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कटिहार के चिकित्सकों की राय,लू के लक्षण, बचाव एवं निदान के उपाय

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भीषण गर्मी एवं लू के प्रकोप ने पूरे बिहार को हिला कर रख दिया है। सूबे में लू से पिछले 24 घंटे में गया में 21, रोहतास में 14, औरंगाबाद में 9, समस्तीपुर में 7, नालंदा में 4, सारण एवं पटना में 2-2, मुंगेर में 5, पूर्वी चंपारण और कैंमूर में 2-2 लोगों की मौत हो गई है। लू से गैर सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक कम से कम 256 लोगों की मौत हो चुकी है।हालांकि मुख्य सचिव दीपक कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक 100 लोगों की मौत की बात कही है। भीषण गर्मी एवं लू के प्रकोप के कारण गया, मुजफ्फरपुर, कटिहार,सहरसा सहित कई अन्य जिलों में जिला प्रशासन ने लोगों के स्वास्थ्य के मद्देनजर तथा जान के बचाव हेतु ऐतिहासिक कदम उठाया है जिसके तहत उक्त जिलों में भा.दं.प्र.सं. की धारा 144 लगाकर पूर्वाहन 10:00 बजे से अपराहन 4:00 बजे तक मजदूरों से काम लेने पर पाबंदी लगा दी गई है। पटना समेत पूरे प्रदेश के सभी सरकारी, अर्ध सरकारी एवं निजी विद्यालयों एवं कोचिंग संस्थानों को आगामी 22 जून तक बंद रखने का आदेश दिया गया है। ऐसे में हम पत्रकारों का यह दायित्व हो जाता है कि लोगों को लू क्या है तथा इससे बचने तथा इसके निदान के कौन-कौन से उपाय हैं, यह जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा कर उन्हें सचेत किया जाए।
प्रस्तुत है चिकित्सकों से हमारे कोसी टाइम्स संवाददाता मुरली मनोहर घोष ने मुलाकात कर इस सन्दर्भ में विशेष जानकारी ली है।तो आइये पढ़ते हैं चिकित्सकों की राय- 

प्रसिद्ध एलोपैथिक वरीय चिकित्सक डॉक्टर राजीव नयन प्रसाद के अनुसार उत्तरी भारत में गर्मियों में उत्तर-पूर्व तथा पश्चिम से पूर्व दिशा में चलने वाली प्रचंड उष्ण तथा शुष्क हवाओं को “लू” (Heat stroke) कहते हैं।लू लगना गर्मी के मौसम की बीमारी है। लू लगने का मुख्य कारण शरीर में नमक और पानी की कमी होना है। पसीने के रूप में नमक और पानी का बड़ा हिस्सा शरीर से निकलकर खून की गर्मी को बढ़ा देता है जिससे भीषण गर्मी एवं धूप में घर से बाहर निकलने पर सहज ही लू लग जाती है।

“लू” लगने के लक्षण इस प्रकार हैं

सिर में भारीपन होने लगता है।नाड़ी की गति बढ़ने लगती है।खून की गति भी तेज हो जाती है।सांस की गति भी ठीक नहीं रहती।शरीर में ऐठन-सी लगती है।बुखार काफी बढ़ जाता है।हाथ और पैरों के तलवों में जलन-सी होती है।आंखें भी जलती है और इससे लू से आक्रांत रोगी अचानक बेहोश हो जाता है तथा रोग की गंभीर अवस्था में रोगी की मौत भी हो सकती है।

“लू” से बचने के उपाय के बारे में डॉक्टर राजीव नयन प्रसाद बताते  हैं कि लू से बचने के लिए भीषण गर्मी एवं तेज धूप में दोपहर के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। अगर बाहर ही जाना पड़े तो सिर व गर्दन को तौलिए से ढक लेना चाहिए या फिर छाते का प्रयोग करना चाहिए। गर्मी के दिनों में हल्का व शीघ्र पचने वाला भोजन करना चाहिए। बाहर जाते समय खाली पेट नहीं जाना चाहिए। मसालेदार, जंक एवं बासी खानपान से परहेज करना चाहिए। गर्मी के दिनों में अत्यधिक पानी पीते रहना चाहिए ताकि शरीर में जल की कमी न होने पाए। पानी में नींबू व नमक मिलाकर दिन में दो-तीन बार पीते रहने से लू नहीं लगती है। गर्मी के दौरान नरम एवं मुलायम सूती कपड़े पहनना चाहिए जिससे हवा और कपड़े शरीर के पसीने को सोखते रहते हैं। गर्मी के दिनों में कच्चे प्याज का सेवन भी अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक करना चाहिए एवं बाहर जाते समय कटे प्याज को जेब में रखना चाहिए।

“लू” लगने पर क्या करें इस संबंध में प्रसिद्ध होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ.शाहिद सिद्दीकी का कहना है कि लू लगने पर तुरंत योग्य डॉक्टर को दिखाना चाहिए। डॉक्टर को दिखाने से पूर्व कुछ घरेलू प्राथमिक उपचार करने पर भी लू के रोगी को कुछ राहत महसूस होती है। बुखार तेज होने पर रोगी के सिर में सूती कपड़े के पानी की पट्टी देने के साथ-साथ रोगी को ठंडी खुली हवा में आराम करवाना चाहिए। लू लगकर बुखार होने पर प्रारंभिक अवस्था में रोगी को एकोनाइट एवं बेलाडोना आधे-आधे घंटे के अंतराल पर 10-10 बूंद करके एक गिलास पानी में दिया जा सकता है।

तत्पश्चात किसी चिकित्सक की सलाह के अनुसार चिकित्सा की जानी चाहिए।रोगी को तुरंत प्याज का रस शहद में मिलाकर देना चाहिए।प्यास बुझाने के लिए सुराही के पानी के साथ नींबू के रस का सेवन करवाना चाहिए। लू के रोगी को बर्फ का पानी नहीं पिलाना चाहिए क्योंकि इससे लाभ के बजाय हानि हो सकती है।रोगी के शरीर को दिन में चार-पांच बार गीले तौलिए से पोछ्ना चाहिए।चाय-कॉफी आदि गर्म पेय का सेवन नहीं करने देना चाहिए।कैरी का पना विशेष लाभदायक होता है। कच्चे आम को गर्म राख पर मंद आंच वाले अंगारे में भूनकर ठंडा होने पर उसका गूदा निकालकर उसमें पानी मिलाकर मसलना चाहिए। इसमें जीरा, धनिया ,शक्कर, नमक ,कालीमिर्च डालकर पना बनाना चाहिए। पने को लू के रोगी को थोड़ी-थोड़ी देर में दिया जाना चाहिए।जौ का आटा व पिसा प्याज मिलाकर शरीर पर लेप करने से लू के रोगी को तुरंत राहत मिलता है।

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