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तुम्हें पाने का ख्वाब

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तुम्हें पाने का ख्वाब

तुम्हें पाने का ख्वाब देख रहा हूं,

यह हकीकत है या फसाना सोच रहा हूं।

वर्षों के प्रेम को फिर से देख रहा हूं,

तुम्हें चाहने का ख्वाब देख रहा हूं।

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तुम्हारे गमों का दिल में तो उतर रहा है सैलाब,

पर उसे सब कुछ भुला कर नज़दीकियां देख रहा हूं।

जीना हुआ है मेरा मुश्किल,

बदनामियों से डर रहा हूं

एक बार फिर से तुम्हें प्यार कर रहा हूं।

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देखता हूं जब कभी तुम्हें

पास से गुजरते हुए,

दिल तरसने और आंख मचलने लगती है।

एक बार तुम्हें पाने का गम उठा रहा हूं,

तुम्हें पाने का ख्वाब देख रहा हूं।

यह हकीकत है या फसाना सोच रहा हूं।

image of sanjay kumar suman संजय कुमार सुमन 

चौसा,मधेपुरा 

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