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मधेपुरा : मदर्स डे पर किया सराहनीय पहल, शहर में हो रही है तारीफ

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रविकांत कुमार

कोसी टाइम्स @ न्यूज डेस्क ।

विश्व मातृ दिवस पर जहाँ लोगो ने सुबह से ही अपनी अपनी माँ के साथ सेल्फी के साथ माँ के सम्मान में स्लोगन लिख कर एक दूसरे को ज्ञान बांट रहे थे वही आज मधेपुरा जिले के मुरलीगंज स्थित बीआर ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल के निदेशक मानव सिंह ने एक माँ से उनकी नन्ही सी बेटी की पूरी पढ़ाई के खर्चे उठाकर उनके बोझ को हल्का करने का प्रयास किया ।

दरअशल जिले के मुरलीगंज झिलचौक वार्ड नंबर 8 निवासी स्वर्गीय मनोज शाह की पत्नी कंचन देवी के घर पहुंचकर उनके करीब 5 वर्षीय पुत्री के पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी लेने की बात कही और कंचन देवी से आग्रह किया कि वे इस बात के लिए उन्हें अनुमति दें और बच्ची का फ्री नामांकन उनके विद्यालय बीआर ऑक्सफ़ोर्ड पब्लिक स्कूल में करवा कर उन्हें उनकी जवाबदेही पूरा करने की अनुमति दें । इतना सुनते ही कंचन देवी की चेहरे पर मुस्कान तो आई किंतु आंखों में खुशी के आंसू भी आ गए कंचन देवी ने बताया कि यह उनके लिए बड़े ही सौभाग्य की बात है कि उनके घर खुद विद्यालय निदेशक चलकर आए हैं और हमारी बेटी की पढ़ाई के सभी खर्चे उठाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जीवन भर हम इनका आभारी रहेंगे ।

विद्यालय निदेशक मानव सिंह ने बताया कि मुझे जानकारी मिली कि बिन पिता के एक बच्चे और बिन पति की पत्नी अपने बाल बच्चों की किस तरह से हिम्मत कर कर देखभाल और लालन पालन कर रही है निश्चित जिस तरह से कंचन ने अपने मेहनत के बल अपने बच्चों को शिक्षा दीक्षा दे रही है वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि स्कूल में नामांकन, ट्यूशन, स्कूल ड्रेस, किताब कॉपी सहित अन्य सभी खर्च विद्यालय निर्वाहन करेगी। हर रोज बच्ची को विद्यालय ले जाने और छोड़ने के लिए स्कूल वेन की भी सुविधा बिल्कुल मुफ्त में उपलब्ध करवाई जाएगी ।

गौरतलब हो कि झिलचौक रहिका टोला में आयरन लेडी के नाम से मसूर हो चुकी कंचन देवी के पति मनोज शाह शराब की लत में फसने के बाद लगातार बीमार चल रहे थे, जिसके बाद उनकी मौत हो गयी । पति के मौत के बाद परिवार की परवरिश और गोद मे नन्ही सी दुधमुंही बच्ची और दो बेटे सहित परिवार की लालन पालन का पहाड़ टूट पड़ा । किन्तु कंचन ने हिम्मत जुटाकर एक छोटी सी चाय की दुकान खोल ली।दुकान चलाकर अपने तीन बच्चे सहित सास ससुर और पूरे परिवार का भरण पोषण कर रही है । चाय की दुकान चलाकर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दीक्षा देने की चाहत में कंचन जद्दोजहद कर रही है और उन्होंने अपने मेहनत के बल पर अपने दो बेटे को स्थानीय एक अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय में पढ़ा रही है और वह चाहती है कि बेटे की तरह  वह अपनी बेटी को भी अच्छी से अच्छी तालीम दे। हालांकि पति के शराब के दलदल में फसने और उनकी मौत के बाद दुधमुँहे बच्ची और परिवार की परवरिश के लिए दुखो का पहाड़ टूटने के बाद भी कंचन ने हिम्मत नही हारी और अपने मेहनत के बल पर चाय वाली आयरन लेडी कहलाने लगी ।

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