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पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का निधन,क्या है उनका व्यक्तित्व व कृतित्व

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संजय कुमार सुमन  समाचार सम्पादक 

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का निधन हो गया है। वो लंबे समय से बिमार चल रहे थे। उनका इलाज दिल्ली के एम्स अस्पताल में चल रहा था।बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री ने शनिवार दोपहर 12:07 मिनट पर दिल्ली के एम्स अस्पताल में आखिरी सांस ली। एम्स अस्पताल ने एक प्रेस रिलीज जारी कर इसकी जानकारी दी।

कई बीमारियों की चपेट में आ गए थे जेटली
जेटली के फेफड़ों में पानी जमा हो रहा था, जिसकी वजह से उन्हें सांस लेने में दिक्कत आ रही था। यही वजह है कि डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा था। उन्हें सॉफ्ट टिशू सरकोमा था, जो एक प्रकार का कैंसर होता है। बता दें कि जेटली पहले से डायबिटीज के मरीज थे। उनका किडनी ट्रांसप्लांट हो चुका था।सॉफ्ट टिशू कैंसर की भी बीमारी का पता चलने के बाद वह इलाज के लिए अमेरिका भी गए थे। उन्होंने मोटापे से छुटकारा पाने के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी भी करा रखी थी।

अरुण जेटली का जन्‍म 28 दिसंबर 1952 को नई दिल्‍ली के नारायणा विहार इलाके के मशहूर वकील महाराज किशन जेटली के घर हुआ।इनकी प्रारंभिक शिक्षा नई दिल्‍ली के सेंट जेवियर स्‍कूल में हुई। 1973 में इन्होंने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से कॉमर्स में स्‍नातक की पढ़ाई पूरी की और लॉ की पढ़ाई करने के लिए 1977 में दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय में लॉ विभाग में दाखिला ले लिया।वे पढा़ई के दौरान शिक्षण व अन्‍य कार्यक्रमों में भी भाग लेते रहे। 1974 में वे दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के विद्यार्थी संघ के अध्‍यक्ष चुन लिए गए। इसी के साथ उनके राजनीतिक करियर की भी शुरुआत हो गई।
1974 में अरुण जेटली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए। 1975 में आपातकाल के दौरान आपातकाल का विरोध करने के बाद उन्‍हें 19 महीनों तक नजरबंद रखा गया। 1973 में उन्होंने जयप्रकाश नारायण और राजनारायण द्वारा चलाए जा रहे भ्रष्‍टाचार विरोधी आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

अरुण जेटली भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता हैं।  वे राजग(राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के शासन में केंद्रीय न्याय मन्त्री के साथ-साथ कई बड़े पद पर आसीन थे। अरुण जेटली के पिता एक वकील है। छात्र के रूप में अपने कैरियर के दौरान, उन्होंने अकादमिक और पाठ्यक्रम के अतिरिक्त गतिविधियों दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के विभिन्न सम्मानों को प्राप्त किया हैं। अरुण जेटली को बीजेपी का एक सुलझा हुआ और कद्दावर नेता माना जाता है। वित्त मंत्री के रुप में उन्होंने जीएसटी जैसे रिफॉर्म देश को दिए। हांलाकि जीएसटी को लेकर जेटली की किरकिरी भी हो चुकी है।

राजनीति में शामिल होने से पहले वह सुप्रीम कोर्ट में लॉ प्रैक्टिस कर रहे थे। उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा वरिष्ठ वकील के रूप में नामित किया गया था। जेटली ने 1975 में आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। उस समय वह युवा मोर्चा के संयोजक थे। उन्हें पहले अंबाला जेल में और फिर तिहाड़ जेल में रखा गया था। वाजपेयी सरकार के दौरान जेटली पहले कैबिनेट मंत्री भी थे। उन्होंने अतिरिक्त कार्यभार के रूप में मोदी सरकार में रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। यूपीए शासन के दौरान उन्होंने 2009 से 2014 तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया।

कोसी टाइम्स परिवार पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के निधन पर शोक व्यक्त करता है।

उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान एबीवीपी के विद्यार्थी नेता के रूप में छात्र संघ चुनाव में सक्रिय रूप से भाग लिया और 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष भी बने। वह आंतरिक आपातकाल (1 975-19 77) की अवधि के दौरान 1 9 महीनों के लिए नजरबंद रहे।अपने किशोरावस्था के दिनों में वह सीए बनना चाहते थे। वर्ष 1977 से, वह भारत के सर्वोच्च न्यायालय के साथ कई उच्च न्यायालयों में कानूनी अभ्यास कर रहे हैं। वर्ष 1980 में, वह भाजपा के युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने।वर्ष 1989 में वी.पी. सिंह सरकार ने उन्हें अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में नियुक्त किया था।उन्होंने बोफोर्स घोटाले में जांच के लिए कागजी कार्रवाई भी की।उनके मुवक्किलों (clients) में जनता दल के शरद यादव और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के माधवराव सिंधिया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एल के आडवाणी जैसे विभिन्न राजनेता शामिल हैं।उन्होंने सम सामयिक कानून मामलो के कई प्रकाशन के लेखक भी हैं।जेटली भारत सरकार की ओर से जून 1998 में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के लिए एक प्रतिनिधि के रूप में गए, जहां ड्रग्स एंड मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित कानूनों की घोषणा को मंजूरी दे दी गई थी।

अरुण जेटली कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसे कि- कोका कोला, पेप्सिको, इत्यादि की ओर से वकालत करते हैं।वर्ष 1991 में, वह भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने।वर्ष 1999 में, वह भाजपा के प्रवक्ता के रूप में नियुक्त किए गए।13 अक्टूबर 1999 को, वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में नियुक्त किए गए।राम जेठमलानी के इस्तीफे के बाद उन्हें एक कानून, न्याय, जहाजरानी (Shipping) और कम्पनी मामलों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। नवंबर, 2000 में वह विधि, न्याय, और कम्पनी मामलो एवं जहाजरानी मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री बने। 1 जुलाई 2002 को, वह भाजपा के राष्ट्रीय सचिव बने।29 जनवरी 2003 को, उन्हें कानून और न्याय मंत्री और उद्योग मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया।3 जून 2009 को, उन्हें राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में चुना गया।जून 2009 से उन्होंने वकालत करना बंद कर दिया है।उन्होंने 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।उन्होंने संविधान के 84वें और 91वें संशोधन में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई।

वर्ष 2014 के आम चुनाव में, उन्होंने अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और अमरिंदर सिंह (कांग्रेस उम्मीदवार) से हार गए। 26 मई 2014 को, जेटली को नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वित्त मंत्री (जिसमें कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय भी शामिल थे) और उनके कैबिनेट में रक्षा मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया।वह अभिनेता अक्षय डोगरा और अभिनेत्री रिधि डोगरा के चाचा हैं।वह भारत के प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के नाम का सुझाव देने वाले पहले व्यक्ति थे।जुझारू तथा योग्य और ऊर्जावान संगठनकर्ता तथा सक्षम रणनीतिकार की आवश्यकता पार्टी में भी बड़ी शिद्दत से महसूस की जा रही थी, अतः 01 जुलाई, 2002 को केंद्रीय मंत्री का पद त्याग कर आप भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता हो गए तथा अपनी वकालत भी जारी रखी। सभी चुनावों, उपचुनावों में भाजपा के विजय अभियानों का, पार्टी के रणनीतिकार के रूप में अपनी नीतिकुशलता का परिचय देते हुए, आप महत्वपूर्ण दिशा निर्देशन किया । दिल्ली नगर निगम से लेकर गुजरात, मघ्य प्रदेश, कर्नाटक, बिहार और पंजाब आदि राज्यों में भाजपा की चुनावी सफलताओं का यही रहस्य है। सुरुचिपूर्ण तथा सुगढ़ महिला संगीता जेटली आपकी जीवन संगिनी हैं। 24 मई, 1982 को आप दोनों दांपत्य जीवन की डोर में बंधे थे ।होनहार पुत्र रोहन और पुत्री सोनाली के साथ एक भरे-पूरे सुखद गार्हस्थ्य का आनंद आपको अनायास प्राप्त है। आप क्रिकेट के दीवाने हैं और दिल्ली जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डी.डी.सी.ए.) के आप सालों से अघ्यक्ष रहे हैं। आप लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता भी रह चुके हैं ।

 

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