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सुपौल:पिपरा के किसानों ने सार्वजनिक रूप से चंदा इकट्ठा कर नहरों की सफाई की

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मिथिलेश कुमार 

कोसी टाइम्स@पिपरा,सुपौल
सिंचाई विभाग के लचर पचर व्यवस्था से है तंग आकर किसानों ने सार्वजनिक रूप से चंदा इकट्ठा कर नहरों की सफाई की। बताते चलें कि सहरसा उपशाखा बड़ी नहर से किसानों को करीब 20 गांव के किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलेगा क्योंकि विभाग ने नहर की सफाई नहीं कराई नहर की सफाई बीते दो दशक से नहीं हुई ।और ना ही टूटे हुए नहर की मरम्मत हुई है। विभागीय उदासीनता का आलम यह है कि नहर में नजर आने वाली छोटी-छोटी झाड़ अब पेड़ पौधे की शक्ल ले चुकी है। विभागीय स्तर पर कभी भी नहर की सफाई की योजना नहीं बनी है। यही कारण है कि नहरों का जाल बिछा रहने के बावजूद पिपरा प्रखंड के कटैया, निर्मली, हटबरिया, थुम्हा आदि गांवों में किसानों के लिए पटवन की समस्या बनी हुई है। नहर कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी है। कटैया गांव के किसान धर्म लाल मंडल बताते हैं कि नहर की सफाई बीते करीब 15 -20 वर्षों से नहीं हुई है। किसानों के खेत तक पानी की सप्लाई ना के बराबर होती है। पटवन के लिए किसानों को पंप सेट का सहारा लेना पड़ता है। श्री मंडल के अनुसार विभाग द्वारा निर्मली सबरिया, कटैया,थुमहा,बेलोखरा सहित आसपास के क्षेत्रों में भी छोटे नगरों की जाल बिछाया गया है। लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण नहर खुद पानी को तरस रहे हैं। कई नहर तो अपना अस्तित्व खो चुके हैं।

निर्मली पंचायत के किसान लाल बहादुर मेहता, सुरेंद्र शाह, किनकर मेहता, रामप्रवेश मंडल ,महेश कुमार मेहता, शैलेंद्र कुमार, राम प्रसाद मेहता, भुवनेश्वर मंडल मोहम्मद फरमुद, मोती सरदार, शिव प्रसाद मंडल, अशोक मंडल, उपेंद्र मंडल,सत्य ना0 मंडल,शिव ना0 मंडल,राम ना0 मंडल देव ना0 मंडल, वीरेंद्र मंडल, जगदीश मंडल, दिनेश मंडल, सुरेश मंडल, डॉ उमाशंकर मंडल, रामदेव मंडल, दुखा मंडल, सप्तम मंडल, फुलेश्वर मंडल आदि बताते हैं कि नहर सफाई नहीं होने से हम लोगों के खेत पटवन के लिए पानी नहीं आती है। इसका मुख्य कारण है कि सिंचाई विभाग कभी भी इस ओर ना तो देखने आते हैं ना ही इस की कोई व्यवस्था सिंचाई विभाग के द्वारा की जाती है। विभाग की इस रवैया से तंग आकर किसानों ने सार्वजनिक स्तर से चंदा इकट्ठा कर नहरों में उगी जंगली घास एवं टूटी फूटी जगहों पर सफाई एवं मरम्मत किया ।अगर किसान लोग अपने से नहर की सफाई नहीं करते तो किसानों के बीच बहुत बड़ा समस्या उत्पन्न हो जाती। क्योंकि धान का बिचड़ा भी खराब हो जाती। बड़ी नहर में पानी की सप्लाई भी शुरू है। छोटी नहरों की सफाई विभागीय स्तर से नहीं कराई गई है। इसके कारण एक बार फिर किसानों को पंप सेट का सहारा लेना पड़ेगा। बरहाल विभाग की इस कार्यशैली से अब किसानों में रोष पनपने लगा है। और किसान आंदोलन की तैयारी में है। विभाग की माने तो किसानों से पटवन का शुल्क भी प्रतिवर्ष वसूल किया जाता है। एक तो किसानों खुद नहरों की सफाई मैं पैसा देना पड़ता है। एक विभागीय द्वारा पटवन का शुल्क भी वसूल किया जाता है। निर्मली पंचायत के मुखिया कुंदन कुणाल कटैया पंचायत के मुखिया रेखा कुमारी के अनुसार नहरों की सफाई नहीं होना किसानों के लिए बड़ी समस्या है। बड़ी नहर में पानी की सप्लाई होती है छोटे नहर की सफाई नहीं होने के कारण किसानों को खेत तक पानी नहीं पहुंच पाता है। निर्मली माइनर 12 आरडी जगह-जगह टूटा हुआ है।

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