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समस्तीपुर : सरकार से लैंग्वेज लैब जांच कराने की किया मांग

प्रियांशु कुमार

समस्तीपुर

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के अंतर्गत समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर में14 -15 वित्तीय वर्ष में लगभग 20,000,00 लाख रुपए की लागत से लैंग्वेज लैब की स्थापना की गई थी। यह प्रोजेक्ट बिहार सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के रूसा के द्वारा 20,000,00 लाख रुपए उपलब्ध कराई गई थी। वहीँ तत्कालीन प्राचार्य आनन-फानन में लैंग्वेज लैब की स्थापना की गई, और लाखों रुपए की बंदरबांट कीया गया। स्थापना के बाद से आज तक एक भी छात्रों को इसका लाभ नहीं मिल सका, क्योंकि पिछले 5 साल में 5 दिन भी नहीं खुल सका है। आज नए प्राचार्य के द्वारा इसके प्रभारी इंचार्ज डॉक्टर मुकुंद सिंह को बनाया गया, तब इसका ताला खुलवाया तो देखा कि छत की सेलिंग और फॉल्स सेलिंग दोनो टूटकर लैंग्वेज लैब में रखे कंप्यूटर तहस नहस के हालत में पाया गया। जिस कारण लैब सहित कंप्यूटर को भारी क्षति पहुंचा है।

वहीँ लैब के प्रभारी इंचार्ज डॉ० मुकुंद कुमार ने इसकी जानकारी प्रिंसिपल को दी, तो प्रिंसिपल एक कमिटी बनाकर इसकी जांच करवया। जांच पड़ताल की गई तो पाया कि लैंग्वेज लैब बनने के बाद से आज तक एक बार भी नहीं खुला। लैब और लाखों की कंप्यूटर की हालत काम के लायक नही प्रतीत होता है। गठित जांच कमिटी में प्रोफेसर ए के सिन्हा बॉटनी, प्रोफेसर एस के सिंह फिजिक्स, प्रोफेसर क्रांति सिंह इकोनॉमिक्स, डॉक्टर कुशेश्वर यादव केमेस्ट्री, डॉ० शशि भूषण कुमार सिंह हिंदी, डॉक्टर मुकुंद कुमार सिंह इकोनॉमिक्स एवं डॉ० अभय कुमार सिंह बॉटनी में शामिल थे। इन सदस्यों ने अपना प्रतिवेदन भी प्राचार्य को सौंप दिया है। इस बीच कई लोगों ने यह आरोप लगाया है कि लैंग्वेज लैब बनने से लेकर आज तक 5 दिन भी, एक भी छात्रों को इसका लाभ नहीं मिला है। इस लैब की जांच कराने की मांग सरकार से विभिन्न संगठनों ने मांग की है।

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