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बाल श्रम उन्मूलन दिवस के दिन भी मासूम बच्चे जूठे प्लेट धोते रहे

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मधेपुरा

 

बाल मजदूर उन्मूलन हेतु हर वर्ष 12 जून को बाल श्रम उन्मूलन दिवस मनाया जाता है लेकिन तमाम कोशिशे ,तमाम बन्धन मधेपुरा में फेल साबित है ।बुधवार को भी जब कोसी टाइम्स की कैमरा इस ओर खुली तो तमाम जगहों पर छोटे छोटे बच्चे कोई प्लेट धोते तो कोई झाड़ू लगाते मिले।

सभी कोशिशों के बावजूद देश में एक करोड़ से ज्‍यादा बच्‍चे बाल श्रम को मजबूर है।
बाल मजदूरी के खिलाफ जागरूकता फैलाने और 14 साल से कम उम्र के बच्‍चों को इस काम से निकालकर उन्‍हें शिक्षा दिलाने के उद्देश्‍य से इस दिवस की शुरुआत साल 2002 में ‘द इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन’ की ओर से की गई थी। बीते दिन मधेपुरा के विभागीय अधिकारी इस ओर छापेमारी भी किये कुछ बच्चे मुक्त भी करवाये गए लेकिन स्थिति जस के तस है।

जब हमने इस ओर उनके मालिक से बात किया तो किसी ने अपना बेटा बताया तो किसी ने यह कहके पल्ला झाड़ लिया लिया कि स्कूल जाता है अभी गर्मी का छुट्टी है इसलिए काम कर रहा है।लेकिन जब कैमरा से फ़ोटो लेना शुरू किया तो सभी नही तुरंत सबसे काम छुड़वा दिया और बाहर भगाने का कोशिश करने लगा।

 

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के संगठन बचपन बचाओ आंदोलन की रिपोर्ट कहती है कि भारत में लगभग सात से आठ करोड़ बच्चे अनिवार्य शिक्षा से वंचित हैं। इसी में अधिकांश बच्‍चे संगठित अपराध रैकेट (organised crime rackets) का शिकार होकर बाल मजदूरी के लिए मजबूर किए जाते हैं जबकि बाकी बच्‍चे गरीबी के कारण स्‍कूल का मुंह नहीं देख पाते।

आज इस ओर मुख्यमंत्री जी ने अपना शुभकामना संदेश दिया है और अपील किया है कि बच्चे से ऐसा नही करवाया जाए लेकिन शायद ये इतना से संभव नही है ।इस ओर अभिभावक को जागरूक और अधिकारी को कड़ा रूख अख्तियार करना पड़ेगा तब जाकर मासूमों की जिंदगी कुछ बेहतर हो सकती है।

 

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