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हौसले को सलाम दिव्यांग होने के बाद भी ये करते हैं खुद सभी काम,दोनों पैरों से दिव्यांशु, भरी हौसलों की उड़ान

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**दिव्यांग होने के बावजूद भी कई अवार्ड हासिल कर मेहनत और हिम्मत हो तो कुछ भी नहीं मुश्किल, दिया सन्देश

**शहंशाह कैफ उन लोगों के लिए प्रेरणा साबित होने लगे जो अपनी शारीरिक अक्षमता को अपना बाधा मानकर निराश हो जाते हैं

संजय कुमार सुमन

जिंदगी का बोझ ढोता
घिसटता बैसाखियों पर
भीड़ में खोता वो चेहरा
रोज पथरीले से पथ पर

घिसटते बैसाखियों पर
खोजते पहचान जग में
रुके रुके पहिये सदृश
लुंज-पुंज बेजान पांव

उक्त कविता चौसा प्रखंड  के फुलौत निवासी शहंशाह कैफ पर सटीक बैठती है। मेहनत और हौसले से किसी भी कठिनाई से पार पाया जा सकता है। इस बात को मधेपुरा जिले के चौसा प्रखंड के फुलौत के दोनों पैरों से दिव्यांग शहंशाह कैफ ने सही साबित कर दिखाया। वे अपनी शारीरिक अक्षमता को बाधा नहीं मानते, बल्कि इसे चुनौती मानकर अपना करियर को संवारना चाहते हैं। बचपन से दोनों पैरों के मसल्स इतनी कमजोर हैं कि शहंशाह कैफ अपने पैरों पर बिना सहारे खड़ा भी नहीं हो पाता है। उनका एक मात्र सहारा बैसाखी और ट्राईसाइकिल है। बावजूद इसके शहंशाह कैफ ने कभी हिम्मत नहीं हारी। अपनी इसी हिम्मत और हौसले के दम पर शहंशाह कैफ ने अपने हीं गाँव फुलौत में पढाई कर अच्छे अंक से इन्टर की पढाई पास कर गाँव के हीं बच्चों को ट्यूशन पढाना शुरु किया साथ ही समाजसेवा में भी रुचि रखने लगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते शहंशाह कैफ

ट्यूशन के पैसों से एंड्रायड फोन खरीद फेशबुक और व्हाटसप के माध्यम से गाँव के छोटे बङे जनसमस्या को उजागर कर खबरों के रुप में लोगों के बीच परोसने लगा। धीरे-धीरे लोगों के दिल में कैफ के प्रति स्नेह और प्यार बढ़ता गया। वे काफी लोकप्रिय होने लगे। पत्रकारिता और समाज सेवा कैफ का सनक बन गया। बिहार सरकार द्वारा सात निश्चय योजना के तहत कौशल विकास कार्यक्रम का तीन माह के कोर्स का प्रशिक्षण प्राप्त किया। कैफ के जज्बे को देख तत्कालीन वीडीओ मिथिलेश बिहारी वर्मा ने उन्हें लोहिया स्वच्छता अभियान में फुलौत पंचायत में उन्हें स्वच्छाग्रही का जिम्मेदारी दिया। कहते है ना कि जिंदगी में कभी हार नहीं माननी चाहिए, “आदमी शरीर से विकलांग होता है, ना कि सोच से” कुछ ऐसे ही विचारों के साथ शहंशाह कैफ प्रत्येक दिन तपती धूप और वारिश में दस किलोमीटर तक कभी अपने पुरानी ट्राइसाइकिल से तो कभी अपने टूटी फूटी बैसाखी से तो कभी सड़कों और पगडंडियों पर घिसटते हुए सफर तय कर जनमानस को खुले में शौच से रोकने के लिए घर-घर दस्तक देने लगे।
उनका प्रयास रंग लाया और घर-घर शौचालय बनवाया जाने लगा। खासकर वे रमजान के महीने में भी रोजा रखते हुए भी समाज सेवा से कभी मुंह नहीं मोड़ा। “कहते हैं न हौसला बुलन्द हो तो सब कुछ आसान नजर आने लगता हैं”। सागर की भाँति शान्त रहकर मेहनत की और कुछ हीं दिनों बाद सफलता ने शोर मचाकर रख दिया। इस उपलब्धि से प्रभावित होकर स्वच्छ भारत अभियान के जर्नल में कैफ की स्टोरी प्रकाशित कि गई। और देखते देखते इनके हौसले का डंका पुरे सूबे में बजना सुरु हो गया।

अधिकारियों के साथ शहंशाह कैफ

कैफ के जज्बे और हौसले से प्रभावित होकर जिला प्रशासन मधेपुरा के द्वारा सम्मानित करने के लिए राज्य मुख्यालय को अनुशंसा भेजे जाने पर 14 मई 2018 को पटना में आयोजित राजकीय समारोह में उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। राजकीय समारोह में सम्बोधन के दौरान दुनिया में सिर्फ एक ही विकलांगता है और वह है नकारात्मक सोच। इस बात का संदेश देकर न सिर्फ अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन गए शहंशाह कैफ। कैफ उन लोगों के लिए प्रेरणा साबित होने लगे जो अपनी शारीरिक अक्षमता को अपना बाधा मानकर निराश हो जाते हैं। पैरों से लाचार होने के बावजूद भी जिंदगी से शहंशाह कैफ को कोई शिकवा शिकायत नहीं है। एक तो गरीबी का दर्द, दूसरा पैरों से लाचारी का सितम के बाद भी जिंदगी को हंसकर खुशी से जीने की चाहत रखता हैं और लोगों को जिंदगी जीने के असल मायने सिखा रहा है।

अपनी पत्नी और बच्चों के साथ शहंशाह कैफ

बचपन से दोनों पैरों से दिव्यांग कैफ ने कभी हिम्मत नहीं हारी और इस समस्या को हराने में कोई कोर कसर भी नहीं छोड़ी। सबसे बड़ी उपलब्धि है कि दूसरों पर निर्भर रहने की बजाए अपने सभी काम खुद करते हैं। कैफ उन सभी के लिए उदाहरण है जो संसाधनों का अभाव कहकर अपने इरादे बदल देते है। कैफ के जीवन में सबसे बड़ा खुशी का पल तब आया जब उससे प्यार करने वाली प्रेमिका शादी की बारात लेकर खुद लड़की कैफ के घर आई। और दोनों परिवार रज़ामंदी के साथ धूमधाम से शादी हुई कैफ के सुखमय दाम्पत्य जीवन में आज 8 महीने की एक नन्हीं सी परी भी है। कैफ कहते हैं कि हमारे परिवार वालों के साथ हमारी हमसफर भी हमारे लिए बैसाखी का काम बखूबी कर रहे हैं। हम छोटे से परिवार में बहुत खुश हैं पर रोजगार की तलाश में हैं। कैफ का सपना कुछ कर दिखाने का है। पर बार-बार आर्थिक तंगी उनके आड़े आ रही है। फिलहाल अभी वो बेरोजगार हैं समाज सेवा के साथ-साथ पत्रकारिता का काम बखूबी कर रहे हैं। पर वह अधिकारियों से आस लगाए हुए हैं कि उन्हें किसी काम में लगाया जाए ताकि उसकी आर्थिक स्थिति सुधर सके। ताकि अपने क्षेत्र में कोई बड़ा काम कर अपने जिले और अपने राज्य का नाम रोशन कर सके। कैफ ने कहा कि अगर हमें कोई रोजगार मिल जाती है तो हमारा जीवन संतुष्ट हो जाएगा। क्योंकि संतुष्ट जीवन सफल जीवन से सदैव श्रेष्ठ होता है क्योंकि सफलता सदैव दूसरों के द्वारा आंकलित होती है जबकि संतुष्टि स्वयं के मन और मस्तिष्क द्वारा।

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