीलन को ...

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प्यार झूठा मोहब्बत भी झूठी

प्यार झूठा मोहब्बत भी झूठी प्यार झूठा मोहब्बत भी झूठी अब किसी पर भरोसा क्या करना प्यार मरता नहीं प्यार ...

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शहर रो रहा है

शहर रो रहा है  शहर रो रहा है , पहर रो रहा है आँसुओं से अपना मुँह धो रहा है ...

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तुम्हें पाने का ख्वाब

तुम्हें पाने का ख्वाब तुम्हें पाने का ख्वाब देख रहा हूं, यह हकीकत है या फसाना सोच रहा हूं। वर्षों ...

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