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बिहार स्थापना दिवस:भारत की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा बिहार

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संजय कुमार सुमन

(साहित्यकार)  

 

22 मार्च 1912 को बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग होकर एक राज्य बना था बिहार। इसलिए विश्वभर में जहां जहां बिहार के लोग हैं वह इस दिन को बिहार दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। आज गौतम बुद्ध की धरती “बिहार ” के स्थापना सम्मान मे बिहार दिवस मनाया जा रहा है। गौरव की बात है मेरे लिए की मैं एक” बिहारी” हूँ और बेशक जब कोई मित्र बिहारी कहकर पुकारते हैं तो सुनकर आनंद सा आता है।  गर्व की बात इसलिए  क्योंकि काफी कुछ सीखने को मिला है इस भूमि की माटी से मुझे। सबसे ज्यादा जो मिला वो है सामने आए किसी भी विकट परिस्थिति मे भी जुझारू बनकर विजयश्री पाने की प्रवृति । क्योंकि नेताओं के गंदे राजनीति के सामने आज तक वो धरती भी जुझारू ही बनी पड़ी है लेकिन उपजता तब भी सोना ही है। आज मैं सच्चिदानंद सिन्हा जी(जिन्होने बिहार बनाने का एक सफल सपना 1893 से देखा ) और दरभंगा नरेश महाराजा रामेश्वर सिंह जी (जिन्होने पटना को बिहार-उड़ीसा की संयुक्त राजधानी बनाने मे अहम भूमिका निभाई )को खास तौर से कोटी कोटी धन्यवाद देता हूँ।  पर दुःख होता है जब आज ये देखता हूँ कि भारत का एक ऐसा प्रदेश जो सभ्यता और संस्कृति का जनक रहा।  ऐसा प्रदेश जिस का एक भाग कृषि का भण्डार हुआ करता था और एक भाग भारतीय उधोग की धुरी होता था।  आज कहीं न कहीं उपेक्षाओं का शिकार हो रहा है और ऐसा प्रदेश जो भारत को सबसे ज्यदा और सबसे योग्य लोक सेवक देता आया है। मैं अपने इस सोने की चिड़िया रूपी प्रदेश के भावी विकाश की भगवान से प्रार्थना करता हूँ।अब कुछ बुद्धिजीवियों के नेतृत्व में एक बुलंद बिहार के शंखनाद का समय आया है फिर से … इस राज्य का कुछ लोभी नेताओं ने लंबे समय तक शोषण किया है । बिहार अपने आप को बदलने के बदले और राज्यों को ही बदलने मे तल्लीन रहा ।सबसे ज्यादा और सबसे योग्य लोक सेवक प्रदाता हमारा बिहार आज खुद के लिए योग्य सेवक का इंतजार कर रहा है।  लेकिन अब बिहार के युवा और आम लोगों की सोच जब देखता हूँ तो यही लगता है जल्द ही सोने की ये चिड़ियाँ वास्तविक आजादी पाने वाली है पिंजरे से …. ।

आज के बिहार में स्वाभिमान है, आत्मविश्वास है और अपने हक़ को लेने का जज्बा है।  स्वाभिमान इस बात का कि इतने वर्षो से सबसे गरीब राज्य होने की बावजूद पिछले 10 वर्षो में हम सबसे आगे रहे – विकास दर में, बेटियों की साक्षरता में वृद्धि में, महिलाओं के सशक्तिकरण में, न्याय के साथ विकास में।  अनेक ऐसे पैमाने हैं जहाँ बिहार देश का नेतृत्व कर रहा है आर्थिक, सांस्कृतिक, और सामजिक दृष्टी से ।वह बिहार ही है जिसने दुनिया को गणतंत्र की सीख दी थी। लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व में बिहार के शासकों का चयन जनता के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाने लगा था और गणतंत्र की स्थापना हुई थी। आज वैश्विक स्तर पर जिस लोकशाही को अपनाया जा रहा है, वह यहाँ के लिच्छवी शासकों की ही देन है। प्राचीन वैशाली नगर अति समृद्ध एवं सुरक्षित नगर था जो एक-दूसरे से कुछ अन्तर पर बनी हुई तीन दीवारों से घिरा था।1912 में बंगाल के विभाजन के बाद बिहार अस्तित्व में आया।1935 में उड़ीसा इससे अलग किया गया था। जबकि बिहार का विभाजन एक बार और 2000 में हुआ और फिर इससे झारखंड बना।

बिहार लंबे समय तक भारत की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है।  इसी तरह बिहार पुरातन काल से सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केंद्र रहा है। महात्मा बुद्ध के काल से यदि शुरू किया जाये, तो उस समय हर्यक वंश का शासन था।  बिम्बिसार इस वंश के राजा थे।  उनके पुत्र अजातशत्रु ने अपने शासन का विस्तार भारत के बड़े भू-भाग पर किया।  इसके बाद नंद वंश का शासन रहा।  अधिकतर क्षेत्र में उसका शासन रहा।  फिर मौर्य वंश का शासन आया। इसके राजा चंद्रगुप्त ने अपने गुरु कौटिल्य के साथ मिल कर शासन का विस्तार किया।  गुप्त वंश के शासन में समृद्धि आयी।
इसी तरह उत्तर वैदिक काल में जायें, तो वैदिक साहित्य, ब्राह्मण ग्रंथ, उपनिषद, महाकाव्य आदि की रचनाएं बिहार में ही हुई।  मिथिला के राजा का दरबार काफी समय तक पूरे भारत की सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा।  वहां दार्शनिक शास्त्रार्थ और ज्ञान प्राप्ति के लिए आते थे।  इसके प्रमाण प्राचीन साहित्य में भरे पड़े हैं । मिथिला के जनकवंशी अंतिम राजा के समय लोकतंत्र की स्थापना हुई थी, जो दुनिया का सबसे पुरानी गणतांत्रिक शासन पद्धति थी।

बिहार का इतिहास को पूरा नहीं पढ़ा तो आपका भारत का इतिहास अधूरा रह जाएगा । बौध धर्म के बहुत से लोग यहाँ विहार करने के लिए आते थे इसलिए इस राज्य का नाम बिहार पड़ा था । बिहार का प्राचीन नाम ’विहार’ था, जिसका मतलब मठ होता है। यह भारत के पूर्वी भाग में स्थित है। क्षेत्रफल के हिसाब से बिहार भारत का बारहवां सबसे बड़ा और आबादी के मान से तीसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है। बंगाल के तिकोने क्षेत्र में पहुंचने से पहले गंगा नदी इस राज्य से बहती है जिसके कारण यह राज्य वनस्पति और जीव-जन्तुओं से समृद्ध है। बिहार का वन क्षेत्र भी विशाल है जो कि 6,764 वर्ग किमी है। यह राज्य भाषाई तौर पर प्रभावकारी है क्योंकि यहां कई भाषाएं बोली जाती हैं, जैसे भोजपुरी, मैथिली, मगही, बज्जिका और अंगिका। बिहार की राजधानी पटना है, जिसका नाम पहले पाटलीपुत्र था। भारत के कुछ महान राजाओं जैसे समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त मौर्य, विेक्रमादित्य और अशोक के शासन में बिहार शक्ति, संस्कृति और शिक्षा का केन्द्र बन गया। यहां उस समय के दो महान शिक्षा केन्द्र भी थे, विक्रमशिला और नालंदा विश्वविद्यालय। बिहार में आज भी यहां के 3,000 साल पुराने इतिहास की गवाही देते कई प्राचीन स्मारक मौजूद हैं और विश्वभर के लाखों पर्यटक इन्हें देखने आते हैं। राज्य में स्थित महाबोधि मंदिर को यूनेस्को द्वारा विरासत स्थल घोषित किया गया है।

 

प्राचीन बिहार जिसका नाम मगध था ने, 1,000 सालों तक सत्ता, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभाई। मौर्य नाम का पहला भारतीय साम्राज्य 352 ईस्वी में मगध में ही शुरु हुआ और उसकी राजधानी पाटलीपुत्र यानी आज का पटना थी। 240 ईस्वी में मगध में गुप्त साम्राज्य आया। गुप्त के नेतृत्व में भारत ने विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रभुत्व हासिल किया। बिहार के सासाराम के महान पश्तून शासक शेर शाह सूरी ने सन् 1540 में उत्तर भारत की बागडोर संभाली। वह मुगलकाल के सबसे प्रगतिशील शासकों में से एक थे और उनके शासन में बिहार खूब फलाफूला। मुगलों के पतन के बाद बिहार बंगाल के नवाबों के नियंत्रण में आ गया।

अर्थशास्त्र के रचयिता कौटिल्य (चाणक्य) का जीवन भी बिहार की धरती पर ही व्यतीत हुआ। चाणक्य मगध के राजा चंद्रगुप्ता मौर्य के सलाहकार थे ।302 ईसा पूर्व यूनान के महान सम्राट एलेक्जेंडर (सिकंदर) का दूत मेगास्थनीज और सेनापति सेल्युकस नेक्टर ने भी मौर्यकालीन पाटलीपुत्र में काफी समय बिताया। 270 ईसा पूर्व अशोक महान ने भी बिहार की धरती पर राज किया। भारत के राष्ट्रीय निशान अशोक स्तंभ है और राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र सम्राट अशोक की ही देन है।

बिहार राज्य प्राकृतिक रूप से बहुत ही सुन्दर है। केवल प्राकृतिक दृष्टि से ही नहीं बल्की अध्यात्मिक रूप से भी बिहार को काफी अहम स्थान भी है। प्रभु श्री राम की पत्नी माता सीता का जन्म भी बिहार में ही हुआ था। सीता माता इस बिहार राज्य की राजकुमारी थी।

विज्ञान, गणित, धर्म, खगोल विज्ञान और भारतीय दर्शन के क्षेत्र में बिहार राज्य ने काफी सफ़लता हासिल की थी। उस समय बिहार राज्य में चारो तरफ़ समृद्धि थी और हर जगह पर शांति प्रस्थापित थी। इसी वजह से इतिहासकार बिहार के इस काल को बहुत ही समृद्ध और सफल समय मानते है। इतिहास के कुछ मिले सबूतों के आधार कहा जाता है की एक बार मुहम्मद बिन बख्तर खिलजी ने बिहार पर हमला कर दिया था और कई सारे बुद्ध धर्म के लोगो की बड़े पैमाने पर हत्या कर दी थी। उसी हमले के दौरान नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्रसिद्ध विद्यापीठ नष्ट कर दिए गए थे।उसके बाद बिहार में शेर शाह सूरी का शासन था और उसने इस प्रदेश में कई सारे प्रदेश का पुनर्निर्माण करवाया था।वो ऐसा राजा था जिसने देश का सबसे लम्बा रास्ता बनवाया था। उसने जो आर्थिक सुधारना की थी उसके वजह से बिहार राज्य एक बार फिर समृद्ध हुआ था। अकबर ने भी उसी तरह से बिहार का विकास किया था। इन सभी बातो का उल्लेख वेद, पुराण और महाकाव्य में भी है।

प्रसिद्ध हिंदी महाकाव्य रामायण के लेखक ऋषि वाल्मीकि भी बिहार राज्य में रहते थे। यह राज्य वही स्थान है जहापर जैन धर्म के संस्थापक भगवान महावीर, बौद्ध धर्मं के संस्थापक भगवान बुद्ध और सिख धर्म के संस्थापक गुरु गोविन्द सिंह को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।बिहार की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक सुन्दरता और पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण बिहार की जमीन को एक विशेष महत्व मिल चूका है जिसके लिए बिहार के लोगो को बिहार पर काफी गर्व है। कला, साहित्य, धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में बिहार को कोई तोड़ नहीं।बिहार की जमीन से जुडी बहुत पुराणी कहानिया आजभी सुनायी जाती है। यह एक ऐसा राज्य है जहा से एक समय में पुरे देश को चलाया जाता था और आजूबाजू के देशो पर भी राज्य किया जाता था। कई सारे महान शासक इसी बिहार की पवित्र जमीन पर बड़े हुए थे। बिहार से जुडी बहुत सारी कहानिया है जिन्हें बताने के लिए शब्द भी कम पड़ जाते है।

 

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