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शेर ओ शायरी

प्रिया सिन्हा की कविता “डर लगता है”

😱😨”डर लगता है”😨😱 इंसान को इंसान से डर लगता है, आखिर ना जाने क्यों उसे ? दुनिया जहान से डर ...

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शिक्षक दिवस विशेष-नृपेन सिंह की कविता : ये शिक्षक हमे सिखाते हैं

जब यहां आया तो एसा लगा, परिंदों को परवाज मिली। मिला रास्ता मंजिल को, अन्धियारो में मशाल मिली। चलकर सीखा ...

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प्रीति भारती की कविता-एक दीया बन पाऊं

दीपक बनकर जिस भी गली से गुजरुं अंधेरा छटे रौशनी फैले कहने को रौशन घर किसी और का होगा दिल ...

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रवीश रमन की रचना “धड़क रहा धड़कन होगा”

“धड़क रहा धड़कन होगा” धड़क रहा धड़कन होगा कैसा पिया का आँगन होगा कैसी साँस की ममता होगी कैसा पिया ...

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अब वो रात नही-शिवम गर्ग

*तूने की बेवफाई अब याद नहीं* *आज नजरें भी चुराई अब याद नहीं  *दिल ही रूठा है मेरा, मैं टूटा ...

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क्योंकि वो हारा नहीं, एक अजय विजेता है -प्रीति भारती

सब चले जा रहे हैं , अपनी मंज़िल की तलाश में , कुछ के लिए है मखमल का रस्ता , ...

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रविश रमण रचित कविता-पहला कदम

माँ के मुख से ‘आह’ निकली होगी जब हमने बढ़ाया होगा “पहला कदम” गिरे भी होंगे,संभले भी होंगे माँ ने ...

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फारबिसगंज के रवीश रमन रचित कविता- “मज़हबी रंग”

“मज़हबी रंग” कभी-कभी अजीब लगता है देख कर हो जाता हूं दंग मजहब बताने लगा है हमारा और तुम्हारा रंग ...

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