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खगड़िया:बेलदौर विधायक पन्ना लाल सिंह पटेल ने किया गुरूर्णिमा का उदघाटन,पनलसवा में शुरू हुआ दसवां गुरू पुर्णिमा महोत्सव

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सुमलेश कुमार यादव@बेलदौर,खगड़िया 

कोसी बागमती के संगम स्थल से सटे कोसी इंटर विद्यालय पनसलबा बेलदौर के प्रांगण में विराट दसवां गुरु पूर्णिमा महोत्सव का शुरूआत मंत्रोचार के साथ हुआ. विधिवत उद्धाटन बिहार सरकार के ग्रामीण विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार के द्वारा होना था लेकिन किसी कारण बस वह पनलवा नही आ सके, मंत्री जी के अनुपस्थिति में स्थानीय विधायक पन्ना लाल सिंह पटेल ने गुरूपुर्णिमा का उद्घाटन किया विशिष्ट अतिथि भी नही आ सके. डीएम अनिरूद्ध कुमार, एसपी मीनू कुमारी, उप विकास आयुक्त राम निरंजन सिंह, गोगरी एसडीओ सुभाष चन्द्र मंडल विशिष्ट अतिथि में सांसद चौधरी महबूब अली कैसर बेलदौर भी कार्य क्रम में भाग नही ले पाए. गरिमाई अतिथि में बेलदौर बिडीओ शशि भूषण कुमार, गोगरी बीडीओ अजय दास, चौथम बीडीओ राज कुमार पंडित, बेलदौर थानाध्यक्ष रणजीत कुमार, प्रार्चाय मो० जाबेद सकिल, सीओ बेलदौर अमित कुमार, सीओ गोगरी कुमार रविन्द्र, सीओ चौथम दयाशंकर तिवारी आदि उपस्थित थे वही दर्शक शशि कुमार शर्मा राजेश सिंह भुपेन्दर पंजियार,माली मुखया इंद्रदेव यादव, नुतन पटेल उपस्थित थे श्री शिव शक्ति योग पीठ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए गुरू पूर्णिमा कमेटी कोई कसर नही छोड़ रही है .

स्वामी अगमानन्द जी के द्वारा गुरु की महिमा का बखान करते हुए कहा की गुरु वह है जो अंधकार से  प्रकाश की ओर ले चले। बिना गुरु से ज्ञान सम्भव नहीं है। गुरु प्रभु तत्व ही परम तत्व। हैं। माता। पिता  गुरु अतिथि देशस्वरुप हैं। संत शिरोमणी कवीर दास के दोहे में कहा गया है कि गुरु गोविंद  दोऊ खड़े, का के लागूं पांय।
बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय गुरू और गोबिंद (भगवान) एक साथ खड़े हों तो किसे प्रणाम करना चाहिए – गुरू को अथवा गोबिन्द को? ऐसी स्थिति में गुरू के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है.बंदऊँ गुरुपद पदुम परागा  – गुरु के चरण के धुली से  ही लोगों का कल्याण होता है। ओर गुरु के माध्यम से जीवन के सारे विग्न दुर होते हैं। सनातन धर्म में  विष्णु के छठे अवतार दत्ता त्रैय जीवन में बाइस गुरु के माध्यम से विष्णु रुप को धारण कर नर से नारायण हो गए। ये सारे जीवन में परिवर्तन गुरु सत्ता ही ला सकते हैं ।अवधि के प्रसिद्ध भजन”  बहियां पकड़ गुरु रहियां दिखावे, वेहे मिलावे परमेश्वर से” इस भजन के सार्थकता से लोगों को जीवन नैया गुरु प्रभु पार लगाते हैं। जहाँ चाह वहाँ राह बनते जाते हैं।

सरल संतों में से एक  सनातन धर्म  की ज्योति जगाने के लिए अंग की धरती पर परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज का अवतरण हुआ है।जो कि लगभग तीन दशकों से देश के चारों तरफ भ्रमण कर इस इलाके के लाखों लोगों को अध्यात्म का रस पान कराकर ईश्वर भक्ति का पाठ पढाया। ऐसे गुरु तत्व को पाकर इलाके के लोग अहलादित हैं।

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