Home » Others » सफलता के लिए टीम वर्क होना बहुत जरूरी

सफलता के लिए टीम वर्क होना बहुत जरूरी

Advertisements

संजय कुमार सुमन 

sk.suman379@gmail.com 

दोस्तों,आज हम बात करेंगे सफल टीम के बारे में  ।हम सभी जानते हैं सफलता के लिए टीम वर्क होना बहुत जरूरी है लेकिन सफल टीम तैयार करना हर किसी के बस की बात नहीं है। सफल टीम तैयार करना एक कला है लेकिन पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि टीम है क्या? टीम उत्साहित लोगों का एक समूह है जो एक कॉमन गोल के लिए काम करते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है टुगेदर एवरीवन एचीव मोर (together everyone achieve more)। सफल होने के लिए टीमवर्क बहुत जरूरी है। आज हम चाहे फैमिली में देखें किसी और आर्गेनाईजेशन में देखें या सोसाइटी में देखें ।कहीं ना कहीं हम एक टीम के रूप में काम कर रहे होते हैं लेकिन सबकी सक्सेस एक अच्छी और सफल टीम पर ही निर्भर करती है।मौजूदा परिस्थिति में किताबी कीड़ा बनकर या डिग्रियों का ढेर लगाकर सफलता की कामना नहीं की जा सकती है। अपने अंदर झांककर अपनी प्रतिभा को टटोलें कि किन क्षेत्रों में आप अपनी दक्षता को विकसित कर बाजी  मार सकते हैं। जो क्षेत्र आपको सर्वाधिक उपयुक्त लगे, उसमें विशेषज्ञों की सलाह लेकर अपना कौशल बढ़ाएं।जीवन के कुरुक्षेत्र में आधी लड़ाई तो आत्मविश्वास द्वारा ही लड़ी जाती है। यदि योग्यता के साथ आत्मविश्वास जुड़ जाए तो करियर के कुरुक्षेत्र में आपको कोई पराजित नहीं कर पाएगा। अध्ययन के साथ-साथ उन गतिविधियों में भी हिस्सा लें, जिनसे आपका आत्मविश्वास बढ़े।आपका संघर्ष, आपकी परेशानी नितांत निजी मामला है। इसका असर दूसरों के साथ अपने व्यवहार में न आने दें। जो सभी के साथ  मिलकर काम करना सीख लेता है वह  पीछे मुड़क़र नहीं देखता, क्योंकि टीमवर्क के रूप में कार्य करना ही  मैनेजमेंट का मूलमंत्र है।

अकेली लकड़ी असानी से तोड़ी या काटी जा सकती है, लेकिन वहीं जब यह लकड़ियां एक साथ हो तो इन्हें काटना बहुत मुश्किल होता है। यही कहावत हमारी वर्कप्लेस पर भी लागू होती है। क्योंकि कभी भी अकेले आगे नहीं बढ़ा जा सकता, सब साथ में ही बढ़ते है।फिर चाहे देश हो, या फिर समाज से लेकर संस्थान तक में टीम भावना से ही आगे बढ़ा जा सकता है। करइसलिए टीम का हिस्सा बन कर ही काम करें। किसी संस्था या कंपनी में अलग-अलग परिवेश से आए लोगों के साथ काम करते है। ऐसी में मनमुटाव के बजाएं एक दूसरे से सीखने कि कोशिश करनी चाहिए। ऐसे नहीं होने पर न तो पूरी क्षमता से कंपनी विकास कर पाती है और न व्यक्ति विशेष को ही कोई लाभ मिल पाता है।

कछुआ और खरगोश की कहानी हम बचपन से ही सुनते आ रहे हैं। आइये आज हम आपको इस कहानी का नया version सुनाते हैं। इस नई कहानी में आप जानेंगे कि कैसे team work से अपने goals को आराम से achieve किया जा सकता है। तो चलिए कछुआ और खरगोश की कहानी से समझने की कोशिश करते हैं कि Team work, कैसे एक team को एक-दूसरे की मदद करते हुए मंज़िल तक पहुँचा सकता है। एक बार एक कछुए और खरगोश में शर्त लगी कि उनमे से कौन तेज है? खरगोश ने कहा, “वो तेज है।” तो कछुआ कहने लगा, “नहीं-नहीं, तुम नहीं, मैं ज्यादा तेज हूँ।” इस argument को खत्म करने के लिए कछुए और खरगोश ने आपस में एक race करने का decide किया। इसके लिए उन्होंने day, time और route fix किया। तय दिन और समय पर दोनों race की जगह पर पहुँच गए और race शुरू कर दी।खरगोश बहुत ही तेज दोडा और थोड़ी ही देर में कछुए से बहुत आगे निकल गया। उसने पीछे मुड कर देखा तो दूर-दूर तक कहीं भी कछुआ नज़र नहीं आ रहा था। उसने सोचा कछुआ तो मुझसे इतना पीछे है कि मैं एक झपकी भी ले लूँ तो भी वो मुझे पकड़ नहीं पायेगा। यह सोच कर वो एक पेड़ के नीचे बैठ गया और जल्दी ही उसे नींद आ गयी। कछुआ बिना रुके धीरे-धीरे चलता ही रहा और कुछ देर में वो खरगोश तक पहुँच गया। उसने देखा खरगोश सो रहा है, पर उसको देखकर भी कछुए के मन में आराम करने का कोई ख्याल नहीं आया और वो धीरे-धीरे चलते हुए finish line तक पहुँच गया। खरगोश की जब आँख खुली तो वो तेजी से दोड़ता हुआ finish line पर पहुँचा और देखा कछुआ वहां पहले ही पहुँच कर race जीत चुका है।खरगोश अपनी हार से बहुत दुखी हुआ और उसने अपनी हार के कारण ढूंढे तो महसूस किया कि वो अपने overconfidence और carelessness की वजह से हारा अगर उसने मेहनत का सही महत्व समझा होता, taken for granted नहीं लिया होता तो ऐसा कोई कारण नहीं था कि कछुआ उसे race हरा देता। इसलिए उसने कछुए को फिर से race के लिए challenge किया। कछुआ राज़ी हो गया। इस बार खरगोश ने कोई गलती नहीं की। वो तेज और लगातार दौड़ता हुआ कछुए से बहुत पहले ही finish line पर पहुँच गया और race जीत ली।

अब ये race हारने के बाद कछुए ने सोचना शुरू किया। उसने realise किया कि current format में वो चाहे कितनी भी कोशिश और मेहनत करे, पर खरगोश को race में नहीं हरा सकता। कछुए ने काफी सोच-विचार के बाद खरगोश को race के लिए फिर से challenge करने का निश्चय किया। वो खरगोश के पास गया और बोला, क्या हम फिर से race करें पर इस बार route दूसरा होगा? खरगोश राजी हो गया।

उन्होंने अपनी race शुरू की। खरगोश अपनी जीत के पक्के इरादे के साथ consistently तेज दौड़ता ही जा रहा था। लेकिन थोड़ी दूर ही जाकर उसको रूकना पड़ा क्योंकि उसके सामने एक लम्बी-चौड़ी नदी थी और finish line नदी के उस पार। खरगोश किनारे पर बैठकर सोचने लगा कि आखिर इस नदी को कैसे पार करे? इसी बीच कछुआ वहां पहुँच गया। उसने बड़ी आसानी से नदी पार कर ली और finish line पर पहुँच कर race जीत ली।

ये story अभी खत्म नहीं हुई है। इतनी race साथ में करने के बाद अब कछुए और खरगोश में अच्छी दोस्ती हो गई। दोनों ने अपनी last race के बारे में बात की और महसूस किया कि यह और बेहतर हो सकती थी। इसलिए उन्होंने decide किया कि वो last race फिर से दौड़ेंगे पर इस बार एक team बनकर।

उन्होंने फिर से race शुरू की और इस बार नदी के किनारे तक खरगोश कछुए को अपनी पीठ पर बैठा कर दौड़ा और जब नदी आई तो कछुए ने खरगोश को अपनी पीठ पर बैठाकर नदी पार करायी। नदी के दूसरे किनारे पर खरगोश ने फिर से कछुए को अपनी पीठ पर बैठाया और finish line पर दोनों साथ में पहुंचे। इस बार दोनों को एक अलग ही satisfaction महसूस हुआ जो अब से पहले तक किसी भी race में नहीं हुआ था।हमारी life में भी हमें यही करना चाहिए। जब भी किसी failure से सामना हो तो अगली बार ज्यादा प्रयास और मेहनत करें और जब महसूस हो कि भरपूर मेहनत के बाद भी सफ़लता नहीं मिल रही तो अपनी strategy बदल दें। और फिर जी-जान से अपने प्रयासों को सफल करने में लग जायें।

अमरीकी उद्यमी एंड्रयू कार्नेगी के अनुसार, एक साझा उद्देश्य के लिए साथ काम करने की प्रक्रिया ही टीम वर्क है। साथ ही यह व्यक्तियों को संगठनात्मक लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करने का नाम भी है। ऐसे समय में जब संस्थाएं वैश्विक स्वरूप धारण कर रही हैं, विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए टीम भावना से काम करना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। यह वह ऊर्जा है, जो सामान्य व्यक्ति को विशिष्ट लक्ष्य हासिल करने  के काबिल बना देती है।आप टीम में एक सदस्य के तौर पर काम कर रहे हैं या फिर उसके लीडर हैं, नकारात्मक सोच किसी भी रूप में काम में बाधा पहुंचाती है। टीम के कार्यों पर विपरीत असर डाल सकने वाली ईष्र्या या द्वेषपूर्ण बातों से दूर रहें। टीम वर्क से कोई भी काम कम वक्त में पूरा हो जाता है। जब कई लोग किसी एक समस्या का समाधान ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं तो बेहतर विचार सामने आते हैं। इनमें सबसे बढ़िया विचार के आधार पर योजना बना कर उसे अंजाम दिया जा सकता है। टीम वर्क में गलती की संभावनाएं कम होती हैं, क्योंकि एक व्यक्ति का काम दूसरे से जुड़ा होता है, इसलिए प्रत्येक स्तर पर काम की जांच होती रहती है।

जब आप समूह में कार्य करते हैं तो आपको अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के फेर से ऊपर उठकर कार्य की सफलता के हित में अपने अहम की तिलांजलि देकर नेतृत्व के निर्देश को खुले मन से स्वीकारना होगा।एक व्यक्ति के रूप में आप भले ही बेहद बुद्धिमान, कुशाग्र व कार्य कुशल हों लेकिन जब तक आप सामूहिक (Collective) कार्य का कौशल नहीं अपनाएँगे आपकी सार्थकता के समक्ष प्रश्न चिह्न लगा रहेगा।परिवार में सबकी रुचि, प्रतिभा, बुद्धि अलग-अलग होती है व उसे उन सबके साथ सामंजस्य बनाकर सबको साथ लेकर परिवार को प्रगति के पथ पर आगे और आगे ले जाना होता है। यही बात शत प्रतिशत समूह के मामले में भी लागू होती है। जब तक उनमें आपसी प्रेम, सद्भाव व सहयोग का वातावरण निर्मित नहीं होगा, न तो वे एक सूत्र में बंध पाएंगे और न ही आगे बढ़ सकेंगे। सारे सदस्य बिखरे हुए मोती के सदृश्य हैं, धागा बनकर सबको एक सूत्र में बांधने की क्षमता व सामर्थ्य नेतृत्व को स्वयं में पैदा करने का जज्बा व इच्छा शक्ति होना ही चाहिए। जिन खोजा तिन पाइयां-यही नेतृत्व का मूल मंत्र है। बगैर बुद्धि, परिश्रम, धैर्य व प्रेम के लक्ष्य प्राप्ति दुरूह है।

Comments

comments

Advertisements
x

Check Also

मधेपुरा:अपहरण के नौवें दिन आशीष की पोखर में मिली सिरकटी लाश, पुलिस के लापरवाही के कारण हुई मौत

**पुलिस पर परिजनों ने एक विशेष समुदाय के अपराधी को संरक्षण देने आरोप **डीएसपी और एसपी के तबादले की हुई ...