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तुम दीपक की तेज रोशनी और मैं जलता बाती हूँ ,साहित्य में आज पढ़िए प्रिंस की कविता

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तुझको सोचूँ , तुझको देखूँ
खुद में तुझको पा भी लूँ
तेरे बोल के सातों स्वर को
खुद हीं में मैं गा भी लूँ
सुख और दुख दोनों हैं तुझमें
मैं सुख-दुख का साथी हूँ
तुम दीपक की तेज रोशनी
और मैं जलता बाती हूँ ।

तुम फूलों की नाजुक कलियाँ
मैं भंवरा हूँ मतवाला
मय सा तुझमें नशा भरा है
मैं मयखाने का प्याला
तुझमें प्यार की बातें भरी हैं
और मैं प्रेम का पाती हूँ
तुम दीपक की तेज रोशनी
और मैं जलता बाती हूँ ।

तुम स्वप्नों की राजकुमारी
मैं नींदों का राजकुँवर
तुम ख्वाबों की बड़ी इमारत
और मैं, छोटा सा एक घर
तुम पूनम के रात की चाँदनी
और मैं कृष्णा का राती हूँ
तुम दीपक की तेज रोशनी
और मैं जलता बाती हूँ ।

तुम बंशी की मीठी तानें
और मैं हूँ बंशीवाला
तुम राधा सी भोली सूरत
मैं मोहन सा बृजवाला
तुम मीरा सी श्याम दीवानी
मैं भी सूर का जाती हूँ
तुम दीपक की तेज रोशनी
और मैं जलता बाती हूँ ।
तुम दीपक की तेज रोशनी
और मैं जलता बाती हूँ ।

 

 

प्रिंस राज ‘ओम

पटना,बिहार

 

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