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सहरसा : दो दिनों से रुक रुक कर हुई वर्षा , शहर हुआ पानी – पानी, कई मुहल्लों में घुसा पानी

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सुभाष चन्द्र झा
कोसी टाइम्स@सहरसा
रविवार की देर रात्रि से सोमवार की दोपहर तक रूक रूक कर हुई वारिस से किसानों के सुखे चेहरे पर जहां हरियाली आ गयी वहीं पूरा शहरी क्षेत्र जलजमाव से ग्रसित हो गया है. वर्षा होने से किसानों के चेहरे से गायब हो रही रौनकता एक बार फिर से खिल उठा है. किसान पानी को देख अपने खेतों की ओर बढ चले हैं. किसानों को यह चिंता सताये जा रहा था कि पिछले वर्ष की तरह हीं कहीं पानी दगा ना दे दे. धान के बीज एवं निचले खेतों में घान की रोपनी पानी के अभाव में नहीं हो पा रहा था. समय धीरे धीरे बीतता जा रहा था. मौनसून की आस पूरी नहीं हो पा रही थी. लेकिन मौनसून की यह पहली बारिश ने किसानों के हौसले को जगाने का काम किया है. वहीं मौनसून के पहले वर्षा में 58 मिलीमीटर वर्षा जिले में रेकाड किया गया है. मौनसून के 19 जुलाई तक सक्रिय रहने की बात कही गई है. ने ही नगर परिषद का पानी ल खोल कर रख दिया है. साथ हीं जिला प्रशासन की बरसात की तैयारी को भी उजागर कर दिया है. आरसीडी की सभी सडकों पर जगह जगह जलजमाव होने से दूर्घटनाओ में भी वृद्धि हो गई है. शहर के सभी मुख्य सडकों पर जलजमाव होने से बाजार की रौनकता पूरी तरह गायब है. सभी मुख्य सडकों के साथ साथ वार्डों में भी जलजमाव के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है. बुडको द्वारा अधुरे नाला निर्माण से शहर की समस्या पूर्व की तरह समस्या बरकरार है.

मौनसून 19 तक रहेगा सक्रिय
मॉनसून की पहली बरसात ने किसानों के चेहरे पर खुशहाली ला दिया है. यह मॉनसून अगले 19 जुलाई तक लगातार जारी रहने की संभावना मौसम विभाग ने जताया है. अगवानपुर कृषि महाविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक संतोष कुमार ने बताया कि मॉनसून की पहली वर्षा में 58 मिलीमीटर वर्षा दर्ज किया गया है. जबकि इस समय तक औसतन 150 मिलीमीटर वर्षा जिले में होती रही है. उन्होंने बताया कि अभी मॉनसून का पहला चरण है जो 19 जुलाई तक सक्रिय रहेगा. मौनसून के दौरान 16 जुलाई से लेकर 18 जुलाई तक मूसलाधार वर्षा की संभावना है. उन्होंने कहा कि कृषक अपने खेतों में धान की बुवाई एवं रोपनी शुरू कर दें. मानसून पूरी तरह सक्रिय है एवं धान की फसल जिले में अच्छी होने की संभावना है. उन्होंने बताया कि आगामी कुछ दिनों तक अधिकतम तापमान 32 एवं न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस बना रहेगा.

बस स्टैंड में प्रवेश करना भी है मुश्किल 
रविवार से हो रही बारिश के कारण जहां मुख्य सड़कों से लेकर गली मोहल्ले में जल जमाव की स्थिति बन गई है वही शहर के मध्य बसे बस स्टैंड तक पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. ट्रेनों एवं बहार से आन्दोलन वाले यात्रियों को जिला मुख्यालय से अन्य जगहों तक जाने के लिये बस की सवारी करनी पडती है. एसे में बस स्टैंड पहुंचना लोगों की मजबूरी है. जबकि बस स्टैंड के मुख्य गेट से लेकर पूरा बस स्टैंड परिसर जलजमाव एवं कीचड़ से अटा पडा है. यात्रियों को बस स्टैंड तक पहुंचने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. खासकर महिलाओं को कीचड़ युक्त सड़क पर चलना कठिन है. बस स्टैंड जाने वाली मुख्य सडख प्रशांत रोड से लेकर गंगजला चौक तक की सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त है. इन सड़कों पर जलजमाव होने से एवं बस परिसर में जलजमाव व कीचड़ से यात्रियों को हो रही कठिनाई का अंदाजा लगाया जा सकता है.

सभी मुख्य सडकें हैं गड्ढे में तब्दील 
शहर की सभी मुख्य सड़कें वर्षों से गड्ढे में तब्दील हैंं. इन गड्ढों में जल जमाव होने से लोग दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं. शहर की मुख्य सड़क बरियाही से लेकर पटुआहा तक के निर्माण कार्य की स्वीकृति मिल चुकी है. कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है. लेकिन कार्य गति काफी धीमी होने एवं बरसात से पूर्व इसकी शुरुआत नहीं होने के कारण लोगों की कठिनाई इस बरसात में भीक्षबरकरार रहने की पूरी संभावना दिख रही है. हालांकि जिला प्रशासन ने बरसात से पूर्व ही आरसीडी को सभी मुख्य सड़कों के निर्माण के लिये पत्र निर्गत किया था. आरसीडी के सुस्त रवैया के कारण निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है. जिससे शहर की सभी मुख्य सड़कों पर जलजमाव की स्थिति बनी हुई है. सदर एसडीओ शंभूनाथ झा ने रविवार को आरसीडी के सडकों का मुआयना किया था एवं कार्य पूरा नहीं होने को लेकर दिशा निर्देश भी दिया था. साथ ही जल्द पूरा करने को कहा था.

जल निकासी के लिये नप नहीं उठा रहा कदम
मौसम विभाग के द्वारा 24 जून के बाद मौनसून की बत कही गयी थी. लेकिन इससे पूर्व नगर परिषद ना तो शहर के किसी नाले की सफाई की है ना हीं मुहल्लों से जल निकासी के लिये कोई प्लान हीं तैयार किया. बुडको द्वारा बनाये जा रहे नाले का निर्माण फी पूरी तरह अधुरा है. एसे में एकबार फिर से शहर वासी जलजमाव का दंश झेलने को मजबूर हैं. शहर की हालत यह है कि थोडी वर्षा में हीं शहर जलजमाव से परेशान हो उठता है. एसे में आगे के मौनसून की वर्षा से शहर की बनने वाली हालात समझा जा सकता है. शहर के सभी नाले लगभग जाम पडे हैं. नाले का पानी सडकों पर आ रहा हैं. इन नालों से पानी की निकासी कैसे होगी इसके लिये नगर परिषद गंभीर नहीं है.

न्यू कालनी के घरों में घुसा पानी 
न्यू कॉलोनी का एक हिस्से में जलजमाव से यहां के लोगों के लिये परेशानी का सबब बन गया है. लगभग दर्जन भर लोगों के घर-आंगन सहित सड़क पर घुटने भर तक पानी लग गया है. जिससे उनका घर से निकलना बंद हो गया है. बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. बड़े-बूढ़ों को सड़क पर जमे पानी मे गिरने का डर बना रहता है. जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण न्यू कॉलोनी के इस हिस्से का पानी आगे बढ़ता नहीं दिख रहा है. जिससे लोगों की परेशानी कम होती नहीं दिख रही है. यदि इस मुहल्ले की सड़क को बीचोबीच काट दिया जाय तो पानी आगे खाली पड़े गड्ढ़े में आसानी से चला जायेगा. वर्ष 2016 और 2017 में इस मुहल्ले में भीषण जलजमाव हुआ था. मुहल्ले के लोगों ने आपसी सहयोग से पम्पसेट लगा पानी की निकासी की थी. बाद में जिला प्रशासन की ओर से भी पंप लगाए गए थे. लेकिन इस बार पहली लगातार बारिश में ही त्राहिमाम स्थिति होने के बाद भी जिला प्रशासन अब तक कोई सुधि नहीं ले रहा है. प्रशासन जलनिकासी की शीघ्र कोई व्यवस्था नहीं करती है तो यहां बीमारी फैलने की संभावना बढ़ जाएगी.
वार्डों से जल निकासी का नही बना है प्लान 
मौनसून आने से पूर्व जलजमाव वाले क्षेत्रों से पानी निकासी का इसबार भी कोई प्लान तैयर तक नहीं किया गया है. जिससे जलजमाव की स्थिति गंभीर होने का साफ संकेत मिल रहा है. जबकि मौनसून से पूर्व इसकी तैयारी होनी चाहिये थी. इससे पूर्व के वर्ष में शहरी क्षेत्र में जलजमाव की स्थिति से बचने के लिये तत्कालीन सदर एसडीएम सौरभ जोडवाल ने एहतियातिक कदम उठाया था जिससे शहर वासियों को काफी राहत मिली थी एवं शहर जलजमाव से बच गया था. सभी मुख्य सडक एवं मुहल्लों में बडे जलजमाव की स्थिति नहीं बनी थी. स्थानीय लोगों ने भी उनके सोच एवं कार्यों की प्रशंसा की थी. आज भी शहर को सिर्फ कच्चे नाले के सहारे ही शहर को जलजमाव से बचाया जा सकता है.

जलजमाव से हो रही परेशानी 
शहर के न्यु कालनी, गंगाजल, गौतम नगर, प्रशांत मोड़, तिवारी टोला, हटिया गाछी ढाला, कोशी चौक, चांदनी चौक, रिफ्यूजी कॉलोनी, नया बाजार सहित अन्य जगहों पर सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में जलजमाव होने से सुरक्षित घर तक पहुंचने कठिन हो गया है. मोहल्लों की हालत भी वर्षा के कारण काफी खराब है. हर घर नल का जल को लेकर मोहल्ले में खोदे गये गड्ढे इस वर्षा के कारण जानलेवा बन गये हैं. नल का जल के लिये पाइप बिछाने का काम किया गया था. इन सड़कों को पाइप बिछाने के बाद इसी तरह छोड़ दिया गया है जो इस वर्षा ने जानलेवा बन दिया है. मोहल्ले वासियों को घरों से निकलना मुश्किल हो रहा है.

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