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महिला दिवस विशेष में पढ़िए शीला मंडल की ये रचना ….

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यहाँ हर चीज अजीब है.. नारी को ही पुजता
नारी को ही भुजता …नारी चाहिए…
देवी के रुप में ..हम कुछ भी कहे ,करे
वह चुपचाप सहे …ठीक भगवती की तरह सुने
आज भी जो दुर्गा, काली बन जाती तो
… कुल्टा ही कहलाती ,सबको सीता ही चाहिए
बिन जबान के ..जो बोले नहीं सिर्फ सुने
कितना अजीब है न इस जहान मे
हजारों वषो से यही कहानी
कुछ नहीं बदला न सोच …न समझ
जिसको मन करे.. रेप करो…गाली दो
मन करे उसे पीट दो …तर्क होता ठीक करना है।
सही है.. लगे रहो ..मर्यादापुसोतम जो कहलाना हैं।
युगोयूगो से यही तो हुआ है तो तुम कैसे पिछे रहोगे
हाय रे नारी कितना सहती ..कितना सहोगी..
इस प्यार भरी अपमान को .

दिनभर तू काम जो करती
सिघासन अपमान पर मरती
न धरती डोला न तर्क किसी का बोला
तुम्हारा अपना न “हाँ” हैं.. न ..”न.”.
तुम इस प्लानेट की सबसे दुर्वल दुर्लभ प्रजाति हो
सबको तुम तू चाहिए भी ..नहीं चाहिए भी
तुम्हारी यही कहानी ..जो शदियों पुरानी भी ..नई भी
आज भी तुम चाँद पर गई पर क्या हुआ
पहले भी तुम शंकराचार्य को तर्क से हराई
एनसियेट के समय मे भी लोपामुद्रा कहलाई
फिर भी तुम पुरुष या पुरुषोत्तम नहीं कहलाई
क्योंकि तुम नारी जो ठहरी
नाच गाने की वस्तु जो ठहरी
क्यों भुल जाती हो तुम
अपना आपा ,अधिकार समझती हो तुम
क्या तुम्हें मालूम नहीं कि तुम
शोषण के अधिकारी हो …हा हा हा
तुम्हारे चेहरे पर हमेशा मुस्कान होना चाहिए
तुम्हारा मन नहीं भी है तो क्या हुआ .होना ही चाहिए
बङी बतमिज हैं ..ओ… समझती नहीं

पुरुष बाहर से काम कर लौटा है।
तुम तो दिनभर पंलग पर लेटी थी, क्यों करती हो
ऐसा अपराध.. तो चुल तो खिचना लाजिमी है।
मत भुलो कि तुम नारी हो
हर युग मे चुल खिचा गया ,धुल मे सींचा गया
इसमें नया क्या है.. जो तुम रोती हो
हँसो सब तुमकों यही सिखायेंगे
तुम्हें दो वक्त का भोजन. रुपये चाहिए न
……तो हँसना होगा
जिवन के कंकड़ भरी पथ पर चलना होगा
सुख तभी नसीब होगा
यही नसीहत हर नस्ल नसीब तुम्हें देगा
सब सही है ..कुछ नहीं बदलने वाला
तुम इस धरा पर ठीक होने आई हो
न कि राज्य करने समझना है तो समझ लो
नहीं तो.. तो तो होगा
ऐसे आज समझो या कुछ बषो बाद समझोगी ही
सब समझ ही जाता

फिर बाद मे घर का जाता बन ही जाता है।
समय पर उपयोग आ ही जाओगी
मान लो ये बात जान लो
यही सत्य है और युगोयूगो से है भी
अग्रेजी बोलो या हिन्दी मगही
सब जगह यही शोषक भैया जिंदा है।।

शीला मंडल,मधेपुरा.

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