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तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे जगरनाथ मिश्र का निधन

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संजय कुमार सुमन

बिहार के पुर्व मुख्यमंत्री जगरनाथ मिश्र का निधन हो गया।लंबे समय से बीमार चल रहे जगरनाथ  मिश्र ने आज तड़के दिल्ली में अंतिम सांसे ली।जगरनाथ मिश्र की निधन की खबर मिलते ही पुरे देश एवं बिहार में शोक का लहर दौड़ गया है।कोसी टाइम्स परिवार की ओर से मिश्रा के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त किया है।

82वर्षीय मिश्र तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके 

डॉ जगन्नाथ मिश्र भारतीय राजनेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री हैं।श्री मिश्रा ने प्रोफेसर के रूप में अपना करियर शुरू किया था और बाद में बिहार विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बने।अपनी राजनीतिक पकड़ की वजह से वो तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने पहली बार यह जिम्मेदारी वर्ष 1975 में संभाली, दूसरी बार वो 1980 में राज्य के मुख्यमंत्री बने।

आखिरी बार वह 1989 से 1990 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। उनकी रुचि राजनीति में बचपन से ही थी, क्योंकि उनके बड़े भाई, ललित नारायण मिश्र राजनीति में थे और रेल मंत्री थे। डॉ जगन्नाथ मिश्रा विश्वविद्याल में पढ़ाने के दौरान ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। डॉ मिश्र 1975 में पहली बार मुख्यमंत्री बने। दूसरी बार उन्हें 1980 में कमान सौंपी गई और आखिरी बार 1989 से 1990 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। वह 90 के दशक के बीच केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भी रहे।बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा ने राजनीति से पहले अपने करियर की शुरुआत लेक्चरर के तौर पर की थी।बाद में उन्होंने बिहार यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के तौर पर अपनी सेवाएं दी।

जगन्नाथ मिश्र कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे हैं।चारा घोटाले में भी जगन्नाथ मिश्र का नाम आया था और कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया था।कोर्ट ने उनपर बीस हजार जुर्माना और चार साल की सजा भी सुनाई थी।हालांकि बाद में मेडिकल ग्राउंड पर उन्हें जमानत मिल गई थी।

जगन्नाथ मिश्र और कर्पूरी ठाकुर बिहार के ऐसे मुख्यमंत्री माने जाते हैं जो पंचायत तक के नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम और घर का पता तक याद रखते थे और उन्हें चिट्ठी भी लिखा करते थे।वो राजनीतिक परिवार से थे और उनके बड़े भाई ललित नारायण मिश्र भी रेल मंत्री थे। इंदिरा गांधी के समय से लगातार वो सियासत में बहुत मजबूती से रहे।राजीव गांधी का दौर आया और पीवी नरसिम्हा राव से भी उनके अच्छे संबंध रहे।

बिहार में डॉ मिश्र का नाम बड़े नेताओं के तौर पर जाना जाता है । कांग्रेस छोड़ने के बाद, वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और अब जनता दल (यूनाइटेड) के सदस्य हैं। 30 सितंबर 2013 को रांची में एक विशेष केंद्रीय जांच ब्यूरो ने चारा घोटाले में 44 अन्य लोगों के साथ उन्हें दोषी ठहराया। उन्हें चार साल की कारावास और 200,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

 

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