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सहरसा:पुरे देश में वनगाॅव के घुमौर होली का है खास महत्व,हिन्दू-मुस्लिम मिलकर मनाते है त्योहार

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सुभाष चन्द्र झा
कोसी टाइम्स@सहरसा

अठारहवीं शताब्दी के महान संत परमहंस लक्ष्मी नाथ गोसाईं द्वारा शुरूआत की गई घुमौर होली आज भी मनाई जाती है । इस घुमौर होली में हिन्दू व मुसलमान मिलकर एक साथ बिना भेदभाव व राग द्वेष के साथ मनाते है ।भारत में जिस प्रकार मथुरा के बरसाने गाँव में लठमार होली श्रीकृष्ण परम्परा के अनुसार मनाई जाती है उसी प्रकार वनगाॅव मे नशामुक्त होली मनाई जाती है । बढती महंगाई , और एकल परिवार के बढ़ते प्रचलन के मौजूदा दौर में घुमौर होली परम्परा को सहेजने व संरक्षित करने की आवश्यकता है ।

होली के दिन सभी ग्रामीण बाबाजी कुटी , ठाकुरबाड़ी , भगवती स्थान व ब्रहम स्थान व विभिन्न बंगला पर एकत्रित हो एकसाथ रंग अबीर लगाकर हर्षोल्लास के साथ होली मनाते है ।इस दौरान मानव पिरामिड भी बनाया जाता है जिसमें हिन्दू के कंधे पर मुस्लिम बंधु चढ़ जाते हैं जिसके कारण हिन्दू व मुस्लिम का कोई भेद ना होकर सामाजिक समरसता परिलक्षित होती है । इस अवसर पर तीन दिवसीय संगीत समारोह भी आयोजित किया जाता है जिसमें देश के मशहूर संगीत घराना की प्रस्तुति की जाती हैं ।वनगाॅव की होली समारोह में बनारस घराना के प्रख्यात तबला वादक पं समता मिश्र सहित राजन साजन, शारदा सिन्हा , पं रघु झा , पं सियाराम तिवारी जैसे प्रख्यात कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति कर चुके हैं । इस वर्ष बनारस के कलाकार डाॅ रामशंकर ,ऋषभ चतुर्वेदी , अंकिता तिवारी, स्वाति तिवारी व मोहित तिवारी शास्त्रीय व अन्य संगीत गायन प्रस्तुति करेंगे। वनगाॅव में लोकगीत एवं शास्त्रीय संगीत से लेकर विदेशिया शैली के संगीत व नटूआ नृत्य की महफिल का आयोजन किया जाता है।वनगाॅव में धर्मसभा के निर्णयानुसार पर्व व त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष 19 ,20 व 21 मार्च को होली मनाई जायेगी । परमहंस संत लक्ष्मी नाथ गोसाईं होली समिति वनगाॅव के अध्यक्ष महावीर झा , सचिव शक्तिनाथ मिश्र व कोषाध्यक्ष भोलन खां ने घुमौर होली की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है ।

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