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कटिहार: झोला छाप डॉक्टरों के द्वारा,गरीब मरीजों का हो रहा आर्थिक दोहन

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कोसी टाइम्स प्रतिनिधि@ कटिहार

*कटिहार में फर्जी चिकित्सकों की भरमार
**आईएमए के चिकित्सक परेशान
***स्वास्थ्य विभाग की सेटिंग से चल रहा खेल

कटिहार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टर की बढ़ोतरी जोड़ों पर है। किसी बड़े डॉक्टर के यहां तीन-चार महीने रह कर झोला छाप डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज कर रहे हैं और मोटी रकम की कमाई कर रहे हैंये अघोषित डॉक्टर गरीब, आदिवासियों और अल्पसंख्यक समुदाय के जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। बावजूद इन पर कोई शिकंजा नहीं कसा जाता।
इनके पास ना कोई डिग्री होती है और ना ही कोई डिप्लोमा। महज 16-17 साल के उम्र के लड़कों से लेकर 60 साल के व्यक्ति इस कारोबार को धड़ल्ले से चला रहे हैं। इन्हें न सीएमओ का डर है और न जिलाधिकारी का डर है। ये सभी को अंगूठा दिखाकर अपना धंधा जोर शोर से डंके की चोट पर चला रहे हैं।
सरकार ने ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ जांच अभियान चलाने को कहा था, लेकिन किसी चिकित्सक की जांच नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि फर्जी चिकित्सकों के यहां दलालों को भेजकर मोटी रकम की उगाही की जा रही है। यही कारण है कि कटिहार शहर से लेकर गांव के चौराहों तक फर्जी चिकित्सकों की बाढ़ सी आ गई है।

ऐसे चिकित्सकों के बड़े-बड़े बोर्ड देखकर मरीज झांसे में आ रहे हैं। हालात यह है कि कई मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव एवं चिकित्सकों के यहां कंपाउंडरी कर रहे कई लोग आज खुद को बड़ा चिकित्सक बता रहे हैं।
झोलाछाप डॉक्टर किसी तरह से डिग्रीधारी नहीं होते। यह किसी डॉक्टर के पास कभी केवल प्रेक्टिस किए होते है और रटे-रटाए टेबलेट को देकर काम चलाते हैं। ग्रामीणों का इलाज सिर्फ अंदाजे से करते हैं। नब्ज की जानकारी होती नहीं फिर भी नब्ज टटोलते रहते हैं और बीमारी बताते हैं। ग्रामीणों की जान जोखिम में तब पड़ती है, जब लंबे समय तक ईलाज के बाद भी बीमारी दूर नहीं होती।
झोलाछाप डॉक्टरों का काम अब सिर्फ सर्दी-खांसी तक सीमित नहीं है। वह बड़ी-बड़ी बीमारियों का इलाज करने का दावा करके मरीजों के जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। इन डॉक्टरों को किसी का डर नहीं है। जिसके कारण मलेरिया, टायफाइड, जहर खाए मरीज, डायरिया जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज करते हुए मरीज की जान को खतरे में डाल देते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर (फाइल फोटो)

जिले के आला अधिकारियों से लेकर राज्य सरकार इस ओर ध्यान प्रकट करें ताकि सरकार के हो रहे राजस्व की चोरी होने से बचाया जा सके।
गौरतलब हो कि फार्मासिस्ट का लाइसेंस लेकर जो मेडिकल खोले जाते हैं वहां पर्ची देखकर दवाई बिक्री की ही अनुमति है। लेकिन जिले के कोलासी, डूमर, कदवा, प्राणपुर, कुर्सेला, पोठिया, फलका, सेमापुर आदि बाजारों में फार्मासिस्ट का लाइसेंस लेकर नर्सिंग होम चलाने का मामला प्रकाश में आया है।
क बड़ा सवाल है कि जब जिले में ड्रग इंस्पेक्टर की तैनाती है तो बगैर लाइसेंस और बिना फार्मेसिस्ट के अवैध संचालित हो रहे मेडिकल स्टोरों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?
फर्जी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनी, लेकिन वर्षों बाद भी फर्जी चिकित्सक पर कार्रवाई नहीं की जा सकी है। सदर अस्पताल कटिहार के सर्जन कहते हैं कि कई बार इन फर्जी चिकित्सकों द्वारा केस को इतना बिगाड़ दिया जाता है कि मरीज की मृत्यु तक हो जाती है। आपको बता दें कि जिले का कोई भी फर्जी चिकित्सक आईएमए का सदस्य नहीं हो सकता है।
इसी प्रकार नीमा में भी कोई फर्जी चिकित्सक घुसपैठ नहीं कर पाते। अब जिला स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि आईएमए एवं नीमा से चिकित्सकों की सूची लें और इसके बाद जांच अभियान चलाएं कि इसके सदस्यों के अलावा कितने लोग हैं जो फर्जी डिग्री के सहारे अपनी दुकान चला रहे हैं।

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