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नालंदा के स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह की 14 वीं स्मृति दिवस समारोह आयोजित

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नालंदा से लौटकर संजय ‘विजित्वर’

जी हां, भगवान बुद्ध की नगरी, प्राचीन विश्वविद्यालय का शहर नालंदा में सामाजिक सरोकार से जुड़ा ऐसा कौन व्यक्ति होगा जो स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह को नहीं जानता होगा ।यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, वरन् उनकी 14 वीं स्मृति दिवस पर पधारे नालंदा के बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा उनके ग्रामीण और उनके अग्रजों ने इस बात की पुष्टि की। मैं भी भाग्यशाली व्यक्ति बना इस अवसर पर पधार कर। दरअसल दूरदर्शन पटना के एक कार्यक्रम में मुझे 24 जुलाई के दिन एक इंटरव्यू करने के लिए संबंधित कार्यक्रम अधिशासी ने फोन किया था, किंतु मैंने आग्रह किया कि इस डेट को कृपया आगे बढ़ा दें और वे अधिकारी मान भी गए। मैं उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि वह मुझे इस कार्यक्रम में शामिल होने का सौभाग्य प्रदान किया। मैं जब 1:00 बजे दिन में बिहार शरीफ पहुंचा तब स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह के जेष्ठ पुत्र कुमुद रंजन सिंह जो नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव तथा युवा पत्रकार हैं, ने मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया और मुझे उक्त कार्यक्रम के लिए अपने दुपहिया वाहन से कार्यक्रम स्थल पर ले गए। मैं जब कार्यक्रम स्थल नालंदा खंडहर के निकट सभागार में पहुंचा तो दर्जनों लोग का आगमन हो चुका था, जबकि दिन में मूसलाधार बारिश यहां हुई थी । कार्यक्रम का समय 2:00 बजे अपराहन था। कार्यक्रम आरंभ हुआ। सर्वप्रथम आगत अतिथियों ने स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उस पुण्य आत्मा के लिए 2 मिनट का मौन रखा।

कार्यक्रम की शुरुआत हुई सामाजिक कार्यकलापों से जुड़े जिले के आईकॉन समाजसेवी आशुतोष मानव जी ने स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह के व्यक्तित्व तथा कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें सामाजिक सरोकार से जुड़ा हर व्यक्ति जानता है और भविष्य में भी यह नाम विस्मृत नहीं हो सकेगा। उसके बाद अमित पासवान जी ने बतलाया कि स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह एनजीओ की दुनिया में खासकर नालंदा के लिए वह प्रकाश पुंज हैं जिनसे कई लोग लाभान्वित हुए। इसके बाद जिले के विद्वान डॉक्टर गोपाल शरण सिंह जी ने कहा कि स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह अपने नाम के अनुरूप कभी शोक संतप्त नहीं देखे गए एवं उन्होंने जो संस्था बनाई मगध समाज कल्याण प्रतिष्ठान वह भी नाम के अनुरूप जिले से लेकर राज्य और देश में अपना नाम रोशन कर चुका है। साथ ही उनका पुत्र ‘कुमुद’नालंदा के बामन तालाबों में से एक कमल के फूल के समान है।

इस अवसर पर प्रोफेसर डॉ जितेंद्र कुमार सिंह जी ने कहा कि आज के जमाने में स्मृति दिवस का आयोजन कर पाना सभी लोग के लिए सीख देने जैसा है। हम सब जिस तरह से अपने पूर्वजों के धन को अपना समझते हैं उसी तरह से उनके व्यक्तित्व -कृतित्व को भी फैलाना हम सबों का कर्तव्य होता है। इसके बाद स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह के एक मित्र सुनील कुमार सिंह ने बताया कि वे हमारे लिए मित्रवत थे और उनसे पारिवारिक संबंध था। स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह कुशल समाजसेवी थे तथा समाज के उत्थान के प्रति हमेशा तत्पर दिखाई देते थे। इसके बाद एक बुजुर्ग वक्ता राम विलास सिंह ने मगही बोली में स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह के व्यक्तित्व तथा कृतित्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि वे केवल एक एनजीओ के संचालक ही नहीं थे, बल्कि प्रेरक पुरुष भी थे। यदि कोई संगठन बनाना चाहता था तो उसे तकनीकी रूप से मदद भी करते रहते थे। इसके बाद एक दलित युवा सुबोध कुमार रविदास ने कहा कि स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह अभिभावक तुल्य थे। उनसे जुड़ा स्मरण सुनाने के क्रम में कहा कि एक संगठन निर्माण के काम से जब उनके पास पहुंचा तो सबसे पहले उन्होंने खाना खाने के लिए पूछा और अपना टिफिन वाला खाना मुझे खाने के लिए दे दिया तथा स्वयं दो समोसा मंगवा कर खा लिए। उनके मन में जाति का कोई भेदभाव नहीं था। एक लोक गायक भैया अजीत भी अपने वक्तव्य में बताया कि स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह जैसा उदार और कर्मशील व्यक्ति मिलना कठिन है। इस बीच राजस्थान से पत्रकार सतीश शांडिल्य जी का संदेश आया था जिसे पढ़कर सबके बीच सुनाया गया। उन्होंने बताया कि ऐसा उदार और कर्मठ चरित्र का व्यक्ति मिलना दुर्लभ है। इसके बाद मेरी भी बारी आई तो मैंने नालंदा के उस महान आत्मा को नमन किया तथा उनके सुपुत्र कुमुद रंजन सिंह को साधुवाद इसलिए दिया कि उन्होंने स्वर्गीय पिता के स्मृति दिवस को बीते 13 वर्षों से अनवरत मना रहे हैं।

दरअसल स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह का जन्म नालंदा के बहादुर बिगहा पुराना नाम गरेरिया बीगहा ग्राम में क्षत्रिय परिवार में हुआ था। स्वर्गीय राम सुहावन सिंह तथा माता गौरी देवी की ज्येष्ठ संतान स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह थे। इनकी शिक्षा-दीक्षा किसान कॉलेज से हुई तथा उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की। कुमुद रंजन सिंह से बातचीत के क्रम में पता चला कि उनके पिता का आरंभिक जीवन काफी संघर्ष में रहा पर हिम्मत कभी ना हारे। स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह के मन में सामाजिक कल्याण की भावना आई और उन्होंने सन् 1971 ईस्वी में मगध समाज कल्याण प्रतिष्ठान की स्थापना की और इसके माध्यम से उन्होंने कई सामाजिक गतिविधियों को मूर्त रूप दिया ।उनकी लगभग 54 वर्ष की अवस्था में सन 2005 ईस्वी में मृत्यु हो गई। जब इनकी मृत्यु हुई तो कुमुद रंजन सिंह किशोर वय के थे साथ ही एक और छोटा भाई रवि रंजन सिंह तथा तीन बहनें। स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह की विधवा नीलम देवी पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा। धीरे-धीरे वक्त ने तथा शुभचिंतकों ने ढांढस बंधायी और जीवन गाड़ी

अपनी रफ्तार पकड़ती गई। स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह अपने जीवन काल में सामाजिक सरोकार से जुड़े रहने के कारण काफी सुर्खियों में रहे। यहां तक कि नालंदा सहित बिहार के ऐसे कई संगठन के लोग स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह की कर्मठता के कारण उन्हें आज भी जानते हैं। अपने पितरों को याद करना बहुत बड़ी बात होती है तथा उनके पद- चिन्हों पर चलना और भी कठिन काम होता है। स्वर्गीय अशोक कुमार सिंह के पुत्र कुमुद रंजन सिंह ने यह बीड़ा उठाया है। वास्तव में यह समाज के लिए और आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्पद है। ऐसे पुण्य आत्मा को मैं कोटि -कोटि प्रणाम करता हूं। सायंकाल होने वाला था। कार्यक्रम समाप्ति के बाद सभी लोग अपने -अपने घर के लिए प्रस्थान कर गए और मैं भी वापस लौट आया।

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