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सुपौल:त्रिवेणीगंज में अभियान के बाबजूद बाल मजदूरों पर रोक नहीं लगा पा रहा श्रम विभाग, स्थिति जस के तस

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सतीश कुमार आलोक कोसी टाइम्स त्रिवेणीगंज,सुपौल

त्रिवेणीगंज अनुमंडल मुख्यालय के बाजार क्षेत्र में छापेमारी के बाबजूद भी बाल मजदूरी पर रोक लगाने में श्रम विभाग पूरी तरह फेल साबित हो रहीं है। जब भी दुकानदारों को छापेमारी की भनक लगती हैं तो बाल मजदूरों को भगाने में कामयाब हो जाते हैं, मजे की बात तो यह हैं कि वर्ष में मात्र दो बार छापामारी अभियान चलाकर विभागीय अधिकारी अपनी पीठ थपथपा लेते हैं। लेकिन बाल मजदूरी पर रोक नहीं लगा पा रही है। पढने लिखने की उम्र में बच्चों पर परिवार की जिम्मेदारियां का बोझ डाल दिया जाता है। मालूम हो कि प्रखंड के अधिकांश मिठाई, चाय की दुकानों, होटलों आदि में अभी भी बच्चे काम करते दिखाई देती हैं। मोटर साइकिल रिपेयरिंग की दुकानों, ईंट भट्टा पर कई बाल मजदूर काम करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मकान निर्माण काम में ईंटें ढोते हुए बाल मजदूर दिखाई पड़ते हैं। इतना ही नही कई जानें माने बड़े ठेकेदार भी बच्चों को काम पर लगाते हैं। विभागीय अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी हाथ पर हाथ रखे बैठे हुए हैं। मजे की बात तो यह हैं कि त्रिवेणीगंज बाजार के मध्य से गुजरने वाली एनएच 327 ई पर जिले के आला अधिकारी का भी दिनभर आना-जाना लगा रहता हैं। लेकिन विभिन्न होटलों में काम कर रहें बाल-मजदूर पर किसी का ध्यान नहीं जाता हैं, जिसकी परिणाम यह हैं कि अभी भी प्रखंड के सेकड़ो दुकानों में धड़ल्ले से बाल मजदूर चल रहीं हैं।

अनुमंडल में दो सप्ताह पूर्व में भी चली थी अभियान

एक ओर राज्य सरकार बच्चों की शिक्षा की ओर भरसक प्रयास कर रही हैं। वहीं विभागीय अधिकारी सरकार के मंसूबों पर पानी फेर रहे हैं। मालूम हो कि अनुमंडल मुख्यालय में दो सप्ताह पूर्व श्रम विभाग के अधिकारी अभियान चलाकर बच्चों को बाल श्रम से मुक्त तो कराये हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं करने से दुकानदारों व होटल संचालकों पर कोई प्रभाव नही पड़ता नजर आ रहा है। जिसके चलते बाल मजदूरी पर रोक नहीं लग पा रही है। जबकि कुछ बच्चों के परिजन स्वयं ही उनसे मजदूरी कराते हैं।

अनुमंडल स्तर पर कमिटी की गई थी गठित

बाल श्रम व बंधुआ मजदूर को रोकथाम के लिए अनुमंडल स्तर पर कमेटी भी गठित की गई थी, लेकिन कमिटी के सदस्य भी इसे रोकने में फैल साबित हो रहीं हैं, परिणाम यह हैं कि विभिन्न होटलों व गैरेज में बाल मजदूर धड़ल्ले से चल रहीं हैं l हालांकि इसका मुख्य कारण अभिभावकों की गरीबी हैं, जो दो जून के रोटी के लिए बच्चों को होटल में लगाने पर विवश हैं l

क्या हैं प्रावधान

बाल व किशोर श्रम अधिनियम के तहत 14 वर्ष तक के बच्चे को किसी प्रकार के कार्य कराते पकड़े जाने पर कार्रवाई निश्चित है । अगर कोई भी व्यवसायी, दुकानदार, चिमनी भट्ठा या घर में कार्य कराने वाले 14 वर्ष तक के बच्चों से कार्य कराते पकड़े गए तो उसको 20 हजार रुपये दण्ड के रूप में देना होगा ।

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