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रोड लाइट में पढ़ाकर बच्चों का भविष्य गढ़ रहे है मधेपुरा के अमन कुमार

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प्रशांत कुमार । कोसी टाइम्स

 

माना अन्धेरा घना है पर दिया जलाना कहाँ मना है …

उक्त पंक्ति को चरितार्थ कर रहे है बिहार के मधेपुरा जिला के वार्ड न 25 निवासी शिक्षक अमन कुमार अमर ।शिक्षक अमन कुमार पिछले दस वर्षों से अपने दरवाजे पर सडक किनारे लगे हाई मास्क लाइट के नीचे बच्चों को पढ़ाते है .यहाँ पहली कक्षा से दसवी तक के बच्चे पढने आते है और प्रतिदिन सन्धा से नौ बजे तक पढ़ते है।यहाँ न जात का ना किसी धर्म का भेदभाव है सभी धर्म ,सभी जाती के बच्चे यहाँ आते है और पढ़ते है बड़े बड़े सपने को पूरा करने हेतु जी तोड़ मेहनत करते है।

अपने इस सफर के बारे में शिक्षक अमन कुमार ने कोसी टाइम्स से बातचीत करते हुए बताया कि सात बच्चे से शुरू होकर आज ये पचास बच्चों तक का सफर चल रहा है.अपनी इच्छा के बारे में बताते हुए कहा कि मेरी तो चाहत है पुरे इलाके के बच्चे आये वो पढ़े और अपनी मंजिल को पाए।रोड लाइट के नीचे पढ़ाने के पीछे की कहानी के बारे में उन्होंने बताया कि आज बिहार तेजी से विकास हो रहा है ऐसे में मधेपुरा जैसे शहर को भी बीस से बाईस घंटे बिजली मिल पाती है और शाम के समय यह लाइट इस दरवाजे पर खूब अच्छे से आ पाती है ,सभी के घर उचित संसाधन नही है और हर किसी के घार जाकर पढ़ाना थोडा मुश्किल है तो यहाँ ही सबको बुलाकर पढाता हूँ।

उन्होंने कहा कि बिहार तेजी से विकास कर रहा है इसी के नतीजा है कि बीस से बाईस घंटे बिजली मिल पाती है नही तो आज भी लालटेन डिबिया में ही पढ़ते।उन्होंने कहा जब विधुत की स्थिति शहर में उतनी अच्छी नही थी तब वो डिबिया में पढ़ाते थे।एक सवाल कि पढ़ाने के दौरान जब लाइट कट जाती है तो क्या बच्चे की पढाई बंद हो जाती तो उन्होंने इसके पीछे की भी कहानी बताया। बताते हुए कहा लाइट काटने के बाद भी बच्चे की पढाई रूकती नही है ,अभी पढ़ाने के दौरान जब अचानक कभी लाइट कट जाती है तो बच्चे से सामान्य ज्ञान के प्रश्न पूछे जाते है ,बच्चे से गिनती ,पहाड़ा ,इंग्लिश बोलने आदि का प्रयास कराया जाता है।जब पुनः लाइट आ जाता है तो फिर पढाई अपने नियत समय तक जारी रहता है।

 

कौन है अमन कुमार अमर

शिक्षक अमन कुमार अमर मधेपुरा वार्ड न 25 के स्थानीय निवासी है ।पिता जनार्दन तांती फौजी थे।प्राथमिक शिक्षा जिला मुख्यालय से प्राप्त करते हुए इन्होने 12 वी की शिक्षा पार्वती विज्ञान महाविद्यालय से लिया ।आगे स्नातक की पढाई इन्होने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के  KNIPSS से किया । स्नातक में इन्होने बॉटनी को लेकर पढ़ाई किया।इस बीच तैयारी के लिए ये लखनऊ भी गये जहाँ इन्होने मेडिकल के प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी किये ।अभी अमन कुमार जी उच्च विद्यालय बडगांव में शिक्षक के रूप में पदस्थापित है।

 

अपने इस समाजसेवा के बारे में बताते हुए इन्होने कहा कि उनका बचपन का सपना था कि पढ़ लिखकर डॉक्टर बने लेकिन आर्थिक तंगी के वजह से मेडिकल नही कर पाए ।उसी दिन ये प्रण लिया किया अपने स्तर से जितना हो पाएगा मैं बच्चों के लिए करूँगा और उन्हें पढ़ूंगा जहाँ पैसे की कोई बाध्यता नही होगी.तैयारी के दौरान लखनऊ में उन्होंने देखा था कि एक प्रदीप कुमार पाण्डेय नामक शिक्षक प्रतिदिन ऐसे ही बच्चों को पढ़ाते है. वहां से देखकर शिक्षक अमन को और भी बल मिला और आज रोड लाइट के नीचे बच्चों को पढ़ाकर छोटे घर से बड़े सपने देखने और पूरा करने में मदद कर रहे है.

एक सवाल कि संसाधन नही था और अभी भी नही है आप नीचे बोरा पर बच्चे को बैठकर पढ़ाते है क्यों करते है क्या लाभ है इससे ? के जबाब में उन्होंने कहा हालात के आगे झुकने से नही हालात को ही अपने जिंदगी का पहिया बना आगे बढ़ने से सब कुछ होता है और हमे अगर आगे जाने है ,देश को आगे बढाना है तो हमे अच्छी शिक्षा चाहिए ही उसी को पूरा करने के लिए हम ये कर रहे है और जब तक सामर्थवान रहूँगा ऐसे ही पढाता रहूँगा ।

पढ़ रहे बच्चे से जब कोसी टाइम्स ने सवाल किया कि सर कैसे पढ़ाते है तो बेबाकी से कह डाला कि ऐसे सर है जो आजतक हम देखे ही नही है।बिना किसी लोभ के सब दिन रविवार ,होली ,रमजान सब में नियमित पढ़ाते है।मारते भी है के सवाल पर कहा भक्क मारते कहाँ वो तो बस दिखावा है सर तो दुलार से ही सब तीन घंटा पढ़ा लेते है हमलोग भी जतन से पढ़ते है ।क्या बनना है पढके के सवाल पर कहा हमको तो डॉक्टर बनना है इसलिए अभी से विज्ञान की दो दो किताब पढ़ रहे है।दूसरी किताब के बारे में बताया कि सुगम विज्ञान है जहाँ दिक्कत होता है सर बताते है।

स्थानीय ग्रामीण से जब इस बारे में पूछा गया तो बताया ये शिक्षक ही असली शिक्षक है जहाँ न जात न धर्म न रूपये पैसे की बाध्यता है ।उन्होंने कहा मेरे चार बच्चे यहाँ पढ़ते है लगता है नही कि मेरा बच्चा किसी से कम है ।पैसा कितना लेते है सर तो बताया कोई बाध्यता नही है जब मन होता है कुछ दे देते है ।हम पिछली बार कब दिए थे याद नही है।

शिक्षक अमन कुमार अमर के इस सेवा को सराहते हुए मोनी सिंह ने कहा कि जहां हर ओर शिक्षक अपने मानदेय के लिए लड़ रहे है हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट कर रहे है ऐसे में एक आदर्श शिक्षक के रूप में अमन कुमार जी मिसाल है।इनसे अन्य शिक्षकों को भी सीख लेना चाहिए इससे राष्ट्र निर्माण में सहयोग मिलेगा।

 

निश्चित ही शिक्षक अमन कुमार अमर हर किसी के लिए मिसाल है।इनके द्वारा किये जा रहे कार्य अनुकरणीय है,अतुल्नीय है ।आज हालात के आगे शिक्षक को रोता देखा जा सकता है लेकिन अमन कुमार कहते है हालात के आगे झुकने से क्या होना है हालात को बदल कर उसे हमे अपना सहारा बनाकर काम करना होगा ।शिक्षक अमन कुमार जी की ये आत्मविश्वास वाली बातें ही निश्चित इससे ऊर्जा देती होगी और शायद यहीं ऊर्जा इसे आज इतना कुछ करने के लिए आगे धकेलती है और बच्चे को बड़े सपने दिखाने और पूरा करने के लिए मेहनत करने को आगे बढाते है।

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