Home » Others » जीवन में सफलता का आधार है धैर्य

जीवन में सफलता का आधार है धैर्य

Advertisements

संजय कुमार सुमन 

sk.suman379@gmail.com 

जीवन में सफलता कौन नहीं चाहता।  हर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता की ऊँचाई चढ़ना चाहता है। ये संसार भी ऐसे लोगों को ही याद रखती है जो इस दुनिया में सफल हुए हैं, जिन्होनें अपने-अपने क्षेत्रों में विजय पताका फहराई है।  इस प्रतिस्पर्धा वाले युग में जीत से अधिक कीमती वास्तु शायद ही कोई होगी। एक बात तो पूरी तरह स्पष्ट है, संसार में हर व्यक्ति की जीतने की इच्छा होती है लेकिन जीतना इतना आसान नहीं है।  जीतने के लिए कीमत चुकानी पड़ती है।  वह कीमत होती है अपने जीवन का एक लम्बा समय और उस लम्बे समय में किया हुआ अथाह परिश्रम।  किसी भी क्षेत्र में विजय प्राप्त करनी हो तो उसे समय देना पड़ता है, वो भी नियमित रूप से।  ऐसा नहीं कि अचानक कुछ करने का जोश आये, कुछ दिनों तक पूरी ताकत से उसमें लगे रहे, फिर आलस में उसको अधूरा छोड़ दिया। कई बार हम अपने आप को एक ही जगह फंसा हुआ पाते हैं और ये भावना तब तक हमारा पीछा नहीं छोड़ती जब तक हम कोई फैसला नहीं करते। हालांकि सिर्फ फैसला लेने से भी कुछ नहीं होता, जब तक कोई कदम न उठाया जाए।

जीवन के बड़े सपने एक पल में कभी पूरे नहीं होते। वास्तव में सफल वही होते हैं, जो धैर्य के साथ लगातार कोशिश करते हैं और रास्ते में आने वाली छोटी-छोटी असफलताओं से नहीं घबरातें हैं।अगर कीचड़ में पैर गिर जाए, तो नल के पास जाकर धो लेना चाहिए। लेकिन नल को देखकर कीचड़ में उतरना बुद्धिमानी नहीं है। इसी तरह जिंदगी में बुरा समय आये तो पैसों का उपयोग करना चाहिए, लेकिन पैसे पास होने की वजह से बुरे रास्ते पर चलना बुद्धिमानी नहीं है।घड़ी की सुई हमेशा अपने नियम से चलती है, इसलिए सभी उसका विश्वास करते हैं, आप भी अपने नियम से चलिए, लोग आपका भी विश्वास करेंगे।नाकामियां आपको अपनी गलती सुधारने और वापस दोगुनी ताकत से सफल होने के लिए प्रेरित करती है।आचार्य चाणक्य कहतें हैं वही व्यक्ति सफल होता है जिसे इस प्रश्न का उत्तर हमेशा मालूम रहता है समझदार व्यक्ति जानता है कि वर्तमान समय कैसा चल रहा है अभी सुख के दिन है या दुःख के इसी के आधार पर वह अपना कार्य करता है।  यदि सुख के दिन है तो अच्छे कार्य करते रहना चाहिए और यदि दुःख के दिन हैं तो अच्छे कार्यो के साथ धैर्य बनाए रखना चाहिए।  दुःख के दिनों में धैर्य खोने पर अनर्थ हो सकता है। हर कार्य में सफ़लता हासिल करने के लिए संघर्ष की जरूरत पड़ती है ।

अपना धैर्य मत खोएं सकरात्मक रहें, याद रखें दर्द दो प्रकार के होते हैं।  एक जो आपको चोट पहुंचाता है दूसरा जो आपको बदलता है। दोनों ही सिखाते हैं।  धैर्य का अर्थ इंतज़ार नहीं होता बल्कि सपनों के लिए काम करने के दौरान अच्छा नजरिया रखने की काबलियत से हैं। धैर्य रखने से साबित होगा कि आप जो कुछ प्राप्त करना चाहते हैं उसके प्रति आप कितने दृढ हैं और अगर आप दृढ हैं तो मुश्किलों में भी आपका काम अवश्य पूरा होगा। धैर्य रखने से आप हर कदम पर बेहतर महसूस करेंगे। आपको महसूस होगा के आपके रास्ते में किसी भी तरह की कोई रूकावट नहीं है।आतीत की छाया को अपने भविष्य पर मत हावी होने दें। बदलाव लाने की हर संभव कोशिश करें पीछे मुड़कर न देखें और सच्ची ख़ुशी की प्राप्ति तभी होगी जब समस्याओं के बारे में शिकायत करना छोड़ देंगे। ख़ुशी समस्याओं की गैर मौजूदगी का नाम नहीं है बल्कि समस्याओं से निपटने के समर्थय का नाम है ख़ुशी।यहाँ ये समझ लेना आवश्यक है की आप के पास कोई ऐसा विशेषाधिकार नहीं है जो आप को एकाधिक सफलता दिलाने का दावा करता हो। अतः आप स्वय पर नियंत्रण रखें एवं धैर्य के साथ प्रयत्न जारी रखें सफलता आपके चरण चूमेगी। चलिए आपको एक कहानी सुनातें हैं-

बहुत समय पहले की बात है।  किसी जंगल में एक गर्भवती हिरणी थी, जिसका प्रसव (Delivery ) होने को ही था।  उसने एक तेज धार वाली नदी के किनारे घनी झाड़ियों और घास के पास एक जगह देखी, जो उसे प्रसव हेतु सुरक्षित स्थान लगा।  अचानक उसे प्रसव पीड़ा (Pain) शुरू होने लगी, कि तभी उसने देखा, आसमान में काले-काले बादल छा गए और घनघोर बिजली कड़कने लगी।  बिजली गिरने से घने जंगल मे आग लग गयी।
उसने वहां से भाग जाना उचित समझा, लेकिन जैसे ही हिरणी ने अपनी दायीं तरफ  देखा। वहां एक बहेलिया उसकी ओर तीर का निशाना लगाये हुए था और उसकी बाईं तरफ । एक शेर उस पर घात लगाये हुए, उसकी ओर बढ़ रहा था।

हिरणी पर तो मानो, मुसीबत का पहाड़ ही टूट पड़ा हो। वो बुरी तरह घबरा गयी।  उसको समझ ही नहीं आ रहा था कि, इन विषम परिस्थितियों में वो करे भी —— तो क्या करे ???

एक तरफ तो वह प्रसव-पीड़ा के असहाय दर्द से गुजर रही थी वहीँ उसके मन में अनेक तरह के सवाल चल रहे थे……….वो सोच रही थी…….

उसके एक ओर जंगल की भयंकर आग, तो  दूसरी ओर तेज धार वाली बहती नदी,

एक ओर निशाना लगाये बहेलिया तो दूसरी तरफ शेर जैसा खूंखार शिकारी ।

बड़ी ही विचित्र और संकट-पूर्ण घडी थी। कुछ भी समझ नहीं आ रहा था।  लेकिन उसने धैर्य से काम लिया।

उसने सोचा कि, जिन परिस्थितियों पर — मेरा कोई अधिकार ही नहीं है।

उनके बारे में सोचकर या चिंतित होकर, भला क्या फायदा ???

…. जिन पर मेरा पूर्ण अधिकार है अर्थात् जो मेरी पहली प्राथमिकता है, जो मेरा वर्तमान है : — मैं क्यूँ नहीं ।  उस पर अपना ध्यान केन्द्रित करूँ ???

ऐसा सोचकर ……. उसने अपना पूरा ध्यान, अपने नव आगंतुक को जन्म देने की ओर केन्द्रित किया।
फिर जो हुआ वो आश्चर्य जनक था !!!

कड़कड़ाती बिजली की चमक से, शिकारी की आँखों के सामने अँधेरा छा गया, और उसके हाथों से तीर चल गया और सीधे भूखे शेर को जा लगा ।  बादलों से तेज वर्षा होने लगी और जंगल की आग धीरे-धीरे बुझ गयी।
इन सबके बीच, हिरणी ने एक स्वस्थ शावक को जन्म दिया।

दोस्तो,ऐसा ही तो, हमारे साथ भी होता है। जब हम चारों ओर से समस्याओं से घिर जाते है,  नकारात्मक विचार हमारे दिल – दिमाग को बुरी तरह से जकड़ लेते हैं, मुसीबतों से बाहर निकलने की दूर-दूर तक कोई संभावना, नजर ही नहीं आती। जिस प्रकार हिरणी ने सभी नकारात्मक परिस्तिथियाँ उत्पन्न होने पर भी, अपनी प्राथमिकता “प्रसव “पर ध्यान केन्द्रित किया, जो उसकी पहली प्राथमिकता थी।  बाकी तो मौत या जिन्दगी कुछ भी उसके हाथ मे था ही नहीं, (जिन पर उसका कोई अधिकार ही नहीं था) और उसकी कोई भी क्रिया या प्रतिक्रिया उसकी और गर्भस्थ बच्चे की जान ले सकती थी।

ऐसे संकट-पूर्ण समय में, उसने केवल और केवल अपनी प्राथमिकता तय की और उसी अनुरूप कार्य किया और देखते ही देखते सभी परिस्थितियां सामान्य हो गयी।   उसी प्रकार हमें भी अपनी प्राथमिकता तय करके, उसी के अनुसार अपने जीवन को आगे बढ़ाना चाहिए।  आलस्य  मनुष्य  का  शत्रु  है।   आलसी  व्यक्ति  के  सामने  यश नहीं  अपयश  होता  है।  अंततः  वह  यह  कहकर  टाल  देता  है  की  मेरा  नसीब  ही  नहीं  है.  इसमें  नसीब  का कोई  दोष  नहीं  है।   दोष  आलस्य  का  है।  इसलिए आलस्य का त्याग करें व पूरी लगन से कठिन परिश्रम करते रहिये और धैर्य बनाए रखें। इतना तो स्पष्ट है कि जीतने की इच्छा करना तो आसान है पर जीतने के लिए जो तैयारी करनी पड़ती है वो आसान नहीं होती।  इसलिए बहुत कम लोगों में उस तैयारी की इच्छा होती है।  लोग परिश्रम के कठिन राह से गुजरना नहीं चाहते। वो सरल मार्ग ढूँढते रहते हैं। सरल मार्ग ढूँढते-ढूँढते पूरा जीवन बीत जाता है।  ऐसे लोगों को न सरल मार्ग मिलता है न सफलता।  परिश्रम से बचने के कितने तरीके ढूँढे जाते हैं पर उनमे से कोई तरीका ऐसा नहीं जो जीत की और ले जा सके। आपको सफलता अवश्य प्राप्त होगी।कार्यों में मिलती असफलता के बीच धैर्य टूटता ही है यह सबके साथ होता है। इस घटना के घटने से तो महापुरूष भी नहीं बच सके फिर हम तो आम इंसान है। हम इस सब से कैसे अछूते रह सकते है, इस सबके बाद भी हम यह देखते है कि जिसने जीवन में धैर्य रखा है वह सफल अवश्य हुआ है देर से ही सही लेकिन उसे सफलता मिली जरूर है, इसलिए धैर्य धारण किजिए सफलता जरूर मिलेगी।

Comments

comments

Advertisements
x

Check Also

मुरलीगंज में फिर गरजी बंदूक, युवक को बनाया निशाना

रंजीत सुमन मुरलीगंज,मधेपुरा. मधेपुरा जिले के मुरलीगंज में अभी फिर बन्दूक गरजी है।अपराधियों ने 19 वर्षीय युवक को गोली मारी ...