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मुम्बई में होगा बिहार छात्र संसद का आयोजन

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रविकांत कुमार

कोसी टाइम्स @ न्यूज डेस्क ।

भारत की 50 % जनता युवा है। 315 मिलियन से ज्यादा छात्र जनता के साथ हम विश्व के सबसे ज्यादा छात्रों वाला देश होने का गौरव रखते हैं। इसी भारत के बिहार में सन 74 में जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का बिगुल छात्रों के साथ फूंका था जो आज तक का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन है। इसी जेपी आंदोलन से लालू प्रसाद यादव, नितीश कुमार, शरद यादव, सुशील कुमार मोदी और राम विलास पासवान सरीख़े नेता निकले तो इसी बिहार की धरती से कई उद्योगपति भी निकले। लेकिन आज उसी राज्य के लाखों लोगो को रोज़गार की तालाश में मुम्बई जैसे महानगरों की तरफ पलायन करना पड़ रहा है। बिहार में सालो से उद्योग लगाने की दिशा में कोई काम नही हुआ। लोकतंत्र ,आंदोलनों की जननी बिहार की गौरवशाली धरती के गौरव को दुबारा स्थापित करने की दिशा में बिहार के कुछ युवाओ ने एक मुहिम छेड़ रखा है। विगत कुछ वर्षों से रॉय केशव शर्मा और उनके साथी अंकित कुमार ने बिहार छात्र संसद नाम से एक मंच तैयार कर नए युवा नेतृत्व तैयार करने की कोशिश कर रहे जो कि ना सिर्फ राजनीति बल्कि लघु उद्योग की शुरुआत कर के बिहार की उन्नति कर सके। बिहार छात्र संसद का पहला संस्करण मुज़फ़्फ़रपुर जबकि दूसरा पटना के ऐतिहासिक भूमि पर हुआ था। आज इस मंच से बिहार के हज़ारों युवा जुड़े है। बताते चले कि पिछले वर्ष इसी मंच के माध्यम से एक विदेशी दवा कंपनी के एमडी राकेश पाण्डेय ने बिहार में उद्योग लगाने की घोषणा की थी। इस मंच से जुड़े लोग समाजसेवा में भी लगे रहते है।

अपने पुराने सफल संस्करणों को देखते हुए रॉय केशव शर्मा और उनकी टीम गाँधी जी की 150वीं पुण्यतिथि के मौके पर उनकी याद में गाँधी जी के ग्राम स्वराज के सिद्धांत पर तीसरा बिहार छात्र संसद मुम्बई में कराने जा रही है। रॉय केशव बताते है कि गाँधी जी ने सत्याग्रह की शुरुआत चंपारण से की और ग्राम स्वराज की सोच महाराष्ट्र में दी और ग्राम स्वराज आज की जरूरत है क्योंकि हम देखते है कि आज रोजगार की तलाश में लाखो बिहारी प्रतिवर्ष महाराष्ट्र आ जाते है। इसको देखते हुए बिहार छात्र संसद इस बार महाराष्ट्र में “चंपारण से वर्धा तक” कार्यक्रम करेगी, जो गाँधी जी के विचारधारा से प्रेरित है।

ब्रावो फार्मा, बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्रालय तथा महाराष्ट्र सरकार के सौजन्य से 8 सितम्बर को मुम्बई के प्रतिष्ठित संमुखानंद हॉल में बिहार छात्र संसद और उत्तर भारतीय युवा परिवर्तन मंच के बैनर तले “चंपारण से वर्धा तक” कार्यक्रम का आयोजन होने वाला है। इस आयोजन का लक्ष्य उन बिहारियो को बिहार वापस ले जाना है जो बिहार के उत्थान में कारगर साबित हो सकते है तथा इसका उद्देश्य मराठी भाइयो को बिहार के कला एवं संस्कृति से परिचित कराना है। वर्तमान के नेताओं का संवाद भविष्य के नेताओं के साथ तथा आज के उद्यमियों का संवाद आने वाली युवा उद्यमियों के साथ स्थापित करना है। इस संसद में एक ओर जहाँ राष्ट्रीय और बिहार के कई मंत्रीगण को निमंत्रण भेजा गया है और मुख्य अतिथि के तौर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को निमंत्रण दिया गया है, वहीं बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार, उद्योग मंत्री श्याम रजक के साथ ही उद्योग ,मीडिया एवं कला जगत के कई नामचीन हस्तियों की भी शामिल होने की संभावना है। जो वहाँ के लगभग 1500 छात्रों के साथ सीधी बातचीत करेंगे। इस आयोजन का लक्ष्य ना सिर्फ इन नेताओं ,उद्यमियों और छात्रों के बीच संवाद स्थापित करना है बल्कि, बिहार, महाराष्ट्र और देश भर के छात्रों को विकासशील लोकतान्त्रिक व्यवस्था के प्रति सही समझ और सच्ची श्रद्धा विकसित करना है।

सुबह 9 बजे से शाम के 8 बजे तक चलने वाले इस कार्यक्रम में कई सत्र होंगे जिसमे गाँधी जी के ग्राम स्वराज , मुम्बई-बिहार के कला एवं संस्कृति और बिहार के उद्योग क्रांति लाने जैसे मूलभूत और जरुरी विषयों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम का एक मुख्य बिंदु, बिहार के कला एवं संस्कृति तथा उद्योगों का विकास पर भी केंद्रित होगा। ऐसा मुम्बई में संभवतः पहली बार हो रहा है की इतने जरुरी मुद्दों पर एक ही मंच पर राजनीती ,उद्योग और पत्रकारिता के दिग्गजों के साथ छात्र भी भागीदारी करेंगे। इससे भी ज़्यादा आश्चर्य और ख़ुशी वाली बात ये है की इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी बिहारी युवाओं की एक टीम के ऊपर है जिसमें युवा समाजसेवी और जाग्रति यात्रा में सहभागी रॉय केशव शर्मा, अंकित कुमार और उनका साथ दे रहे है बिहार की बेटी और महाराष्ट्र मुख्यमंत्री की सलाहकारा श्वेता शालिनी, इन्वेस्टर बैंकर सचिन देवा , वकील प्रसून कुमार अनंत प्रकाश, सुकृति चक्रोवर्ती, आनंद राज, ऋषभ रंजन, शुभम ठाकुर जैसे अनुभवी लोग शामिल है। बिहार के युवाओ के देख-रेख में हो रहे इस छात्र संसद का आयोजन हमें इस बात के प्रति आश्वस्त करता है कि कार्यक्रम में परिकल्पना के अनुसार लक्ष्य की प्राप्ति होगी। किसी भी लोकतंत्र में इस तरह के आयोजनों से ना सिर्फ लोकतंत्र की नींव मजबूत होती है बल्कि, राजनीतिज्ञों और उद्योगपतियों को भी जनता ख़ासकर के छात्रों से सीधी बातचीत का भी अवसर देती है।

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