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सात राज्यों को जोड़ने वाले कुर्सेला पुल का नौंवा पाया छह इंच धंसा,भारी वाहनों के परिचालन पर तत्काल रोक

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**भारी वाहनों के लिए वाया पुरैनी, चौसा, धमदाहा होते हुए पूर्णिया वैकल्पिक रूट का निर्धारण

**चौसा के रास्ते में लगा महाजाम,जीना व चलना हुआ हराम 

कुमार साजन 

कोसी टाइम्स@चौसा,मधेपुरा 

सात राज्यों को जोड़ने वाले एनएच 31 से जुड़े कोसी सड़क सेतु कुर्सेला का नौंवा पाया के ऊपर सड़क पुल के छह इंच धंसने से भारी वाहनों के परिचालन पर तत्काल रोक लगा दी गयी है. कुर्सेला ब्रिज का पाया धंसने के कारण विक्रमशिला सेतु होकर नवगछिया जीरो माइल तक पहुंच चुकी भारी वाहनों के लिए वाया पुरैनी, चौसा, धमदाहा होते हुए पूर्णिया वैकल्पिक रूट का निर्धारण जिला प्रशासन द्वारा किया गया है। पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण वाया कुर्सेला ब्रिज होकर एनएच 31 पर भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी गई है। आपको बता दें कि इस महत्वपूर्ण पुल पर आवाजाही बंद होने से यात्रियों को आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है.पुल का निर्माण 1962 में किया गया था. जिसका उद्घाटन तत्कालीन परिवहन मंत्री नीलम संजीव रेड्डी ने किया था.नेशनल हाइवे 31 का ये कोसी पुल दिल्ली से गुवाहाटी को सीधा जोड़ता है.

गारटर धंसने की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन एवं जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दंडाधिकारी के साथ पुलिस पदाधिकारी को प्रतिनियुक्त कर दिया है ।वहीं पुल के दोनों के छोरों पर हजारों की संख्या में वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।दरअसल फरक्का ब्रिज की मरम्मत के कारण एनएच 31 पर गत दो माह से वाहनों का भारी दबाव बना हुआ था। इसको लेकर लगातार महाजाम की स्थिति बनी हुई थी। लगातार ओवरलोडेड वाहनों के परिचालन की बेयरिंग टूटने का कारण माना जा रहा है।

कुर्सेला पुल गौरतलब है कि ये पुल कटिहार, पूर्णिया, नवगछिया , भागलपुर, खगड़िया के साथ पूर्वोत्तर भारत को बरौनी सड़क मार्ग के जरिये उत्तर भारत से जोड़ता है. इस बाबत सदर अनुमंडल पदाधिकारी नीरज कुमार ने बताया कि पुल का गार्डर धंसने की जानकारी पुल निगम विभाग के सचिव तथा एनएचआई कार्यालय बेगूसराय को दे दी गई है ।शीघ्र ही एनएचआई के अभियंता उक्त स्थल पर जाकर समस्या का समाधान करने में जुटेगें। उन्होंने बताया कि नवगछिया अनुमंडल के पदाधिकारियों को भी तथा भागलपुर प्रशासन को इसकी सूचना दी गई है ताकि झारखंड बांका रजौन की ओर से आ रहे बड़े वाहनों को उधर ही रोक दिया जाए ।जबकि पूर्णिया सहरसा एवं जोगबनी से आने वाले वाहनों को दूसरे रूट से भेजने का प्रयास किया जा रहा है। दिल्ली से भी एनएचआइ के विशेषज्ञ अभियंताओं की टीम को बुलाया गया है।

कुर्सेला पुल

वहीं एनएचआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने डीएम से भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट का निर्धारण करने को लेकर बात की है। अधिकारियों ने बताया कि जैक से स्लैब व स्पैन को उठाकर बायरिंग लगाकर मरम्मत की जाएगी। वायरिंग दिल्ली, मेरठ या कोलकाता से मंगानी होगी। इस काम में दो से तीन दिनों का समय लग सकता है। इसके बाद ही मरम्मत का काम शुरू हो पाएगा। प्रशासन ने पुल पर सुरक्षा को लेकर पुलिस की तैनाती कर दी है।

गौरतलब है की इसी जगह 3 महीने पहले ही एन.एच.आई द्वारा मरमत्ती का कार्य पुरा किया गया था। 3 महीने के अंदर ही दुबारा पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने से लोग परेशान है । पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने से लोग एन.एच.आई की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे है। लोगो का कहना है की 3 महीने के अंदर ही आखिर पुल दुबारा कैसे धंस गया।

चौसा के रास्ते में सैकड़ों गाड़ियां व यात्री जाम में फंसी रहीं। कई लोगों की ट्रेनें छूट गई जबकि दर्जनों यात्री नवगछिया से चौसा पैदल पहुंचे। सबसे अधिक परेशानी मरीजों, बूढ़ों व बच्चों को हुई। भूखे-प्यासे वे यातायात व्यवस्था की कमान संभाल रहे पुलिसकर्मियों को कोस रहे थे। कई मरीज घंटों जाम में फंसे रहे।जाम इस कदर था कि वाहनों को एक इंच भी आगे बढ़ने की जगह नहीं थी। ऑटो व बाइक सवार लोगों की स्थिति तो और भी बुरी थी। वे इस कदर जाम में फंसे थे कि चाह कर भी वापस नहीं लौट पा रहे थे।सड़क के आलावा कच्ची जमीन पर भी वाहनों की लंबी कतार आड़ी-तिरछी लगी हुई थी।एक तरफ ट्रकों की लंबी कतार लगे रहने के कारण सड़कें संकरी हो गई थी। दो-तीन लाइनों में चार पहिया वाहनों के चलने के कारण जाम लग गया था। दोपहर 12 बजे स्थिति यह हो गई थी कि मोटर साइकिल सवार जीरोमाइल नवगछिया पहुंचने की स्थिति में नहीं थे।

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