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चौसा से मधेपुरा जाना हो रहा दूभर,उड़ रही धूल से लोगों का चलना हुआ मुश्किल,मौत को आमंत्रण देती है सड़क

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संजय कुमार सुमन@मधेपुरा 

राजकीय उच्च पथ 58 भटगामा-उदाकिशुनगंज और राष्ट्रीय उच्च पथ 106 मुख्य पथ के चौड़ीकरण और सड़क निर्माण का कार्य जारी है, लेकिन संवेदक की लापरवाही से सड़क पर उड़ रही धूल से लोगों का चलना मुश्किल हो गया है।सड़कों पर के  गड्ढे से तो राहगीर पहले ही परेशान हो रहे थे, अब उड़ती धूल का भी सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग पर जिला,अनुमंडल, प्रखंड समेत कई विभाग के मुख्य कार्यालय भी हैं। फिर भी संबंधित विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।  इनके अधिकारी-कर्मचारी इसी मार्ग से गुजरते हैं। उन्हें भी उड़ती धूल का सामना करना पड़ता है।पथ निर्माण विभाग द्वारा जगह-जगह भारी वाहनों के प्रतिबन्ध का बोर्ड लगाया है पर इस निर्देश को मानने के लिए कोई भी तैयार नही है। सड़क पर भारी वाहन भी गुजरते हैं। जबकि सड़क भारी लोड लेकर जा रही वाहन की क्षमता के अनुसार नहीं है। जिसे सड़क लगातार खराब हो रही है। साथ ही शहर के बीच से लगातार भारी वाहनों के गुजरने से धूल उड़ने लगती है। इस पथ पर धूल ही धूल नजर आता है। धूल उड़ने से चालकों को काफी खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। भारी वाहन के आवाजाही से परेशानी बढ़ जाती है। भारी वाहन के पीछे-पीछे चलने वाले छोटे-छोटे वाहन खासकर ऑटो, बाइक चालकों खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। बाइक चालक को सड़क पर उड़ रही धूल आंखों के सामने ओझल कर देती है। इससे अक्सर दुर्घटना होती रहती है। छोटे वाहन चालकों को दिन में भी लाईट जला कर चलना पड़ता है।

इस रास्ते पर वाहनों के आने जाने से मिट्टी पिस-पिस कर बारीक हो गई। अब जैसे ही कोई वाहन मार्ग से गुजरता है तो मिट्टी का गुब्बार बन जाता है तथा पूरा वातावरण धूलमय हो जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र के कई दुकानदार खांसी, एलर्जी एवं दमे से ग्रसित हो रहे हैं। भारी वाहन गुजरते समय तो दुकानदारों को अपनी दुकान के शटर बंद करने पड़ते हैं।धूल के गुबार से दो-चार होना पड़ रहा है।यात्रियों के अलावा अन्य लोगों को भी वाहन के शीशे बंद कर आवाजाही करनी पड़ रही है। गर्मियों के मौसम में इससे यात्रियों की और अधिक फजीहत हो रही है। इन  सड़क पर धूल उड़ती रहती है। सांस लेना मुश्किल है।

क्या कहते हैं आमलोग

लौआलगान निवासी जीवन शर्मा कहते हैं कि ठेकेदार की लापरवाही के चलते सड़क किनारे बसे गांव के लोग और राहगीर इन दिनों मार्ग में उड़ने वाली धूल के गुबार से परेशान है। जिससे बीमारी होने का अंदेशा बना रहता है। निर्माणाधीन मार्ग में ठेकेदार द्वारा पानी नहीं डाला जाता। जिसके चलते इस मार्ग में आने जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसका लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। साथ ही इस मार्ग पर चलने वाले लोगों के चेहरे व कपड़े भी गंदे हो जाते हैं।संबंधित विभाग को चाहिए की वह जहाँ-जहाँ धूल अधिक उड़ती है वहाँ पर पानी का छिड़काव करे। ताकि लोगों को राहत मिल सके।

 

सीएसपी सेन्टर के संचालक मनजीत प्रकाश कहते हैं कि लगातार धूल उड़ने के कारण वे हमेशा रूमाल बाँधकर अपना व्यवसाय करते हैं।दिनभर धूल के उठते गुब्बार से अनेक लोग दमा, खांसी की बीमारी के शिकार बन रहे हैं। हालत यह है कि जब भी कोई भारी वाहन आता है तो उपभोक्ताओं को मुह छुपाना पड़ता है और वे सेन्टर के अंदर प्रवेश करने लगते हैं या फिर धूल के गुब्बार से बचने के लिए अपनी सेन्टर का शटर गिराना करना पड़ता है। शासन को चाहिए की इस समस्या पर तत्काल ध्यान दे।

लोजपा नेता मनौवर हुसैन कहते हैं कि एसएच 58 मार्ग का नवीनीकरण और चौड़ीकरण कार्य चल रहा है। सड़क चौड़ीकरण के लिए पुरानी सड़क के दोनों साइड मुरूम मिट्टी डालने का कार्य प्रगति पर है। साथ ही साथ मार्ग में जीरा गिट्टी डालने का कार्य भी चल रहा है, लेकिन निर्माण एजेंसी द्वारा मार्ग में  पानी नहीं डालने के कारण साइकिल, मोटर साइकिल सवार के अलावा अन्य राहगीर सड़क में उड़ने वाली धूल से परेशान है। जिसका लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। सड़क किनारे बसे गांव में कुछ लोगों के किराना दुकान व पान ठेला होटल के अलावा अन्य व्यवसाय कर लोगों को परेशानी हो रही है, लेकिन भारी वाहनों के आने जाने से उड़ती धूल के कारण उनके दुकान का सामान भी खराब हो जाता है। जिसके चलते दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

चिकित्सक डॉ.राजेश रंजन ने बताया कि धूल से साँस संबंधी बीमारी होने की संभवना होती है। धूल से लगातार सांस के मरीज बढ़ रहे हैं। धूल की एलर्जी से अस्थमा के मरीजों को ज्यादा परेशानी है। बच्चों व अन्य लोग भी सर्दी जुकाम से पीड़ित हैं।धूल फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है। धूल के फेफड़े में जाने से दमघोंटू रोग होते हैं। दमा सहित अन्य रोग भी धूल से होते हैं। उन्होंने इससे बचने के लिए मास्क या नाक पर रुमाल बाँधना चाहिए। साँस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

चौसा पश्चिमी के पूर्व मुखिया प्रत्याशी पूनम देवी, समाजसेवी संजय यादव, राजकिशोर पासवान समेत दर्जनों ग्रामीणों ने चौसा बीडीओ, सीओ और थानाध्यक्ष को आवेदन देते हुए कहा कि निर्माणाधीन एसएच- 58 पर वाहनों के परिचालन से धूल की उड़ती आंधी का नजारा बना रहता है। इससे ग्रामीणों को गंभीर बीमारियों का डर बना रहता है। उन्होंने कहा कि तत्काल निदान के लिए सड़क पर पानी का छिड़काव किया जाए, ताकि धूल की परेशानी उत्पन्न नहीं हो।गर्मी के दिनों में धूल और भी ज्यादा उड़ती है ।उड़ती धूल के कारण वाहन चलाने में काफी परेशानी होती है। एक्सीडेंट होने का खतरा बना रहता है। प्रशासन को इस पर पहल करनी चाहिए।हमलोगों ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी दी है। पर हर बार कि तरह आश्वासन देकर हमलोगों को लौटा दिया जाता है। अगर इस मार्ग पर उड़ते धूल की समस्या के निजात नहीं दिलाया गया तो जनांदोलन किया जाएगा।

उदाकिशुनगंज से मधेपुरा सड़क की स्थिती भी ठीक नहीं है इस राजमार्ग पर चलते हुए  पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ए पी साही को रेगिस्तान पर चलने का एहसास हुआ। मुख्य न्यायाधीश साही ने कोर्ट में बताया कि जब वो कोसी इलाके के जिलों में निरीक्षण के सम्बंध में गये थे तब मधेपुरा से उदाकिशुनगंज के बीच की 35 किलोमीटर की दूरी तय करने में उन्हें दो घंटे लग गए। उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए लिखा कि महसूस हुआ कि सड़क नहीं है बल्कि वैतरणी पार कर रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश साही ने कहा कि यह काफी दयनीय स्थिति है जो लोगों को परेशान करती है। चारों तरफ धूल ही धूल थी। बच्चों से लेकर बड़े तक, सभी अपने नाक और मुंह पर कपड़ा लेकर चल रहे थे।मुख्य न्यायाधीश एपी साही ने वहां मौजूद एक स्थानीय इंजीनियर से निर्माण कार्य में हो रही देरी के बारे में पूछा तो उसने बताया कि जिस कंपनी को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी वह एक साल पहले ही काम छोड़कर चली गई थी।इंजीनियर के मुताबिक इस सड़क का निर्माण कार्य साल दिसंबर 2016 में फेस नाम की कंपनी को दिया गया था। जिसे तीन साल में पूरा करना था, लेकिन वह काम बीच में ही छोड़कर चला गया।

देखें वीडयो 

राष्ट्रीय उच्च पथ 106 उदाकिशुनगंज से मधेपुरा व एसएच 58 भटगामा से उदाकिशुनगंज सड़क की हालत दयनीय https://youtu.be/lZUCVFeto-A

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