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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा चमकी बुखार से मासूमों की मौत का मामला,सरकार पर लापरवाही का आरोप,मरनेवालों की संख्या हुई 112

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संजय कुमार सुमन@मुजफ्फरपुर 

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम एईएस यानी चमकी बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. इस जानलेवा बुखार ने 3 और मासूम बच्चों की जान ले ली है. इस तरह अब इससे मरनेवालों का आंकड़ा बढ़कर 112 हो गया है.मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मरने वालों बच्चों में 80 फीसदी बच्चियां हैं.  बिहार के मुजफ्फरपुर में समेत कई जिलों में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से हो रही बच्चों की मौत को लेकर बुधवार को पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी.यह जनहित याचिका वकील शिव कुमार त्रिपाठी ने दायर की है. याचिका में कहा गया है कि एक मेडिकल एक्सपर्ट की टीम का गठन किया जाए, जो चमकी बुखार फैलने के पीछे की वजह की जांच कर तीन महीनों के अंदर सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट सौंपे.

कोसी टाइम्स मुजफ्फरपुर बुखार याचिका में कहा गया है कि इंसेफ्लाइटिस को लेकर वर्ष 1998 में बनी डॉ जैकब कमेटी ने साल 2005 में अपनी रिपोर्ट केंद्र और राज्य सरकार को सौंपी थी. अगर उस रिपोर्ट को सरकार लागू करती, तो इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत नहीं होती. साथ ही रिपोर्ट को लागू करने और बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की भी मांग की गयी है.जनहित याचिका में कहा गया है कि मेडिकल एक्सपर्ट की टीम इस बात की भी जांच करे कि आखिर किसकी लापरवाही से 100 से ज्यादा बच्चों की जान गई है. याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और बिहार सरकार को आदेश दे कि चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों को तत्काल हर संभव मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों का उपचार मुफ्त कराया जाए. सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और बिहार सरकार को आदेश दे कि चमकी बुखार से प्रभावित जगहों पर तुरंत एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम और दवाइयां पहुंचाई जाएं.

 

बता दें, इससे पहले भी मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से बच्चों की लगातार हो रही मौत पर एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी. सुप्रीम कोर्ट में वकील मनोहर प्रताप और सनप्रीत सिंह की तरफ से दाखिल की गई इस याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट सरकार को 500 ICU का इंतजाम करने का आदेश दे. इसी के साथ ये भी अपील की गई है कि कोर्ट सरकार से 100 मोबाईल ICU को मुजफ्फरपुर भेजे जाने और पर्याप्त संख्या में डॉक्टर उपलब्ध कराने के आदेश दे. इस मामले में  सुनवाई 24 जून यानी सोमवार को होगी. दरअसल याचिकाकर्ता ने इस मामले में जल्द से जल्द सुनवाई की मांग की थी, हालांकि कोर्ट ने सुनवाई की तारीख 24 जून तय की है.

एईएस को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ,मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व अन्य के विरुद्ध कोर्ट में परिवाद 

एईएस से मर रहे बच्चों को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व अन्य के विरुद्ध मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) सूर्यकांत तिवारी के कोर्ट में परिवाद दाखिल किया गया है.यह परिवाद अधिवक्ता पंकज कुमार ने दाखिल किया है. इसमें राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार, बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआइसीएल) के प्रबंध निदेशक संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष, सिविल सर्जन डॉ.शैलेश प्रसाद सिंह व एसकेएमसीएच अधीक्षक डॉ.सुनील कुमार शाही को आरोपित बनाया है.

परिवाद में आरोप लगाया गया है कि सरकारी अस्पतालों में आपूर्ति की जाने वाली दवाएं केंद्रीय व राज्य प्रयोगशालाओं से जांच रिपोर्ट मिले बिना ही मरीजों को दी जाती हैं. सरकारी अस्पतालों में जेनरिक दवाओं की आपूर्ति की जाती है. इसकी पोटेंसी सामान्यत: छह माह होती है. जबकि, इसका उपयोग एक से दो साल तक किया जाता है.सूचना के अधिकार के तहत मांगी जानकारी में बीएमएसआइसीएल के लोक सूचना पदाधिकारी ने बताया है कि प्रबंध निदेशक की ओर से दवा की गुणवत्ता की जांच निजी जांच प्रयोगशाला में कराई जाती है. आरोप लगाया गया है कि यह आम लोगों के जीवन के लिए घातक है.

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