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बदलें खुद की नकारात्क सोच को

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संजय कुमार सुमन 

sk.suman379@gmail.com 

 

“कश्तियाँ बदलने की जरुरत नहीं दिशा को बदलो तो…..

किनारे खुद पे खुद बदल जाते है”

दोस्तों,आज मैं आपके साथ एक बड़ी ही interesting और important बात share कर रहा हूँ ।एक ऐसी छोटी सी बात जिसने मेरे thought process को improve करने और positive बनाने में बहुत मदद की है।मुझे पूरी उम्मीद है कि ये आपके लिए भी उतना ही लाभदायक होगा। ऐसा मैं इसलिए भी कह पा रहा हूँ कि क्योंकि इसे समझना बहुत ही simple है और इसे practically apply करना भी आसान है।अगर आपको अपनी लाइफ बदलनी है तो इसका आसान सा रास्ता है की पहले आपको खुद को बदलना होगा। हम लोग करते क्या है?हम हमेशा बाहरी चीजो को बदलने की सोचते है।हम बहाने ढूंढते है।अपने किसी काम में फ़ैल होने पर दुसरे व्यक्ति को दोष दे देते है। ऐसा करने पर हम खुद के पैर पर ही कुल्हाड़ी मारते है।जब तक हम बाहरी चीजो को छोड़कर खुद को बदलने की नहीं सोचेंगे।हमारी लाइफ कभी बदल नहीं सकती।इसलिए जरूरत है पहले अपनी सोच को बदले।अपनी सोच बदले कभी भी सफलता नहीं पाई जा सकती है।किसी दूसरे व्यक्ति के व्यवहार या सोच को बदलने के लिए कोई जादू की छड़ी नहीं है, इसलिए जब आप यह कहते हैं कि काश उस ने ऐसा न किया होता या मुझे यकीन नहीं होता कि वह ऐसा कर सकता है तो यह कहने से पहले अपने विचारों पर अंकुश लगा कर कुछ पल ठहरें और दूसरे के नजरिए से उस के व्यवहार को परखें। तब आप स्वयं ही किसी के व्यवहार या सोच के बारे में निर्णय लेना बंद कर देंगे ।जिस दिन आप दूसरों के नजरिए का फैसला करना छोड़ अपनी सोच के बारे में निर्धारण करना शुरू कर देंगे उसी दिन से दुनिया आप के लिए बदली हुई और खूबसूरत हो जाएगी।

आपको सुनकर आश्चर्य होगा की, आप जैसा सोचते है , ठीक वैसा ही आपके जीवन में घटित होने लगता है।नजरे बदलो तो नज़ारे बदल जायेंगे, जीवन में आने वाली हर परेशानी एवम सुख दुःख का कारण के लिए हम स्वयं जिम्मेदार है ,जो केवल हमारे मन के अंदर निर्माण किये संकल्प की वजह है।आपकी सकारात्मक सोच बहुत महत्वपूर्ण है जो आपका भविष्य की नीव रखती है ,अगर आप नकारात्मक सोच रखते हो तो ठीक उसी प्रकार की फ्रीक्येन्सी आपके आस – पास बन जाएगी और अगर आप सकारात्मक सोच रखते हो तो आपके आसपास सकारात्मक आभा मंडल बनता जाएगा।अब्राहम थॉमस लिकंन भी कम पढ़े लिखे थे , अपनी गरीबी के कारन उन्होंने अपनी पढाई जैसे वैसे पूर्ण की थी , उनके जीवन में काफी परेशानियां आयी किन्तु वे कभी परिस्थिति से मायूस नहीं हुये , हर वक्त सकारात्मक विचार और उमंग ,उत्साह से आगे बढ़ते गए और एक दिन वे संयुक्त राष्ट्र संघ के राष्ट्रपति बने। सपना सजाना कोई बुरी बात नहीं है , अगर आप अपने मानसिक पटल पर कोई तस्वीर देखते हो तो वह सबसे पहले आपके वृत्ति में आता है और वही प्रक्रिया अगर हम बार बार करते है तो वह हमारे संस्कार बन जाते है और वैसी हमारी प्रवृत्ति बनती जाती है , तो हमारे मानसिक तस्वीर की प्रक्रिया की प्रबल शक्ति का कारन यह है की, जब आप दिमाग में मनचाही चीजो के साथ आप तस्वीर बनाने लगते हो तो आपके मन के भाव जाग्रत होते जाते है और यह भावनाये जीतनी सशक्त होगी उतनी ब्रम्हांडीय शक्ति आपके लिए सकारात्मक वायुमंडल बना देगी।राइट ब्रदर ने ठान ली थी की , आखिर हमें आकाश में उड़ना ही है , सन 1903 में उनकी मेहनत कामयाब हुई और दुनिया का सबसे पहला हवाई जहाज की निर्मिति हुई।

हमारे विचारों में परिवर्तन ही किसी भी परिवर्तन का आधार है।किसी ने कहा और हमनें मान लिया? सभी अपनी तरह से सोंचते है, अनुभव करते है। इसे स्वीकार करने से पहले कई रास्तों, प्रक्रिया से गुज़र कर परिवर्तन आता है। शायद सीधा मार्ग परिवर्तन जैसा नज़र नही आता।सारा खेल ही सोच का है …सोच को सकारात्मक हो तो सब कुछ सही चलता है …किन्तु दुर्भग्यवश आज सोच इतनी नेगेटिव होती जा रही है की सब लोग गलत दिशा की और जाते दिखाई देते हैं और समाज का विघटन हो रहा है।सोच को सही दिशा देने की नितांत आवश्यकता है।व्यक्ति से ही समाज का निर्माण होता है। व्यक्ति को दूसरों को बदलने से अच्छा है अपने अंदर बदलाव लाना , लेकिन लोग खुद को नहीं देखते बल्कि दूसरों को नसीहत का पाढ पढाते रहते हैं।

 

बदलें खुद की नकारात्क सोच कोहमें सदैव दूसरों को बदलने से पहले खुद को बदलने के बारे में सोचना चाहिए। हमे दूसरों के बजाय पहले खुद की सोच का सकारात्मक बनासन होगा। सकारात्मक सोच परिस्थितियों में ही नहीं दृष्टिकोण में बदलाव लाती है।सकारात्मक सोच को बढ़ाना जीवन में बहुत ज़रूरी है। सकारात्मक सोच से ना केवल उर्जा का संचार होता है, ये व्यक्ति की नेत्रत्व क्षमता भी बढ़ाती है। सकारात्मक सोच आपको बेहतर इंसान बनाती है। सकारात्मक सोच आपका आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है। आज से ही अपनी सकारात्मक सोच कैसे बढ़ाएँ ये ज़रूर सोचिए और सकारात्मक सोच बढ़ाने के तरीके ज़रूर आजमाएँ। हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं इसलिए अगर हुमें अच्छा बनना है तो अपनी सकारात्मक सोच को निश्चय रूप से बढ़ाना होगा। हमारे विचारों पर हमारा खुद का ही नियंत्रण होता है इसलिए ये हमारे उपर ही है की हम सकारात्मक सोचें या नकारात्मक।किसी ने सही कहा है – निराशावादी को हर अवसर में मुश्किलें दिखती है और आशावादी को हर मुश्किल में अवसर दिखाई देता है”अगर हम काला चश्मा पहनते हैं तो हमें सब काला नज़र आता है और हरा चश्मा पहनते हैं तो हरा नज़र आता है। इसलिए अगर हमने सकारात्मक चश्मा पहना है तो हमें सभी लोगों में अच्छाई नज़र आएगी और अगर नकारात्मक चश्मा पहन रखा है तो सभी में बुराइयाँ ही दिखेगी। नकारात्मक सोच से हमें अपने चारों तरफ दुख, असंतोष, निराशा नज़र आएगी वहीं सकारात्मक सोच से हमें सुख, संतोष और आशा नज़र आएगी। सकारात्मक सोच कैसे बढ़ाएँ – आज हम आपको कुछ तरीके बताते हैं जिनसे आप अपनी सकारात्मक सोच को बढ़ा कर अपना जीवन बेहतर बना सकते हैं।

बदलें खुद की नकारात्क सोच को

जीवन से संतुष्ट होने के लिए आपको बदलना होगा और खुद को बदलावों के अनुरूप बनाना होगा। यह आपके लिए और कोई नहीं बल्कि आप खुद ही कर सकते हैं। पहला कदम हमेशा सबसे कठिन होता है, पर दृढ़ निश्चय और सही मानसिकता के साथ आप लगभग हर चीज में जीत हासिल कर सकते हैं। वर्तमान में चीजें कैसी हैं यह आपको मालूम हो सकता है, पर आने वाले समय में क्या छुपा है वो बिल्कुल अलग हो सकता है और होगा।आपकी लाइफ अभी जिस भी कंडीशन पर है वह आपकी सोच के कारण ही है। यह आपकी सोच ही है जो किसी चीज को सही तो किसी चीज को गलत बताती है।सोच में अगर फर्क आ जाये तो काफी चीजे अपने आप बदली हुई नजर आयेंगी। आपके साथ दिनभर में कुछ भी होता है उस स्थिति में आपके पास हमेशा 2 Option होते है।एक Positive Side और दूसरा Negative ।इसलिए, आप हमेशा पॉजिटिव चीजो पर ही ध्यान रखे ।Always Positive चीजो पर ही Focus रखे।हर चीज के नेगेटिव साइड को भी देखो और पॉजिटिव साइड को भी पर हमेशा चुनो पॉजिटिव साइड को।

दोस्तों, इसलिए जब भी आपको इस तरह की भावनाएं विचलित करने लगे तो यह सोचे की ये उस कहानी का हिस्सा है जो आपने अपने दिमाग में बना रखी है,वास्तविकता से उसका कोई लेना-देना नहीं है।तभी आप एक सुखी और आदर्श जीवन जी सकोगे।हम सफलता तो पाना चाहते है पर हम अपने Negative Attitude के कारण कई बार सफल होने से दूर रह जाते है।इसलिए यह बहुत जरुरी है की आप अपना दृष्टिकोण सकारात्मक रखे।सकारात्मकता की शुरुआत आशा और विश्‍वास से होती है। चारों तरफ अंधेरा हो और अगर हम एक दीपक जला दें तो एक पल में फैला हुआ अंधकार दूर हो जाता है। इसी तरह आशा की एक किरण हमारे सारे नकारात्मक विचारों को दूर कर देता है। महात्मा गाँधी ने कहा है – “मनुष्य वह प्राणी है जो अपने विचारो से बना होता है, वह जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है”

(लेखक संजय कुमार सुमन लगातार विभिन्न विधाओं में अपनी लेखनी के माध्यम से लोगों को राह दिखाते हुए पत्रकारिता कार्य को अंजाम दे रहे हैं।दर्जनों पुरुस्कार से अब तक सम्मानित भी हो चुके हैं।)  

 

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