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मैं एक औरत हूँ

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मैं एक औरत हूँ

मैं एक औरत हूँ
आँचल में बंधी हजारों सपनों की उड़ान हूँ
हाँ खूबसूरत हूँ मैं
पर बस यही मेरी पहचान नहीं है।
एक दिन दूर निकल जाऊँगी

दुल्हन के लिए इमेज परिणाम
सात समुद्र भी छोड़ आगे बढ़ जाऊंगी
कितना भी बांध लो औरत के ढाँचे में
तोड़ ये ढांचा इंसान बन जाऊंगी।
मेरे जीवन को चंद मुसकान के पलो में
नहीं बाँधूगी।
तोड़ सोच की दीवारों को एक नया कल बना
जाऊंगी।
मैं एक औरत हूँ
ये भूल जीना सीख जाऊंगी।

राखी सरोज

बदरपुर,दिल्ली 

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