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बिहार : मिथलांचल का पवित्र पर्व जुड़ -शीतल आज।

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अजय सिंह

कोसी टाइम्स @ सुपौल ।

 

आधुनिकता के इस दौर मे भी मिथिलांचल के लोग अपनी परम्परा का बखूबी निर्वाह करते है खास बात ये है कि उन परम्पराओं के पीछे भी कई खूबसूरत उदेश्य छिपे रहते हैं जिससे आम जन मानस का जीवन जुड़ा हुआ है उनकी भलाई निहित रहती है , मिथिलांचल सहित पूरे बिहार में मनाया जाने वाला प्रकृति पर्व जुड़ शीतल प्रमुख त्योहार में से एक है। जिसे पुरे बिहार प्रदेश में श्रधा और आस्था के साथ मनाया जाता है। हालाँकि, पर्व मनाने की प्रथा सभी क्षेत्रों में अलग-अलग है। मिथिला में जूर शीतल के बहाने घर में बड़े बुजुर्ग, माता -पिता सवेरे सवेरे बच्चे के सिर पर ठंढक पानी डालते है। इसके अलावा महिलाएं, बच्चियां के द्वारा जीव- जंतु, पेड़- पौधों ,सड़क -पगडंडी की भी सिंचाई की जाती है।वहीं गृहणियां सूर्योदय से पहले घर मे स्वादिष्ट व्यंजन बनाती है, और वही बासी भोजन समूह के साथ खाया जाता है। जानकारों के अनुसार बासी भोजन खाने से लिभर सम्बन्धी बीमारी कम होती है। इस पर्व की महत्ता ग्रीष्म की तपिश व पानी की महत्ता से जुड़ी हुई है। दरअसल बैसाख मास में अत्यधिक गर्मी पड़ने से जीव जंतु, पेड़- पौधे में पानी की मात्रा कम हो जाती है, इसके मद्देनजर इस पर्व की अपनी महत्ता है, ताकि हमारा पर्यावरण सुरक्षित रहे, वही अत्यधिक गर्मी से अगलगी की घटना में बढ़ोतरी हो जाती है, तो उस घटना की रोकथाम के लिये भी पूरे धरातल को पानी से सींच कर ठंढक रखने की परंपरा है ,ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।वहीं पुरुषों द्वारा शिकार करने की भी परंपरा रही है।

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