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साहित्य

तुम्हें पाने का ख्वाब

तुम्हें पाने का ख्वाब तुम्हें पाने का ख्वाब देख रहा हूं, यह हकीकत है या फसाना सोच रहा हूं। वर्षों ...

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नियति के आगे न किसी का चला है

नियति के आगे न किसी का चला है नियति के आगे न किसी का चला है न किसी का चलेगा। ...

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मेरी जिंदगी

मेरी जिंदगी मेरी जिंदगी अब डर नहीं मौत का अब जी लिया हूँ, तेरी हर सांस में। फिर वापस आ ...

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मैं एक औरत हूँ

मैं एक औरत हूँ मैं एक औरत हूँ आँचल में बंधी हजारों सपनों की उड़ान हूँ हाँ खूबसूरत हूँ मैं ...

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अब भूल जाये

अब भूल जाये लो आ गए हम डोली में बैठ कर तेरे आँगन में लेकिन क्या अब चलना भूल जाये। ...

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लोक देवता बाबा विशु राउत:लोक संस्कृति की पहचान, पूर्ण सभ्यता एवं संस्कृति का भी परिचायक

संजय कुमार सुमन  मधेपुरा जिले के चौसा प्रखंड मुख्यालय से आठ किलोमीटर दक्षिण पचरासी स्थल पर अवस्थित लोक देवता बाबा ...

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गीतों की बस्ती का शहज़ादा

गीतों की बस्ती का शहज़ादा मैं गीतों की बस्ती का शहज़ादा, मैं राजकुमार। -2 मैं गीत बनाता, गीत ही गाता ...

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नव वर्ष आए प्रति वर्ष

नव वर्ष आए प्रतिवर्ष नव वर्ष आए प्रति वर्ष हर्ष व उल्लास चाहत और विश्वास परिवर्तन के साथ नववर्ष आए ...

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